देश के विचारों के सबसे बड़े मंच इंडिया टुडे कॉन्क्लेव का आयोजन इस बार 13 और 14 मार्च 2020 को होने वाला था. जिसे स्थगित कर दिया गया है. पिछले कुछ दिनों में भारत में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ा है. इसे देखते हुए भारत सरकार ने यात्रा को लेकर कई एजवाइजरी जारी की है. इसमें कहा गया है कि जबतक बहुत जरूरी न हो तबतक यात्रा को टाल दें. ऐसे में कई देसी और विदेशी मेहमान इस कॉन्क्लेव में शामिल नहीं हो सकेंगे. इसे देखते हुए कॉन्क्लेव को स्थगित कर दिया गया है.
बता दें कि इसमें अलग-अलग क्षेत्रों की कई दिग्गज हस्तियों को शामिल होना था. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में इस बार निर्मला सीतारमण, अरविंद केजरीवाल, योगी आदित्यनाथ, कमलनाथ और शशि थरूर जैसे राष्ट्रीय राजनेताओं को एक मंच पर लेकर आ रहा था. वहीं स्पीकर पैनल में केवी. सुब्रमण्यम, जनरल बिपिन रावत, हेमंत बिस्वा सरमा और पी. चिदंबरम जैसी हस्तियां शामिल होने वाली थीं.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2020 में हर क्षेत्र को शामिल किया जाना था. शीर्ष राजनेताओं, विचारकों, अर्थशास्त्रियों, विश्लेषकों, खेल सितारों और कलाकारों की एक विस्तृत श्रृंखला होनी थी, जिसमें हस्तियों को कॉन्क्लेव की थीम #MercuryRising में अपने-अपने क्षेत्र से जुड़े विचार रखना था और बहस करना था. शांति और चुनौतियों से निपटने के लिए अपने स्पष्ट विचार रखने के लिए उन्हें एक साथ एक मंच पर आना था.निर्मला सीतारमण को होना था शामिल
प्रतिष्ठित पैनल में भारत के कई शीर्ष राजनेता और नीति निर्माता को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में शामिल होना था. केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण को 'द गेम प्लान फॉर इंडिया ऑन द रोड टू 5 ट्रिलियन' पर चर्चा करना था तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 'द कैपिटल वोटर्स सेट ए न्यूज एजेंडा' विषय पर विचार रखना था.
कांग्रेस सांसद और प्रख्यात वक्ता शशि थरूर अपनी मुखरता के लिए जाने जाते रहे हैं. 'अमेरिकन वेरटिगोः द ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन. एंड द इम्पैक्ट ऑन द वर्ल्ड' पर उन्हें अपनी बात रखना था. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ 'असेस द स्टेट ऑफ द नेशन' तो असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा और टीएमसी के सांसद काकोली घोष इस इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2020 में ' द फियर्स सिटिजनशिप डिबेट' में अपनी बात रखते.
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई को 'डेमोक्रैसी गैवल: इंडियन ज्यूडिशियरी. द होप एंड द कन्सर्न' पर भाषण देना था. उधर, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के अध्यक्ष समीर सरन को 'व्हाट विल अटैरेक्ट एफडीआई बैक ऑफ इंडिया' सेशन में भाग लेना था. देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत को 'फ्लैग ऑफ ऑनरः इंटेग्रेटिंग द इंडियन आर्मी फॉर 21st सेंचुरी कनफ्लिक्ट. एंड न्यू एज बैटल फील्ड्स' विषय कॉन्क्लेव में संबोधन करना था.
कॉन्क्लेव में आर्थिक मुद्दों पर भी चर्चा होनी थी. मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम और पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम भी अर्थव्यवस्था के हालात पर चर्चा करने वाले थे.
इन मुद्दों पर होना था चर्चा
व्यापार युद्धों, ड्रोन हमलों, जंगल में लगती आग, जलवायु परिवर्तन, युद्ध के खतरों, गिरती अर्थव्यवस्थाओं, विभाजनकारी चुनावों और बढ़ती असमानता के साथ और सोच के पुराने तरीकों में से कोई भी अच्छा नहीं है. अतीत अब भविष्य का मार्गदर्शक नहीं रहा. भारत और दुनिया दोनों को नई सोच के लिए साहसिक और जुझारू विचारों की आवश्यकता है.
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