गुरुवार को ट्वीट कर मायावती ने लिखा, ‘जिस प्रकार से लॉकडाउन से पीड़ित व घर वापसी को लेकर मजबूर प्रवासी श्रमिकों की बदहाली व रास्ते में उनकी मौत आदि के कड़वे सच मीडिया के माध्यम से देश-दुनिया के सामने हैं वह पुनःस्थापित करते हैं कि केन्द्र व राज्य सरकारों को इनकी बिल्कुल भी चिन्ता नहीं है, यह अति-दुःखद है’
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इसके अलावा मायावती ने अदालत के द्वारा सरकार से जवाब मांगने की तारीफ की. मायावती ने लिखा, देश में लॉकडाउन के 65वें दिन यह थोड़ी राहत की खबर है कि माननीय न्यायलयों ने कोरोना वायरस की जांच/इलाज में सरकारी अस्पतालों की बदहाली, निजी अस्पतालों की उपेक्षा व प्रवासी मजदूरों की बढ़ती दुर्दशा व मौतों के सम्बंध में केन्द्र व राज्य सरकारों से सवाल-जवाब शुरू कर दिया है’.
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बता दें कि प्रवासी मजदूरों को लेकर लगातार दिल दुखाने वाली खबरें आ रही हैं. हजारों की संख्या में मजदूर अब भी सड़कों पर हैं, तो वहीं दर्जनों प्रवासी ट्रेनें अपने रास्ते से भटक गई हैं. बीते दिनों ऐसी ट्रेनों की खबर आई जो एक दिन का रास्ता 4-5 दिनों में तय कर रही है.
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इसके अलावा श्रमिक ट्रेनों में खाना, पानी ना मिलने के कारण मजदूरों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से दावा किया गया है कि अबतक चालीस लाख से अधिक प्रवासी मजदूर अपने घरों को लौट चुके हैं और लगातार ट्रेनें चलना जारी है.
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