UP में गाय के बच्चे की इंसानी शक्ल, देखने की उमड़ी भीड़!

ये सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लगेगा, पर सच है. उत्तर प्रदेश में इंसानों की तरह दिखने वाला एक गाय के बच्चा पैदा हुआ. उसका ऊपर का हिस्सा बिल्कुल इंसानों जैसा था, जबकि उसके शरीर का निचला हिस्सा गाय की तरह था.

Advertisement
प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

केशवानंद धर दुबे

  • लखनऊ,
  • 03 जून 2017,
  • अपडेटेड 5:19 PM IST

ये सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लगेगा, पर सच है. उत्तर प्रदेश में इंसानों की तरह दिखने वाला एक गाय के बच्चा पैदा हुआ. उसका ऊपर का हिस्सा बिल्कुल इंसानों जैसा था, जबकि उसके शरीर का निचला हिस्सा गाय की तरह था.

हालांकि, उसकी जन्म के एक घंटे के अंदर मौत हो गई. भारतीय पशु आश्रय के श्रमिकों का मानना ​​है कि यह विकृत नवजात बछड़ा एक ईश्वर का रूप हो सकता है. जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश में मरे हुए बछड़े की ख़बर फैली वैसे-वैसे लोगों ने वहां आना शुरू कर दिया. उसको श्रद्धांजलि समर्पित करने के लिए सैकड़ों स्थानीय लोग आए. आस-पास के गांवों के लोग आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इकट्ठा हुए. लोगों का मानना है कि ये भगवान विष्णु का अवतार है.

Advertisement

50 वर्षीय महेश कथुरिया, जो कि एक स्थानीय व्यापारी है वो बछड़े को देखने आए. उसे देखते ही वो बोले की भगवान ने एक गाय के शरीर के रूप में जन्म लिया है. यहां हम उनसे आशीर्वाद पाने के लिए आए है. उन्होंने कहा कि यह भगवान विष्णु का अवतार है.

गाय आश्रय के प्रबंधक, राजा भैया मिश्रा ने कह कि 'यह एक चमत्कार है कि एक ऐसे बछड़े का जन्म हुआ. हजारों लोग इसे देखने के लिए यहां आए हैं हम इसका तीन दिन में संस्कार करेंगे और एक मंदिर इसके लिए बनाया जाएगा. साथ ही उन्होंने कहा कि इस अवतार ने निश्चित रूप से लोगों के बीच भक्ति भावना पैदा की है. उन्होंने कहा कि इसकी मां को एक कसाई से बचाया गया था. छह महीने पहले उसे आश्रय में लाया गया था.

Advertisement

विशेषज्ञों का कहा कि ये सिर्फ अंधविश्वास है
हालांकि, पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञों का जन्म के बारे में एक अलग दृष्टिकोण है. जो कि उत्पन्न इस अंधविश्वास को मिटता है. भारत में वन्यजीव एसओएस के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ अजय देशमुख ने कहा, कि यह एक शारीरिक विसंगति का मामला है. यदि एक जीन ठीक से विकसित नहीं हुई है या कोई गलती हुई है, तो यह विकृति का कारण बनती है. साथ ही ऐसी विसंगतियां होती हैं. इसके पीछे केवल वैज्ञानिक कारण हैं, अंधविश्वास नहीं है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement