VVS लक्ष्मण का खुलासा- 281 नहीं, करियर का 'टर्निंग प्वाइंट' रहे 167 रन

वीवीएस लक्ष्मण ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2018 में शिरकत की और अपने क्रिकेट जीवन से जुड़े अनछुए पहलू साझा किए.

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वीवीएस लक्ष्मण वीवीएस लक्ष्मण

aajtak.in

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  • 21 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 8:19 AM IST

वीवीएस लक्ष्मण की 281 रनों की पारी भले ही इतिहास का हिस्सा बन गई हो, लेकिन यह दिग्गज बल्लेबाज इस पारी को अपने करियर का 'टर्निंग प्वाइंट' नहीं मानता. शुक्रवार को लक्ष्मण ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ-2018 के सत्र '281 एंड बियॉन्ड: मेकिंग ऑफ ए चैंपियन ( 281 and Beyond: Making of a Champion) में शिरकत की और अपने क्रिकेट जीवन से जुड़े अनछुए पहलू साझा किए. दरअसल, हाल ही में लक्ष्मण की आत्मकथा '281 and Beyond' प्रकाशित हुई है और उनकी इस किताब के नाम को इस सत्र के शीर्षक के साथ जोड़ा गया. विशाखापत्तनम में जारी दो दिवसीय कॉन्क्लेव के इस सेशन का संचालन टीवी टुडे नेटवर्क के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई ने किया.

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जब भी 'कलाई के जादूगर' 'वेरी वेरी स्पेशल' वीवीएस लक्ष्मण की बात की जाती है, तो उनकी 2001 में 281 रनों की कोलकाता वाली पारी सुर्खियों में आ जाती है. जिसकी बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया के 16 टेस्ट मैचों के विजय रथ को रोका था. लेकिन, 44 साल के लक्ष्मण अपने 16 साल के टेस्ट करियर का टर्निंग प्वाइंट पहले टेस्ट शतक को मानते हैं. लक्ष्मण ने कहा, मुझे खुशी है कि सभी कोलकाता के टेस्ट मैच को याद करते हैं. उस टेस्ट ने बताया कि कभी हार नहीं माननी चाहिए. मुझे लगता है कि उस टेस्ट सीरीज ने विश्वास भरा कि हम दुनिया में किसी के भी खिलाफ अच्छा कर सकते हैं.’

लक्ष्मण करियर में महज एक शतक और 28 की औसत के साथ कोलकाता टेस्ट में उतरे थे. और उनकी पारी की बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया को महज तीन दिनों में धूल चटाई थी. लक्ष्मण ने राहुल द्रविड़ (180 रन) के साथ फॉलोऑन पारी के दौरान 376 रनों की  यादगार पार्टनरशिप की. क्या इस पारी ने उनके क्रिकेट जीवन को बदल दिया, यह पूछे जाने पर लक्ष्मण ने कहा, ' 281 रनों की पारी नहीं, बल्कि करियर का पहला शतक मेरे करियर का टर्निंग प्वाइंट रहा. 2000 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी टेस्ट में 167 रनों की पारी ने आत्मविश्वास बढ़ाया. इससे पहले तक खुद की काबिलियत पर मुझे भरोसा नहीं था. मैंने 1996 में टेस्ट में डेब्यू के बाद से कई पारियां खेलीं, लेकिन अर्धशतक को शतक में तब्दील नहीं कर पा रहा था. इस शतक के बाद ही मैंने घरेलू क्रिकेट के एक सत्र में 1400 से ज्यादा रन बनाए.'

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उस टेस्ट मैच की दूसरी पारी में भारत ने 33 रनों पर तीन विकेट गंवा दिए थे, तब सलामी बल्लेबाज लक्ष्मण का साथ देने सौरव गांगुली उतरे. इस साझेदारी ने विकेट गिरने की रफ्तार को धीमा किया. गांगुली 25 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन लक्ष्मण के साथ बहुमूल्य 58 रन जोड़े. आखिरकार लक्ष्मण आठवें विकेट के रूप में पवेलियन लौटे. 198 गेंदों में 167 रनों की पारी के बावजूद वह भारत की हार बचा नहीं पाए. ऑस्ट्रेलिया ने वह सिडनी टेस्ट मैच पारी और 141 रनों से जीता.

उल्लेखनीय है कि रणजी ट्रॉफी में वीवीएस लक्ष्मण के नाम एक सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड है और यह कीर्तिमान अब भी कायम है. उन्होंने 1999/2000 सीजन में हैदराबाद की ओर से खेलते हुए कुल 1415 रन बनाए थे, जिसे आज तक किसी ने नहीं छुआ है. सिक्किम की ओर से खेलने वाले मिलिंद कुमार 2018/19 में 1331 रन बनाकर दूसरे पायदान हैं, जबकि मुंबई के श्रेयस अय्यर 2015/16 सीजन में 1321 रन बनाकर तीसरे स्थान पर हैं.

लक्ष्मण ने 11,119 इंटरनेशनल रन बनाए, जिनमें से 3,173 रन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रहे. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लक्ष्मण का बल्ला हमेशा बोला. लक्ष्मण ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2000 से ज्यादा टेस्ट रन बनाने वाले सचिन तेंदुलकर के बाद दूसरे भारतीय क्रिकेटर हैं. लक्ष्मण ने कहा, 'मैंने अपने टेस्ट करियर के दौरान ही नहीं, बल्कि अंडर-19 लेवल से ही ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने का हमेशा मजा लिया. 2000-01 में यह भारतीय टीम थी, जिसने ऑस्ट्रेलिया को चुनौती दी. मेरी बल्लेबाजी शैली उनकी स्थितियों के अनुकूल रही. ऑस्ट्रेलिया ने मजबूर किया कि उनके खिलाफ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा.'

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