पिछले दिनों मेरे छोटे भाई का जन्मदिन था. वही भाई जो 4 साल पहले मुझे छोड़कर चला गया था. सिर्फ मुझे ही नहीं, वो सबको छोड़कर चला गया था. मुझे उसके जन्मदिन की हर एक चीज याद थी. मुझे याद है मैं उसे देखने के लिए तालाब से भाग कर आया था, मेरा चप्पल भी छूट गया था. जब तक भाई के साथ रहा, मैं ही उसे सबसे पहले हैप्पी बर्थडे बोलता था. मैं उसे समझाता था कि आज ही के दिन तुम दुनिया में आए थे, आज के दिन ही मैं चप्पल तालाब पर भूल आया था. वो कहता था, किसी का जन्म नहीं होता, किसी का नहीं हुआ. क्योंकि आत्मा का न तो कभी जन्म होता है और न ही उसकी मृत्यु होती है.