बेस्ट वेस्ट वेल्थ क्रिएटर्स
विजेता: 'वेस्ट टु वंडर पार्क' बनाने वाला दक्षिणी दिल्ली नगर निगम
जीत की वजह: कूड़ा-करकट डालने के गड्ढे को ठीक करके उस पर 150 टन के औद्योगिक कचरे से सार्वजनिक हरित क्षेत्र विकसित करने के लिए
अगर आप दिल्ली में रहते हैं और दुनिया के कुछ मशहूर स्मारकों के सामने खड़े होकर सेल्फी लेना चाहते हैं तो आपको सराय काले खां में 'वेस्ट टु वंडर पार्क' जाना चाहिए, जहां आप दुनिया के सात आश्चर्यों की प्रतिकृतियों के सामने खड़े होकर फोटो खिंचवा सकते हैं. इस पार्क के बारे में जो बात विशिष्ट है, वह यह है कि इसे लगभग 150 टन औद्योगिक तथा अन्य कचरे से बनाया गया है.
इस पार्क का निर्माण लगभग 60 लाख आबादी वाले नागरिक निकाय दक्षिण दिल्ली नगर निगम ने किया है. इसे आम लोगों के लिए पिछली फरवरी में खोला गया था.
निगम ने अपनी 'वेस्ट टु आर्ट' परियोजना की शुरुआत 2017-18 में की थी जब वह सार्वजनिक स्थानों पर बेकार सामग्री से बनी कलाकृतियां स्थापित करना चाहता था. ऐसी 30 कलाकृतियां चौराहों, बाजारों और पार्कों में लगाई गई थीं. इसे 'वेस्ट टु वंडर पार्क' बनाने की प्रेरणा मिली फिल्म बद्रीनाथ की दुल्हनिया से, जिसमें कोटा का सेवेन वंडर्स पार्क दिखाया गया है.
प्रसिद्ध स्मारकों की अनुकृतियां बनाने के लिए निगम ने ऑटोमोबाइल के बेकार हिस्सों-पुर्जों और धातु की रद्दी चीजों जैसे पंखों, छड़ों, लोहे की चादरों, साइकिलों और मोटरसाइकिलों के पुर्जों, अप्रयुक्त पड़ी सीवर लाइनों और राजधानी के 24 म्युनिसिपल स्टोरों में पड़े पुराने उपकरणों का उपयोग किया. दिल्ली मेट्रो से वापस लिए गए एक गढ्ढे को पार्क की जगह के तौर पर चुना गया. तेरह कलाकारों और 50 मजदूरों ने छह महीने तक काम करके साढ़े सात करोड़ रुपए में यह परियोजना पूरी की.
इस पार्क को सार्वजनिक उपयोग के लिए खोलने के बाद से केवल चार महीने में निगम ने इसके प्रवेश शुल्क से दो करोड़ रुपए हासिल कर लिए. इस पार्क में बैठने की जगहें हैं, खुले लॉन हैं और बुर्ज हैं जहां बैठकर पार्क के नजारे देखे सकते हैं. पार्क में धातु के डिब्बों का उपयोग करते हुए शौचालय बनाए गए हैं और यहां विद्युत आपूर्ति सौर ऊर्जा से होती है. पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो गए इस पार्क में हर दिन औसतन दस हजार लोग आते है. यहां घूमते हुए उनके लिए यह कल्पना करना कठिन होता है कि उनके पैरों के नीचे दिख रही हरी घास के नीचे कूड़ा-कचरा पाटने का गढ्ढा था.
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कौशिक डेका