'मुझे कोई मुकाबला नहीं दिखता'

करम और सरहुल त्यौहारों के अवसर पर एक लाख करम के पेड़ लगाए गए हैं, जो आदिवासी संस्कृति और अनुष्ठानों के प्रतीक हैं. सरकार ने आदिम आदिवासियों (पहडिय़ा) की स्थानीय सशस्त्र बटालियन का गठन किया है.

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मुख्यमंत्री रघुबर दास मुख्यमंत्री रघुबर दास

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 5:46 PM IST

झारखंड की 14 लोकसभा सीटों में से 12 पर भाजपा-नीत राजग की जीत के सूत्रधार रहे मुख्यमंत्री रघुबर दास का मानना है कि उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों का रुख तय कर दिया है उनके इस आशावाद का कारण उनकी राज्यव्यापी जोहार जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान मिली 'अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रियाएं' भी हैं. अमिताभ श्रीवास्तव से बातचीत में रघुबर दास ने अपनी प्राथमिकताओं और योजनाओं के बारे में बात की.

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आप झारखंड के पहले मुख्यमंत्री हैं जिसने अपना कार्यकाल पूरा किया है. झारखंड अब आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए तैयार है, तो आप अपने प्रदर्शन को कैसे आंकते हैं?

मैं अपने प्रदर्शन का आकलन नहीं करता. यह केवल झारखंड के लोगों का अधिकार क्षेत्र है. लोकसभा चुनावों में उन्होंने झारखंड की 14 सीटों में से 12 सीटें देकर अपना फैसला पहले ही दे दिया है. विधानसभा चुनाव के लिए हम फिर से लोगों की अदालत में हैं, हमारे पास दिखाने के लिए हमारा काम है और मेरी पार्टी की भारी साख है. लोगों ने भी झारखंड सरकार पर अत्यंत विश्वास दिखाया है. उन्होंने हमारे काम को पहचाना है और एक ईमानदार सरकार के रूप में हमें स्वीकार किया है. मैंने पूरे राज्य का दौरा किया है और हमारी सरकार के प्रति लोगों के भरोसे ने मेरे दिल को छू लिया है. मैं नतमस्तक हूं. लोगों का विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है.

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ऐसा लगता है कि न केवल लोग बल्कि विपक्षी खेमे के राजनेता भी आपसे मंत्रमुग्ध हैं. पूर्व राजद अध्यक्ष (अन्नपूर्णा देवी) अब भाजपा सांसद हैं. जो झारखंड विकास मोर्चा के टिकट पर चुने गए वे भाजपा में शामिल हो गए. यह कैसा चमत्कार है?

नहीं, कोई चमत्कार नहीं है. विपक्षी खेमे के कुछ प्रतिबद्ध राजनेता अपने-अपने दलों में भाई-भतीजावाद, पक्षपात और अपने नेताओं के भ्रष्ट आचरण के कारण नाराज थे. भाजपा में उम्मीद की किरण देखने के बाद उन्होंने उन स्थितियों में और न फंसे रहने का फैसला किया. हमारे साथ आने वालों में से अधिकतर लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व से प्रेरित थे.

आपकी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?

जी, पिछले पांच वर्षों में हमने झारखंड के लोगों के लिए हर चीज को बेहतर बनाने के ईमानदार प्रयास किए हैं. ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां हमने काम किया है और परिणाम मिले हैं, लेकिन ईमानदारी से कहें तो झारखंड को अपनी क्षमता का एहसास कराने के लिए हमें अभी बहुत आगे तक जाना है.

संयुक्त राष्ट्र ने भी माना है कि गरीबों की संख्या में कमी लाने में झारखंड ने सबसे तेज छलांग लगाई है. वास्तव में, बहुआयामी गरीबी को कम करने की दिशा में झारखंड ने 10 देशों में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है. हमने रोजगार सृजन किया है, अतिवाद समाप्त किया है तथा वर्तमान व स्थिर, दोनों ही, कीमतों पर झारखंड की प्रति व्यक्ति आय को पूरे भारत की तुलना में तेज गति से बढ़ाया है.

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जब आपने दिसंबर 2014 में झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला था तो विपक्ष ने आपके गैर-आदिवासी होने को लेकर काफी हाय-तौबा मचाई थी. वे अभी भी आपके गैर-आदिवासी मूल को उजागर करते हुए उम्मीद करते हैं कि इससे आदिवासी भाजपा के खिलाफ वोट देंगे.

महत्वपूर्ण यह नहीं है कि मैं कौन हूं, बल्कि यह है कि हमारी सरकार ने क्या किया है. विपक्षी दल नाउम्मीद और चिंतित हैं. उन्हें पता है कि वे विधानसभा का चुनाव नहीं जीत सकते, इसलिए वे थोड़े से सांत्वना पुरस्कारों की तलाश में हैं और संकीर्ण राजनीति के सहारे कुछ सीटें जीत कर इज्जत बचाने के प्रयास में हैं. यह बात महत्वहीन है कि मैं क्या हूं, महत्व उस बात का है जो हमारी सरकार ने झारखंड के स्थानीय लोगों के लिए किया है.

राज्य के आधे से अधिक बजटीय आवंटन आदिवासी विकास की विभिन्न योजनाओं के लिए किए गए हैं. हमने ट्राइबल सबप्लान को लगभग दोगुना करते हुए 20,764 करोड़ रुपए कर दिया है. 2014 में केवल 647 सरना साइटों की परिधि दीवारों से सुरक्षित थीं. हमारी सरकार ने 1,550 से अधिक ऐसी परियोजनाओं को मंजूरी दी. 2014 में अनुसूचित जनजातियों के लिए केवल 18,943 वन पट्टे थे. हमने आदिवासी आबादी को ऐसे 61,970 पट्टे जारी किए हैं. झारखंड की संस्कृति की रक्षा, संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए हमारी सरकार ने पारंपरिक आदिवासी ग्राम प्रधानों को मानदेय देना शुरू किया है. मानकी को 3,000 रुपए, जबकि मुंडा और प्रधान को हर महीने 2,000 रुपए मानदेय के रूप में दिए जा रहे हैं.

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करम और सरहुल त्यौहारों के अवसर पर एक लाख करम के पेड़ लगाए गए हैं, जो आदिवासी संस्कृति और अनुष्ठानों के प्रतीक हैं. सरकार ने आदिम आदिवासियों (पहडिय़ा) की स्थानीय सशस्त्र बटालियन का गठन किया है. अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और अनुसूचित क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किए गए हैं. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े समुदायों के छात्रों को शिक्षा ऋण प्रदान करने के लिए पहली बार 50 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया गया है. बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हो और अन्य महान शहीदों के मूल स्थानों के विकास के लिए 30 करोड़ रुपए अलग से उपलब्ध कराए गए हैं. टाना भगत विकास प्राधिकरण स्थापित करने के लिए 10 करोड़ रुपए का कोष उपलब्ध कराया गया है. हमारे शासन के केंद्र में आदिवासी कल्याण है.

झारखंड में भाजपा औरों से आगे हो सकती है, लेकिन आपका प्रतिद्वंद्वी कौन है? झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस या झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो)?

मुझे कोई मुकाबला ही नहीं दिखता. झारखंड की जनता ने इस ईमानदार सरकार को वापस लाने का मन बना लिया है. हमारे लिए, यह झारखंड को शीर्ष पर ले जाने की लड़ाई है. विपक्ष के लिए, यह चेहरा बचाने की लड़ाई होगी.

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