नया नागरिकता कानून लागू, जानिए देशभर में किसके लिए क्या बदल गया, Explainer

पाकिस्तान-बांग्लादेश-अफगानिस्तान से आए हुए हिंदू-जैन-बौद्ध-सिख-ईसाई-पारसी शरणार्थी आसानी से भारत की नागरिकता हासिल कर पाएंगे.

Advertisement
नागरिका संशोधन कानून का जारी है विरोध (फोटो: PTI) नागरिका संशोधन कानून का जारी है विरोध (फोटो: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 11:49 AM IST

  • कानून बना नागरिकता संशोधन बिल
  • राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के बाद बना कानून
  • पूर्वोत्तर में लगातार जारी है विरोध

तमाम विरोध और प्रदर्शनों के बावजूद नागरिकता संशोधन बिल अब कानून बन गया है. लोकसभा और राज्यसभा से बिल के पास होने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसे मंजूरी दे दी है, जिसके बाद अब ये कानून बन गया है. यानी पाकिस्तान-बांग्लादेश-अफगानिस्तान से आए हुए हिंदू-जैन-बौद्ध-सिख-ईसाई-पारसी शरणार्थी आसानी से भारत की नागरिकता हासिल कर पाएंगे.

Advertisement

इस बिल को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहले लोकसभा, फिर राज्यसभा में पेश किया था. कई घंटों की तीखी बहस के बाद ये बिल सदन में पास हुआ, लोकसभा में तो मोदी सरकार के पास बहुमत था लेकिन राज्यसभा में बहुमत ना होने के बावजूद सरकार को जीत मिली है.

नागरिकता संशोधन बिल को लेकर विरोध क्यों हो रहा है, अब क्या नया कानून बन गया है और क्या बदलने वाला है. इस नज़र डालें...

क्या है नागरिकता संशोधन कानून?

नागरिकता अधिनियम, 1955 में बदलाव करने के लिए केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन बिल लेकर आई. बिल के कानून बनने के साथ ही इसमें बदलाव हो गया. अब पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए हुए हिंदू-जैन-बौद्ध-सिख-ईसाई-पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलने में आसानी होगी. अभी तक उन्हें अवैध शरणार्थी माना जाता था.

Advertisement

पहले भारत की नागरिकता लेने पर 11 साल भारत में रहना अनिवार्य होता था, लेकिन अब ये समय घटा कर 6 साल कर दिया गया है.

राष्ट्रपति ने दी बिल को मंजूरी

किन शरणार्थियों को मिलेगा फायदा?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में अपने भाषण में दावा किया था कि ऐसे लाखों-करोड़ों लोग हैं जिन्हें इस कानून से फायदा मिलेगा. नए कानून के मुताबिक, ये सभी शरणार्थियों पर लागू होगा चाहे वो किसी भी तारीख से आए हों.

यानी जिस तारीख को वह भारत में आए, तभी से उन्हें भारत का नागरिक मान लिया जाएगा. अभी सरकार की ओर से एक कटऑफ तारीख भी जारी की गई है, 31 दिसंबर 2014 से पहले आए सभी हिंदू-जैन-बौद्ध-सिख-ईसाई-पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिल जाएगी.

कहां पर लागू नहीं होगा ये कानून?

मोदी सरकार के इस कानून का पूर्वोत्तर में जबरदस्त विरोध हो रहा है. असम, मेघालय समेत कई राज्यों में लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं और लगातार बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. हालांकि, सरकार ने कानून लागू करते वक्त ये भी ऐलान किया है कि मेघालय, असम, अरुणाचल, मणिपुर के कुछ क्षेत्रों में कानून लागू नहीं होगा.

स्थानीय लोगों की मांग के कारण केंद्र सरकार ने यहां इनर लाइन परमिट जारी किया है, इसकी वजह से ये नियम यहां लागू नहीं होंगे. पूर्वोत्तर के राज्यों का कहना है कि अगर शरणार्थियों को यहां पर नागरिकता दी जाएगी तो उनकी अस्मिता, कल्चर पर असर पड़ेगा.

Advertisement

इनर लाइन परमिट एक यात्रा दस्तावेज है, जिसे भारत सरकार अपने नागरिकों के लिए जारी करती है, ताकि वो किसी संरक्षित क्षेत्र में निर्धारित अवधि के लिए यात्रा कर सकें.

क्यों हो रहा है कानून का विरोध?

इस कानून का विरोध पुरजोर तरीके से हो रहा है, सड़क से लेकर संसद तक सरकार पर लोग हमलावर हैं. कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां इस कानून को संविधान का उल्लंघन कह रही हैं और भारत के मूल विचारों के खिलाफ बता रही हैं. कांग्रेस ने संसद में भी इस बिल का विरोध किया था और गिनाया था कि ये बिल आर्टिकल 14 का उल्लंघन करता है, जो कि समान नागरिकता का हल देता है.

सिर्फ कांग्रेस नहीं बल्कि कई वकील, विचारकों ने भी इस बिल को कानून का उल्लंघन बताया है. कानूनी जानकारियों की मानें, तो ये बिल ना सिर्फ आर्टिकल 14, बल्कि आर्टिकल 5, आर्टिकल 21 का भी उल्लंघन करता है. इस बिल के विरोध में कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में भी लागू हो गई हैं. विपक्ष का आरोप ये भी है कि सरकार पहले CAB लाकर NRC की तैयारी कर रही है, जो कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ है.

कानूनी नजरिए से अलग पूर्वोत्तर में इस बिल का विरोध इसलिए हो रहा है, क्योंकि इसका असर उनकी अस्मिता पर पड़ रहा है. पूर्वोत्तर के कई छात्र संगठनों का कहना है कि बाहरी लोग अगर असम-अरुणाचल समेत अन्य राज्यों में बसेंगे, तो उनकी भाषा, अस्मिता, संस्कृति पर असर पड़ेगा और ये बड़ा नुकसान होगा.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement