अपने नूडल ब्रांड-मैगी को लेकर स्विस महारथी नेस्ले भारत में जिस विवाद में आ चुकी है, वह निश्चित रूप से दो मिनट का मसला नहीं है. ब्रिटानियामैन के नाम से जाने जाने वाले सुनील अलघ कहते हैं, “एक ब्रांड का निर्माण करने में 50 साल लगते हैं और उसे नष्ट करने में 50 मिनट.”
नेस्ले की 9,000 करोड़ रु. की आमदनी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा मैगी से आता है. कंपनी ने भारत में इंस्टैंट नूडल्स का बाजार निर्मित किया और काम करने के लिहाज से यह देश में सबसे अच्छी कंपनियों में से एक मानी जाती है. इस कंपनी पर नजर रखने वाले विश्लेषक कंपनी के मानकों और इसकी वैश्विक कार्यप्रणाली को प्रमाणित करते हैं. एक एफएमसीजी विश्लेषक कहते हैं, “यह खबर आघात की तरह आई. मुझे कोई संदेह नहीं है कि कंपनी ने भारत में भी सबसे अच्छी वैश्विक परीक्षण कार्य प्रणालियों का पालन किया होगा. मुझे लगता है कि सरकार इसे जरूरत से ज्यादा तूल दे रही है.”
इंडिया टुडे ने जिन अनेक ब्रांड विशेषज्ञों और कंपनी विश्लेषकों से बात की, उन सबकी राय यही थी. अगर उपभोक्ता इस बात से हैरान थे कि उनकी प्रिय मैगी मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त थी, तो नेस्ले भी यह जानकर सदमे की स्थिति में आ गई थी, जब कंपनी को पता चला था कि परीक्षण में मैगी के नमूनों में मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) और सीसे का स्तर अधिक पाया गया&यह पता भी किसी सरकारी प्राधिकरण के माध्यम से नहीं चला, बल्कि तब चला जब उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने प्रयोगशाला के निष्कर्षों को सार्वजनिक करने का फैसला किया.
नेस्ले के एक अधिकारी का कहना है, “आप कुछ भी परीक्षण कर लें, एमएसजी उसमें निकलेगा. जहां तक सीसे का संबंध है, आपने फरवरी 2014 में एक नमूना उठाया, जिसका परीक्षण अंततः अप्रैल 2015 में किया गया. इसके अलावा मैगी को छह महीने तक रखा जा सकता है. फिर उन्होंने हमें उनसे बात करने का मौका दिए बिना नतीजों को सार्वजनिक कर दिया.” हालांकि खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार किसी उत्पाद की एक्सपायरी से उसमें मौजूद सीसे का स्तर प्रभावित नहीं होता है.
कंपनी ने यह दोहराते हुए कि उत्पाद सुरक्षित है, स्वेच्छा से सभी तरह की मैगी को वापस ले लिया, लेकिन उत्तराखंड को छोड़कर उसने अभी तक उत्पाद वापस लेने के राज्यों के आदेश के खिलाफ अपील नहीं की है. अगर नेस्ले राज्यों के निष्कर्षों को स्वीकार नहीं करती है तो कानूनी तौर पर उसे अपील करने का अधिकार है. कंपनी का कहना है कि वह दूसरे राज्यों से आधिकारिक सूचना का इंतजार कर रही है, जबकि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) जोर देकर कहता है कि उसे जो भी कुछ कहना था, वह उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध है.
नेस्ले टेस्टमेकर के साथ नूडल केक का मिश्रण करके परीक्षण करने के अपने स्वयं के परीक्षण प्रोटोकॉल का पालन करना जारी रखे हुए है, क्योंकि उत्पाद का सेवन इसी तरीके से किया जाता है.
परीक्षण की भिन्न रिपोर्ट आने के प्रमुख कारणों में एक यह है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण दोनों उत्पादों का अलग-अलग परीक्षण करता है. नेस्ले के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि “ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब हमारे नमूने परीक्षण के लिए लिये गए हैं. वास्तव में, जब 15 महीने पहले नमूने लिए गए थे और उसके बाद उनके बारे में कोई बात नहीं हुई थी, तब हमने इसके बारे में सोचा भी नहीं था.” वे भारत में श्रेष्ठ उत्पादन व्यवहार का हवाला देकर कहते हैं कि “आप स्वाद बढ़ाने वाले तत्व जितने चाहे डाल सकते हैं. नूडल्स के लिए कोई सीमा नहीं है. अगर कोई सीमा नहीं है, तो आप किसी व्यक्ति को कैसे रोक सकते हैं?” जबकि एफएसएसएआइ कहता है कि भारत अतिरिक्त एमएसजी डालने की अनुमति नहीं देता है.
आगे क्या होगा? वैश्विक सीईओ पॉल बल्के कह चुके हैं कि कंपनी यथासंभव शीघ्र वापसी करेगी. इस बीच, मैगी को वापस बाजार में लाने के लिए नेस्ले का आगे क्या करने का प्रस्ताव है, एफएसएसएआइ अभी भी इसका इंतजार कर रही है.
श्वेता पुंज