प्रख्यात लेखक सलमान रश्दी और उनका परिवार दिल्ली में अपने पुश्तैनी मकान को पुन: हासिल करने की तीन दशक से चली आ रही कानूनी लड़ाई हार गया है. उनके पिता ने 1970 में इस बंगले को किसी अन्य परिवार को बेचने पर सहमति जताई थी.
उच्चतम न्यायालय ने रश्दी परिवार को इस समझौते का सम्मान करने का निर्देश दिया है. हालांकि शीर्ष अदालत ने खरीददार को संपत्ति की मौजूदा बाजार कीमत का भुगतान करने को कहा है.
रशदी के पिता अनीस अहमद रश्दी ने तत्कालीन कांग्रेसी नेता भीकू राम जैन को पॉश सिविल लाइंस इलाके में स्थित अपना घर तीन लाख 75 हजार रुपये में बेचने का समझौता किया था. जैन ने रश्दी को 50 हजार रुपये का भुगतान किया था और आश्वासन दिया था कि जब मकान मालिक आयकर प्रशासन से कर अनापत्ति प्रमाणपत्र हासिल कर लेगा, तो वह बाकी की राशि का भुगतान भी कर देंगे.
इसके बाद दोनों परिवारों में झगड़ा शुरू हो गया. दोनों ने एक-दूसरे पर करार का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया. जैन ने इसके बाद 1977 में एक मुकदमा दाखिल कर मामले की सुनवाई करने वाली अदालत से रश्दी को दिसंबर 1970 में किए गए करार का सम्मान करने का निर्देश दिए जाने की अपील की.
पांच अक्तूबर 1983 को अदालत ने उनके पक्ष में फैसला दिया और कहा कि जैन बाकी की तीन लाख 25 हजार रुपये की रकम अदा कर संपत्ति ले सकते हैं.
भाषा