नेपाल: राष्ट्रपति के बाद PM ओली से मिले प्रचंड, क्या टलेगा पार्टी विभाजन?

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद प्रचंड और प्रधानमंत्री के बीच रविवार को ही निर्णायक बातचीत हुई. पहले इस मुलाकात के लिए सुबह 9 बजे का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन बाद में इसका समय दोपहर 12 बजे तय किया गया.

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नेपाल में राजनीतिक संकट बरकरार (फाइल फोटो) नेपाल में राजनीतिक संकट बरकरार (फाइल फोटो)

सुजीत झा

  • पटना,
  • 05 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 2:40 PM IST

  • राष्ट्रपति बिद्या भंडारी से मिलने राष्ट्रपति भवन पहुंचे
  • राष्ट्रपति के सामने अपना पक्ष रखेंगे प्रचंड

ओली कैबिनेट में दल विभाजन अध्यादेश लाने की तैयारियों के बीच पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड सहित ओली विरोधी सभी प्रमुख नेता रविवार को राष्ट्रपति बिद्या भंडारी से मिलने राष्ट्रपति भवन पहुंचे. शनिवार को प्रधानमंत्री ओली ने अपने मंत्रियों की बैठक में कहा था कि उनके साथ-साथ, राष्ट्रपति के खिलाफ भी महाभियोग लाने की तैयारी चल रही है. हालांकि प्रचंड खेमे ने कल ही इस आरोप का खंडन कर दिया था. संभावना जताई जा रही है कि आज की इस मुलाकात में प्रचंड ने राष्ट्रपति के सामने अपना पक्ष रखा और उनसे पार्टी के आंतरिक विवादों से दूर रहने का आग्रह किया.

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राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद प्रचंड और प्रधानमंत्री के बीच रविवार को ही निर्णायक बातचीत हुई. पहले इस मुलाकात के लिए सुबह 9 बजे का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन बाद में इसका समय दोपहर 12 बजे तय किया गया. प्रचंड, राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद करीब 12 बजे प्रधानमंत्री निवास पहुंचे.

बता दें, नेपाल में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है. शनिवार को होने वाली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति की बैठक टाल दी गई थी. शनिवार को ही नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से मिलने वाले थे लेकिन वो नहीं पहुंचे. वहीं प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया. जिसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी विभाजन की ओर बढ़ रही है.

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दल विभाजन अध्यादेश लाने की तैयारी शुरू

ओली कैबिनेट में दल विभाजन अध्यादेश लाने की तैयारी शुरू हो गई है. नेपाल के मौजूदा कानून के मुताबिक दल विभाजन के लिए 40 प्रतिशत संसद सदस्य और 40 प्रतिशत पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्य के समर्थन की आवश्यकता होती है. लेकिन नए अध्यादेश के मुताबिक संसद सदस्य और पार्टी की केंद्रीय समिति, दोनों में किसी एक के समर्थन के दल विभाजन को मान्यता मिल जाएगी.

प्रधानमंत्री ओली ने गुरुवार सुबह, कैबिनेट की बैठक कर इस निर्णय पर मुहर लगवा ली है. इससे पहले ओली ने गुपचुप तरीके से एक नई पार्टी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) बना ली थी. अपनी कुर्सी को बचाने के लिए ओली के लिए यह एक मात्र रास्ता है. नया विभाजन अध्यादेश लागू होने पर ओली अपने पद पर रहते हुए इसका फायदा उठा सकते हैं और अगर दल विभाजन के बाद संसद में रहे दलों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाती है और किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिल पाता है तो ऐसे में वे संसद को भंग कर मध्यावधि चुनाव करा सकते हैं.

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तीन साल पहले केपीएस ओली और पुष्प कमल दहल प्रचंड ने कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी और कम्युनिस्ट पार्टी यूएमएल का विलय कर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी बनाई थी. अब फिर दोनों पार्टियां विभाजन के कगार पर हैं. नेपाल की सरपरस्ती करने वाला चीन चाहता है कि भले ही ओली की कुर्सी चली जाए, लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी में विभाजन न हो. लेकिन सत्ता के इस खेल में ओली ने फिलहाल एक नया दांव चल कर अपनी कुर्सी पर आए संकट को कुछ दिनों के लिए टालने की जरूर कोशिश की है.

6 जुलाई तक टली स्थायी समिति की बैठक

प्रचंड और ओली के बीच शुक्रवार को तीन घंटे बैठक चली, इसके बाद भी दोनों के बीच समझौते का रास्ता तैयार नहीं हो सका. शनिवार सुबह 9 बजे से प्रधानमंत्री और प्रचंड के बीच बैठक प्रस्तावित थी. इसके बाद 11 बजे पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक होनी थी लेकिन अब यह बैठक सोमवार 6 जुलाई को होगी.

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एक व्यक्ति एक पद प्रणाली की मांग

बता दें, मौजूदा प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड दोनों ही नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं. पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड का गुट चाहता है कि केपी शर्मा कार्यकारी अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दें और पार्टी को अपने तरीके से चलाने दें. लेकिन केपी शर्मा ओली कार्यकारी अध्यक्ष के पद से इस्तीफा नहीं देना चाहते हैं. प्रचंड कई बार यह कह चुके हैं कि सरकार और पार्टी के बीच समन्वय का अभाव है. साथ ही, वह एनसीपी द्वारा ‘एक व्यक्ति एक पद’ प्रणाली का पालन किये जाने पर जोर दे रहे हैं.

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