अब दवाओं के ब्रांडेड कंपनियों के बजाय जेनेरिक दवाओं को महत्व दिया जाएगा. इसके लिए इस साल के अंत तक प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र 3000 खोले जाएंगे. अभी एक लाख करोड़ का दवा व्यापार होता है जिसमें लगभग 75 हजार करोड़ का हिस्सा ब्रांडेड कंपनियों के उन दवाओं का है जिसके कम कीमत वाले जेनेरिक दवा मौजूद हैं.
जन औषधि केंद्र के द्वारा जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. अभी जेनेरिक दवाओं का व्यापार महज आठ हजार करोड़ रुपये का है. जेनेरिक दवाओं की कीमत अमूमन ब्रांडेड दवाओं की तुलना में एक तिहाई होती हैं.
केंद्र सरकार ये आग्रह करने जा रही है कि सभी डॉक्टर अपने प्रिसक्रिप्शन में सिर्फ जेनेरिक दवाओं को ही लिखे. अभी एमसीआई और आईएमए इस संबंध में सरकार के कहने पर सर्कुलर जारी कर चुका है लेकिन उसमें कहा गया था कि 'जहां तक संभव हो'. अब इसको 'अनिवार्य' करने के लिए सरकार से कहा जाएगा.
केमिस्ट को ये अधिकार दिया जाएगा कि अगर कोई ब्रांडेड दवा वाले प्रिसक्रिप्शन लेकर आए तब भी वह उसके जगह पर जेनेरिक दवा को दे सकेगा. एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा जिसमें ब्रांडेड कंपनी की दवा का नाम लिखते ही उसके जेनेरिक विकल्प का नाम और कीमत आ जाए. प्राइवेट नर्सिंग होम के लाइसेंस को जेनेरिक दवा केंद्र की अनिवार्य शर्त से जोड़ा जाएगा.
प्रियंका झा / रीमा पाराशर