MP: गोटेगांव सीट पर बदलते रहे हैं MLA, इस बार मतदाता क्या करेंगे फैसला?

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और इसकी वजह से राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश भर में जनआशीर्वाद यात्रा कर रहे हैं तो वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी सत्ता विरोधी लहर पर सवार होने के लिए पूरा दमखम लगा रही है.

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वरुण शैलेश

  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 12:08 AM IST

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी दलों की सक्रियता बढ़ गई है. मुख्यमंत्री शिवराज चौहान जनआशीर्वाद यात्रा कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस की तरफ से दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया जन संपर्क अभियान में जुटे हुए हैं. लेकिन इन सबके बावजूद केंद्रीय नेता भी बीच-बीच में राज्य का दौरा कर चुनावी पारा को ऊपर चढ़ा रहे हैं.

आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे सभी राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से लोगों को लुभाने में लगे हैं. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी जन आशीर्वाद यात्रा के तहत नरसिंहपुर जिले का दौरा कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने जिले की चारों विधानसभा क्षेत्र तेंदुखेड़ा, गाडरवारा, नरसिंहपुर और गोटेगांव में आम सभा को संबोधित किया.

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सिवनी जिले का समीकरण

सिवनी जिले में चार विधानसभा सीट बरघाट, सिवनी, केवलारी और लखनादौन हैं. इनमें दो विधानसभा सीट बरघाट, सिवनी, बालाघाट लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं. जबकि केवलारी और लखदौन मंडला लोकसभा क्षेत्र के तहत आती हैं.  बरघाट विधानसभा सीट से भाजपा के कमल मर्सकोल, सिवनी से निर्दलीय विधायक दिनेश राय, केवलारी से कांग्रेस के रजनीश हरबंश सिंह और लखदौन से कांग्रेस के योगेंद्र सिंह बाबा विधायक हैं. बरघाट और लखदौन विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है.

नरसिंहपुर जिले में गोटेगांव विधानसभा आती है. अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित गोटेगांव विधानसभा क्षेत्र में 1 लाख 86 हजार 702 कुल मतदाता हैं. इनमें पुरुष मतदाता 98 हजार 410 जबकि  महिला मतदाताओं की संख्या  88 हजार 292 है.

गोटेगांव क्षेत्र की सियासत

इतिहास का जायजा बताता है कि गोटेगांव विधानसभा का मतदाता किसी भी पार्टी पर ज्यादा देर तक विश्वास नहीं करता है. यही वजह है कि हर चुनाव में यहां के मतदाता अपने जनप्रतिनिधि को बदल देते हैं. मगर यह भी दिलचस्प है कि गोटेगांव विधानसभा आदिवासी बाहुल्य होने के बावजूद यहां की जनता सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के ही प्रत्याशी को अपना जनप्रतिनिधि चुनती आई है.

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अभी भाजपा की ओर से अन्य कोई बड़ा अनुसूचित जाति का नेता नहीं दिखता. यही वजह कि वर्तमान विधायक कैलाश जाटव को टिकट मिलना तय माना जा रहा है. हालांकि कांग्रेस के पास भी पूर्व विधायक एनपी प्रजापति के अलावा कोई दूसरा विकल्प नजर नही आता.

विधानसभा चुनाव-2013

भाजपा-कैलाश जाटव- 74759 (51.81%)

कांग्रेस-नर्मदा प्रसाद प्रजापति- 54588 (37.83%)

विधानसभा चुनाव-2008

कांग्रेस- 53664 (44.94%)

भाजपा- 31344 (26.25%)

विधानसभा की तस्वीर

मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 सीटों के लिए इसी साल नवंबर-दिसंबर में चुनाव होने हैं. 230 में से 35 अनुसूचित जाति जबकि 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. 148 गैर-आरक्षित सीटें हैं. 2013 में हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी 165 सीटों पर जीत हासिल कर सरकार बनाई थी जबकि कांग्रेस को 58 सीटों से संतोष करना पड़ा था. वहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 4 जबकि 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी.

निर्वाचन आयोग के मुताबिक 2013 में मध्य प्रदेश में कुल 4,66,36,788 मतदाता थे जिनमें महिला मतदाताओं की संख्या 22064402 और पुरुष मतदाताओं की संख्या 24571298 और अन्य वोटर्स 1088 थे. 2013 में 72.07 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था.

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