यूपी की कैंपियरगंज सीट से बीजेपी विधायक फतेह बहादुर सिंह ने अपनी जान को खतरा बताया है. सबसे पहले उन्होंने गोरखपुर के डीएम और एसपी को इसकी लिखित सूचना दी. जिसके बाद डीएम और एसएसपी ने एक जांच कमेटी गठित कर दी और जांच भी शुरू कर दी. लेकिन देर होते देख विधायक ने मीडिया के सामने आकर कहा कि 5 करोड़ रुपये की सुपारी देकर उनकी हत्या की प्लानिंग की जा रही है. इसमें 1 करोड़ रुपये चंदा इकट्ठा भी कर लिया गया है. बीजेपी विधायक के इस बयान से गोरखपुर से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मच गया, जिसके बाद खुद जिले के डीएम और एसएसपी को सामने आकर बयान देना पड़ा
डीएम कृष्णा करुणेश और एसएसपी डॉक्टर गौरव ग्रोवर ने बताया कि कैंपियरगंज विधायक फतेह बहादुर द्वारा प्रार्थना पत्र मिलने के बाद से ही मामले में जांच-पड़ताल और विधिक कार्यवाही की जा रही है. पुलिस, स्वाट, एसओजी समेत एसटीएफ को भी लगाया गया है. वर्तमान में विधायक को वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है. उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं.
बकौल एसएसपी- जिस शख्स पर विधायक जी ने 1 करोड़ रुपये चंदा इकट्ठा कर हत्या की साजिश आरोप लगाया है, उसकी मां सरोज देवी बीजेपी की जिला पंचायत सदस्य हैं. फिलहाल, कुछ लोगों से पूछताछ की गई है. सर्विलांस के माध्यम से भी इनपुट जुटाए जा रहे हैं. जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके हिसाब से कार्यवाही की जाएगी.
आरोपित पक्ष ने क्या कहा?
वहीं, आरोपित पक्ष यानि जिला पंचायत सदस्य सरोज देवी और उनके बेटे राजीव रंजन चौधरी ने गुरुवार की देर शाम सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि विधायक फतेह बहादुर चुनावी रंजिश का बदला ले रहे हैं. उन्होंने हमारे परिवार का जीना दुश्वार कर दिया है. फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भिजवाना चाहते हैं.
आरोपित पक्ष का आरोप है कि विधायक लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी के प्रचार का दबाव बना रहे थे. मना कर दिया, इसलिए फर्जी मुकदमे में फंसाकर हमारी हत्या कराना चाहते हैं. चूंकि, विधायक की पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष हैं और हम जिला पंचायत सदस्य, ये भी झगड़े का एक कारण है.
कौन हैं फतेह बहादुर सिंह?
बता दें कि फतेह बहादुर कैंपियरगंज के 6 बार के विधायक हैं. वह राज्य में बसपा सरकार मंत्री भी रह चुके हैं. उनके पिता स्व. वीर बहादुर सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं. बीते दिनों उन्होंने दावा किया कि विपक्षियों ने साजिश कर उनकी हत्या की योजना तैयार की है. इसके लिए चंदा इकट्ठा किया जा रहा है.
गजेंद्र त्रिपाठी