निवेशकों और बिल्डरों को बड़ी राहत, खाली घरों की रेंटल इनकम पर टैक्स हटाने की सिफारिश

खाली पड़े घरों पर आने वाले दिनों में टैक्स रियायत मिल सकती है. आम निवेशकों के अलावा उन बिल्डरों को भी खाली पड़े फ्लैट्स के लिए भारी भरकम टैक्स जमा करना पड़ता है जिनके फ्लैट बिक नहीं पाए हैं. अगर सरकार सिफारिश मान लेती है तो काफी निवेशकों को फायदा होगा.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

दीपू राय

  • नई दिल्ली,
  • 03 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 11:21 PM IST

खाली पड़े घरों पर आने वाले दिनों में टैक्स रियायत मिल सकती है. सरकार की ओर से गठित डायरेक्ट टैक्स पैनल ने सिफारिश की है कि खाली पड़े घरों को डीम्ड रेंटल इनकम नहीं माना जाए और उनसे टैक्स की वसूली नहीं की जानी चाहिए.

आम निवेशकों के अलावा उन बिल्डरों को भी खाली पड़े फ्लैट्स के लिए भारी भरकम टैक्स जमा करना पड़ता है जिनके फ्लैट बिक नहीं पाए हैं. फिलहाल देशभर में कुल करीब 6.65 लाख फ्लैट्स ऐसे हैं जिनका कोई खरीदार नहीं है. प्रॉपर्टी कंसल्टेंट कंपनी अनारॉक के मुताबिक इन तैयार फ्लैट्स की अनुमानित कीमत करीब 5.36 लाख करोड़ रुपये है.

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नोशनल इनकम पर टैक्स हटाने की सिफारिश

सरकार समय-समय पर इस नोशनल टैक्स में रियायत देती रहती है, लेकिन टैक्स पर बने डायरेक्ट टैक्स पैनल ने इनकम टैक्स कानून में बदलाव करके नोशनल इनकम पर लगने वाले टैक्स को हटाने की सिफारिश की है.

मौजूदा कानून के मुताबिक अगर आपने अपना खाली पड़े घरों को किराये पर नहीं दिया है तो भी सरकार यह मानकर चलती है कि आपको उससे किराया मिलता है. इस तरह के किराए को टैक्स की भाषा में डिम्ड रेंटल इनकम माना जाता है और उसे आपकी सालाना टैक्सेबल इनकम में जोड़ दिया जाता है. हालांकि सरकार रेंटल इनकम को जोड़ते समय ब्याज और मरम्मत जैस घरों पर कुछ कटौती का फायदा देती है, लेकिन बाकी बचे रकम पर मकान मालिक को टैक्स देना पड़ता है.

टैक्स पर गठति कमेटी ने 19 अगस्त को वित्त मंत्रालय को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केवल कांट्रैक्ट वाले किराए की इनकम पर ही टैक्स लगना चाहिए. खाली पड़े मकान पर टैक्स लगाने का कोई तुक नहीं है.

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इस टैक्स की सबसे ज्यादा मार उन बिल्डरों पर पड़ती है जिनके फ्लैट्स बिके नहीं है. दूसरी तिमाही देश के सात बड़े शहरों में तकरीबन पौने सात लाख बने बनाए फ्लैट्स खाली पड़े हैं.

प्रॉपर्टी कंसलटेंट अनारॉक के चेयरमैन अनुज पूरी का कहना है कि सरकार ने इस साल अंतरिम बजट में नोशनल इनकम पर फौरी तौर रियायत दी थी जिसका फायदा हुआ लेकिन अगर नए टैक्स कानून में  इस तरह का बदलाव होता है तो इससे रियल एस्टेट पर इन्वेंट्री का दबाव कम हो जाएगा. बहुत जल्द ही कई प्रोजेक्ट पूरे होने वाले हैं और खाली पड़े मकानों की संख्या और बढ़ने वाली है. पैसे की किल्लत झेल रहे बिल्डरों को नोशनल इनकम पर मिलने वाली यह रियायत एक बड़ी राहत होगी

डायरेक्ट टैक्स पर गठित टास्क फोर्स ने भी घर के मरम्मत पर मिलने वाले 30 फीसदी के स्टैंडर्ड डिडक्शन को घटाकर 25 फीसदी करने की सिफारिश की है. इसके अलावा टास्क फोर्स ने सेल्फ आकुपाइड घर 2 लाख रुपए की ब्याज छूट को एक घर तक सीमित करने की सिफारिश भी की है.  

करीब दो साल पहले सरकार ने पुराने और जटिल हो चुके इनकम टैक्स कानून को आसान और अपडेट करने के लिए 22 नवंबर 2017 को तत्कालीन सीबीटी सदस्य अरविंद मोदी के नेतृत्व में एक टास्क फोर्स बनाया. मोदी के रिटायरमेंट के बाद इस टास्क फोर्ट 26 नवंबर 2018 को दोबारा गठित की गई. जिसका नेतृत्व सीबीडीटी सदस्य अखिलेश रंजन ने किया.

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टास्क फोर्स ने 19 अगस्त 2019 को अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को सौंप दी है जिसमें हाउसिंग प्रॉपर्टी सहित कई टैक्स नियमों में बदलाव की सिफारिश की गई है.

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