पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक (PMC) के पूर्व प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को दिए बयान में कई अहम खुलासे किए हैं.
थॉमस के बयान की 8 अहम बातें ये हैं-
1. किसी मानदंड का पालन नहीं
HDIL का कर्ज मंजूर करते वक्त कर्ज मंजूरी के किसी भी मानदंड का पालन नहीं किया गया. HDIL और उसकी ग्रुप कंपनियों का पिछला रिकॉर्ड बैंक से लिए गए कर्ज के भुगतान का था. इसलिए यही प्रभाव था कि इन कर्ज को भी बैंक को वापस कर दिया जाएगा.
2. HDIL ने कैसे लिया बैंक को भरोसे में
HDIL के प्रमोटर राकेश वधावन ने पीएमसी बैंक के साथ डीलिंग अपने निजी खाते और कंपनी के खाते खुलवाने के साथ की. कुछ ही वर्ष में ग्रुप की कई और कंपनियों के खाते भी बैंक में खुले. ग्रुप कंपनियों की ओर से विकास की कई गतिविधियां चलाई जा रही थीं. HDIL ने अपने IPO के लॉन्च को बाद पीएमसी बैंक से 500 करोड़ रुपए का कर्ज लिया. ये बैंक की कुल आमदनी का 60% था. बैंक को 24% ब्याज की दर पर कर्ज दिया गया जो बहुत ज्यादा थी और ये उस वक्त बैंक की आमदनी का मुख्य हिस्सा था.
3. फिक्स्ड डिपॉजिट के जरिए लिया झांसे में
HDIL ने अपने IPO के लॉन्च के 6 महीने बाद बैंक में अपनी कंपनियों के खाते में 400 से 500 करोड़ रुपए फिक्स्ड डिपॉजिट के तौर पर जमा किए. इन्हीं एफडी के आधार पर ग्रुप को ओवरड्राफ्ट की अनुमति दी जाती रही.
4. ओवरड्राफ्ट बढ़ने पर प्रोजेक्ट्स का दिया हवाला
ओवरड्राफ्ट बढ़ता जाने पर जब बैंक की ओर से कहा गया तो HDIL की ओर से आश्वासन दिया गया कि उसके कई प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं और इनके पूरा होते ही बैंक का सारा भुगतान कर दिया जाएगा.
5. भारी ओवरड्राफ्ट के बाद भी 400 करोड़ का कर्ज
HDIL ने 2012 में पीएमसी बैंक से नाहुर और मुलुंड में अपने प्रोजेक्ट्स के लिए वित्त पोषण की मांग की. HDIL की ओर से कहा गया कि इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने पर सारा बकाया चुकाने के बाद भी HDIL को 11,000 करोड़ का मुनाफा होगा. पीएमसी बैंक ने दो प्रोजेक्ट के लिए 400 करोड़ रुपए देना स्वीकृत किया. लेकिन जब प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वालों की किश्तें आनी शुरू हुईं तो उसका इस्तेमाल HDIL ने अन्य बैंकों से लिए कर्ज का भुगतान करने में किया. इसके बाद PMC बैंक ने HDIL को फाइनेंस करना बंद कर दिया.
6. बैंक की ओर से की गई बड़ी सिक्योरिटी मांग
पीएमसी बैंक ने कर्ज और ओवरड्राफ्ट की भरपाई के लिए बड़ी सिक्योरिटी की मांग करना शुरू किया. पहले भी सिक्योरिटी ली जाती थी लेकिन वो कर्ज या ओवरड्राफ्ट की तुलना में बहुत कम होती थी. HDIL की ओर से ऐसी स्थिति में भी और कर्ज देने की मांग की जाती रही. बैंक अधिकारियों की तरफ से ये तय किया गया कि बड़ी सिक्योरिटी के बदले छोटे कर्ज दिए जाएं जिससे कि पुराने कर्जों की खामियों को भी दूर किया जा सके.
7. साख खोने के डर से RBI को नहीं बताया
थॉमस के मुताबिक बैंक की साख जाने का खतरा हो गया था क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बैंक पर पाबंदियां लगाने का अंदेशा था. ऐसी स्थिति में बैंक के डूबने के डर से तथ्यों से RBI को अवगत नहीं कराया गया.
8. पूर्व चेयरमैन को HDIL के कर्ज पर बताया गया था
थॉमस ने अपने बयान में सह अभियुक्त और बैंक के पूर्व चेयरमैन वरायम सिंह के बारे में कहा कि वो 2015 में चेयरमैन बने और उन्हें HDIL को दिए गए कर्जों के बारे में बताया गया. वरायम सिंह 2015 तक HDIL कंपनियों के डायरेक्टर थे लेकिन बैंक का चेयरमैन बनने पर सिंह ने वहां से इस्तीफा दे दिया.
वरायम सिंह ने किया थॉमस के दावे का खंडन
हालांकि वरायम सिंह ने ED को दिए अपने बयान में कहा कि उनकी जानकारी में HDIL और उसके ग्रुप की कंपनियों को 200 करोड़ रुपए का कर्ज दिए जाना ही था. सिंह ने थॉमस के बयान को खारिज करते हुए कहा कि HDIL को 2500 करोड़ रुपए के कर्ज देने की बात उनसे छुपाए रखी गई और कभी उसकी जानकारी नहीं दी गई. वरायम सिंह के मुताबिक उनके सामने ग्रुप की सिर्फ एक कंपनी प्रीविलेज हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा मुद्दा लाया गया था.
दिव्येश सिंह