पिंक बॉल से कुलदीप दिखा चुके हैं कमाल, 3 मैच में झटके थे 17 विकेट, डे-नाइट टेस्ट में मिलेगा मौका?

भारत अपना पहला बहुप्रतीक्षित दिन-रात्रि टेस्ट बांग्लादेश के खिलाफ ईडन गार्डन्स में शुक्रवार से खेलेगा और इसे लेकर काफी उत्सुकता है कि गुलाबी गेंद कैसा बर्ताव करेगी.

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कुलदीप यादव (फाइल) कुलदीप यादव (फाइल)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 11:03 AM IST

  • गुलाबी गेंद कैसा बर्ताव करेगी..?
  • कुलदीप कर सकते हैं कमाल

भारत अपना पहला बहुप्रतीक्षित दिन-रात्रि टेस्ट बांग्लादेश के खिलाफ ईडन गार्डन्स में शुक्रवार से खेलेगा और इसे लेकर काफी उत्सुकता है कि गुलाबी गेंद कैसा बर्ताव करेगी. सीनियर ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह पहले ही अपनी राय रख चुके हैं कि ईडन गार्डन्स में दूधिया रोशनी में गुलाबी गेंद से अंगुली के स्पिनरों की तुलना में कलाई के स्पिनरों की गेंद को समझना अधिक मुश्किल होगा.

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भारत के पास कुलदीप यादव के रूप में कलाई का स्पिनर है. अब देखना है कि उन्हें डे-नाइट टेस्ट के अंतिम-11 में चुना जाता है या नहीं. हरभजन सिंह ने याद दिलाया कि 2016 में दिलीप ट्रॉफी में गुलाबी गेंद से कुलदीप कितने खतरनाक गेंदबाज बन गए थे. उन्होंने कहा, 'अगर आपको दिलीप ट्रॉफी याद है तो कोई भी कलाई से कुलदीप की गेंद को प्रभावी तरीके से नहीं समझ पा रहा था. उस साल टूर्नामेंट में लेग स्पिनरों को काफी विकेट मिले थे.'

गौरतलब है कि कुलदीप यादव गुलाबी गेंद से खेले गए 2016 के दिलीप ट्रॉफी टूर्नामेंट में तीन मैच खेले थे. इस दौरान उन्होंने सबसे ज्यादा 17 विकेट हासिल किए थे. इंडिया रेड की ओर से खेलते हुए पारी में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 6/88 था, जबकि मैच में उन्होंने 120 रन देकर सर्वाधिक 9 विकेट चटाकाए थे.

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हरभजन ने बताया कि आखिर कलाई के स्पिनर क्यों अधिक प्रभावी होंगे. उन्होंने कहा, जह अंगुली का स्पिनर गेंदबाजी करता है तो गेंद सीम के साथ रिलीज की जाती है, जिससे की टर्न और उछाल मिले. जब आप गुगली करते हैं तो सीम को समझना मुश्किल हो जाता है.'

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हरभजन ने हालांकि कहा कि मुथैया मुरलीधरन जैसे स्पिनर गुलाबी गेंद से काफी प्रभावी हो सकते हैं. भारत के अच्छे स्पिनरों में से एक हरभजन ने कहा, ‘लेकिन मुथैया मुरलीधरन जैसे अपवाद हो सकते हैं, जो अंगुली का स्पिनर होने के बावजूद खतरनाक हो सकते हैं.’ गुलाबी एसजी गेंद हालांकि स्पिनरों के लिए चुनौती हो सकती है, क्योंकि दूधिया रोशनी में इसका रंग बरकरार रखने के लिए रंग की अतिरिक्त परत लगाई गई है.

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