मोटापा कम करना हुआ आसान

मोटापे और डायबिटीज की वजह से दिल का दौरा, दिमागी दौरा, अंधापन, फेफड़े का खराब होना, शरीर की नसों को नुकसान होने का खतरा हो सकता है. तंबाकू के बाद कैंसर की दूसरी वजह मोटापा ही है. लेकिन मोटापे और डायबिटीज पर कंट्रोल करना अब आसान हो गया है.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2015,
  • अपडेटेड 3:49 PM IST

मोटापे और डायबिटीज की वजह से दिल का दौरा, दिमागी दौरा, अंधापन, फेफड़े का खराब होना, शरीर की नसों को नुकसान होने का खतरा हो सकता है. तंबाकू के बाद कैंसर की दूसरी वजह मोटापा ही है. लेकिन मोटापे और डायबिटीज पर कंट्रोल करना अब आसान हो गया है.

54 वर्षीय विनोद गुप्ता 123 किलोग्राम वजन के साथ डायबिटीज और मोटापे की बीमारी से परेशान थे. उनका (बीएमआई) सामान्य स्तर से बढ़कर 39.4 तक पहुंच गया था. लेकिन अब बॅरिएट्रिक सर्जरी से वह इन बीमारियों से ठीक हो चुके हैं. इससे उन्होंने छह माह में  26.7 किलोग्राम वजन कम कर लिया और आज दो साल बाद भी विनोद का वजन 80 किलोग्राम है.

फोर्टिस हॉस्पिटल में मेटाबोलिक एंड बॅरिएट्रिक सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. अतुल पीटर्स ने बताया, अगर डायबिटीज और मोटापे पर कंट्रोल न होने से कई बड़े खतरे जैसे-दिल का दौरा, दिमागी दौरा, अंधापन, फेफड़े का खराब होना, शरीर की नसों को हानि जैसी बीमारियां पैदा कर सकती हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि अगर महिला की कमर का आकार 35 और पुरुष की कमर का आकार 40 से ज्यादा है तो डायबिटीज की जांच करानी चाहिए. ऐसे मामले में बांझपन होना एक आम बात है. ऐसा पाया गया है कि 70 प्रतिशत से ज्यादा बांझपन के मामले मोटापे और डायबिटीज की वजह से होते हैं.

विनोद गुप्ता की सर्जरी के दो महीने के बाद उनके पुत्र वैभव को भी बॅरिएट्रिक सर्जरी करानी पड़ी. दरअसल 30 वर्ष की उम्र में 138 किलोग्राम के वजन के साथ उनका (बीएमआई ) 41.1 के स्तर पर जा पंहुचा था. अपने पिता की तरह वो भी 'डायबिटीज', 'डाइस्लिपीमेडिया' और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों से परेशान थे.

छह महीने में उन्होंने 27 किलोग्राम वजन कम किया और अब वैभव का वजन 93 किलोग्राम है. विनोद गुप्ता का ऑपरेशन 16 अगस्त 2012 को हुआ था, वहीं वैभव का ऑपरेशन अपने पिता की सर्जरी के दो महीने बाद 11 अक्टूबर 2012 को हुआ.

मोटापा कई बीमारियों की जड़ है, ऐसे में इससे बचाव से ही बीमारियों से दूर रहा जा सकता है. डॉ. अतुल पीटर्स के मुताबिक दवाओं के जरिए इलाज कराने वाले मरीजों के मुकाबले में बॅरिएट्रिक सर्जरी अपनाने वाले मरीज ज्यादा मात्रा में वजन कम कर लेते हैं.

लक्षण:
- असाधारण तोंद
- रक्तप्रवाह का स्तर अनुरूप न होना
- ब्लड शुगर में बढ़ोतरी
- सूजन और जलन का होना
- मीठा खाने की ख्वाहिश, खासकर खाने के बाद
- खाना खाने के बाद थकान हो जाना
- बार-बार पेशाब आना
- लैंगिक रूप से परेशानियों का होना

ऐसा माना जाता है कि इसमें बॅरिएट्रिक सर्जरी एक सफल और आशा जनक उपचार के रुप में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है. सर्जरी जोड़ों के दर्द, डायबिटीज, नींद का ना आना, रक्तप्रवाह जैसी बीमारियों से भी छुटकारा दिलाती है.

- इनपुट IANS

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