जानिए, कोरोना वायरस से मेरठ में क्यों फल फूल रहा है कैंची व्यापार?

मेरठ का मशहूर कैंची मार्केट जो बंद होने के कगार पर था एक बार फिर से फल-फूल रहा है. क्योंकि चीन में कोरोना वायरस फैलने के बाद से भारत ने उसके साथ सभी तरह के व्यापार प्रतिबंधित कर रखे हैं. जो सामान भारत आए भी हैं उन्हें पोर्ट पर रोक कर रखा गया है.

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कोरोना वायरस: मेरठ में फल फूल रहा है कैंची उद्योग कोरोना वायरस: मेरठ में फल फूल रहा है कैंची उद्योग

उस्मान चौधरी

  • मेरठ,
  • 08 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 12:34 AM IST

  • कोरोना वायरस से मेरठ में फल-फूल रहा है कैंची व्यापार
  • चीन में कोरोना ने अर्थव्यस्था को पूरी तरह कर दिया चौपट

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव से पूरे विश्व में डर का माहौल है. एशिया का सबसे मजबूत देश चीन लगभग ढाई महीने से इस खतरनाक बीमारी से जूझ रहा है. हालात इतने खतरनाक हो चुके हैं कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मेडिकल इमरजेंसी घोषित कर दी है. वहां की अर्थव्यस्था चौपट हो रही है. अमेरिका, ईरान, इटली समेत भारत जैसे देश दहशत में हैं. वहीं उत्तरप्रदेश के एक इलाके में खुशी का माहौल है. सवाल उठता है कि कोरोना वायरस से खुशी का माहौल क्यों होगा?

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दरअसल मेरठ का मशहूर कैंची मार्केट जो बंद होने के कगार पर था एक बार फिर से फल-फूल रहा है. क्योंकि चीन में कोरोना वायरस फैलने के बाद से भारत ने उसके साथ सभी तरह के व्यापार प्रतिबंधित कर रखे हैं. जो सामान भारत आए भी हैं उन्हें पोर्ट पर रोक कर रखा गया है. जिससे कि भारत में कोरोना वायरस के प्रसार को रोका जा सके. ऐसे में मेरठ के कैंची बाजार में एक बार फिर से रौनक आ गई है. व्यापारियों के मुताबिक हाल के दिनों में कैंची उत्पादन 50 प्रतिशत पर पहुंच गया है जो पिछले काफी समय से महज 10 प्रतिशत पर आकर सिमट गया था.

चीनी माल की वजह से टूट गई थी कैंची उद्योग की कमर

मेरठ में कैंची उद्योग महासचिव सईद शेख बताते हैं कि चीन का माल भारत में आने से कैंची उद्योग की कमर टूट गई थी. लेकिन हाल के दिनों में कोरोना वायरस की वजह से चीन का सामान नहीं आ रहा है. इसलिए एक बार फिर से हमारे उद्योग में बढ़ोतरी हुई है. भारत अगर बाहर के देशों से माल खरीदना कम कर दे तो भारत के सारे कारोबार फलने-फूलने लगेंगे. पूरी दुनिया में यहां की कैंची मशहूर है. पहले लाख-दो लाख कैंचियों का उत्पादन होता था लेकिन अब यह संख्या करोड़ों में हो गई है.

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शरीफ अहमद नाम के एक अन्य कारोबारी कहते हैं. हमारा कारोबार का 350 साल पुराना इतिहास है. हम लोगों की सात पुश्तें इसी काम में लगी हुई हैं. "दादा ले, पोता बरपे" कैंची नाम से हमारी कैंची पूरे विश्व में जाती है लेकिन पिछले दो सालों में चीन से माल आने की वजह से बिक्री में कमी आ गई थी. चीन ने हमारी 60-70 प्रतिशत मार्केट को कैप्चर कर लिया था. जिसके बाद हम लोग बेरोजगारी के कगार पर आ गए थे. हमारे उद्योग बंद होने लगे थे. छिट-पुट लोग ही इस व्यवसाय से जुड़े रह गए थे. लेकिन चीन में जब से कोरोना वायरस का केस आया है वहां से सामान आने पर रोक लगा दी गई है. इस वजह से मेरठ की कैंची की डिमांड एक बार फिर से बढ़ी है.

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शरीफ अहमद ने आगे बताया कि हाल के दिनों में इस उद्योग को लेकर एक बार फिर से हमारी उम्मीदें बढ़ी हैं. पूरे देश से हमें ऑर्डर मिल रहा है. हम ज्यादा से ज्यादा काम कर उनकी मांग पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं दूसरे देश की बात करें तो एशिया में श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल समेत कई देश यहां से माल मंगवाते हैं. पिछले काफी समय से वहां से भी मांग कम हो गई थी. क्योंकि चीन, दुनिया के ज्यादातर देशों में अपना माल बेच रहा था. लेकिन हाल के दिनों में एक बार फिर से मांग बढ़ी है.

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