हम सब गुजरते वक्त के साथ शायद अपने बुजुर्गों का ख्याल करना भूल जाते हैं और ऐसे में हमारे घर के बुजुर्ग अपने अकेलेपन में जीने लगते हैं. जीवन की इस उम्र का अकेलापन उन्हें मानसिक तौर पर परेशान करता है और जब ये परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है तो हमारी नजरों में वो बीमार हो जाते हैं.
हमें चाहिए कि हम अपने बुजुर्गों को अपने हर छोटी-बड़ी बात में शामिल करें. उन्हें ये एहसास दें कि वो हमारे बीच के ही हैं उनकी शारीरिक क्षमता भले ही कम हो गई हो लेकिन फिर भी वो हम सभी के दिलों के सबसे अजीज और प्यारे हैं. ये एहसास जब उन्हें हो जाएगा तो यकीन मानिए कि वो बिल्कुल भी बीमार और दुखी नहीं दिखेंगे.