हमेशा से बॉलीवुड को हॉलीवुड की नकल के लिए आलोचना का शिकार होना पड़ता रहा है. फिर चाहे इसका नाम बॉलीवुड रखने को लेकर हो या फिर सीक्वेल से लेकर प्रीक्वेल और रीमेक से लेकर टेक्नोलॉजी तक. लेकिन हॉलीवुड के रुझान को बॉलीवुड ने भी गले लगाया है. लेकिन इस बार उसकी आलोचना नहीं तारीफ हो रही है. यह रुझान शादी और मातृत्व सुख हासिल करने के बाद हीरोइनों का बॉलीवुड में बने रहना है. उन्होंने परिवार और करियर में तालमेल बिठाना सीख लिया है. डायरेक्टर-प्रोड्यूसर उन्हें कास्ट कर रहे हैं, राइटर उनके लिए कहानियां लिख रहे हैं और ऑडियंस उन पर अपना प्यार उड़ेल रहे हैं.
18 जनवरी को एक बेटे की मम्मी चित्रांगदा सिंह इनकार में बोल्ड अंदाज में दिखेंगी. कुछ महीने पहले बेटी को जन्म देने वाली लारा दत्ता डेविड में स्पेशल रोल में हैं. पिछले साल लगभग डेढ़ दशक बाद वापसी करने वाली दो बेटियों की मम्मी श्रीदेवी ने इंग्लिश-विंग्लिश जैसी हिट फिल्म दी थी. कहा जा रहा है कि उनका अगला लक्ष्य साइज जीरो है. इंग्लिश विंग्लिश की डायरेक्टर बॉलीवुड के बदलते रूप और इस नए रुझान के बारे में कहती हैं, ''उम्र का रूल औरतों के लिए ही क्यों हो. किसी भी चीज को आंकने का पैमाना टैलेंट होना चाहिए न कि ऐज.”
हॉलीवुड की जूडी डेंच, 78 वर्ष, मेरिल स्ट्रीप, 63 वर्ष, शेरॉन स्टोन, 54 वर्ष, जूलिया रॉबट्रर्स, 45 वर्ष, मेग रयान, 51 वर्ष, हेलन हंट, 59 वर्ष, और भी कई हीरोइनें लंबे समय से इंटरनेशनल बॉक्स ऑफिस और ऑस्कर पुरस्कारों में अपनी धाक जमाए हुए हैं. ऐक्टिंग के दम पर उन्होंने उम्र को धता बताया है. अब ऐसा ही बॉलीवुड में भी होता दिख रहा है. एक समय यहां तीस पार या शादी के बंधन में बंधने वाली हीरोइनों को अपने करियर को अलविदा कहकर घर की चारदीवारी में बैठना पड़ता था या उनके पास दीदी और मां के रोल आते थे. बॉलीवुड ने इस मामले में खुद को बदलना शुरू कर दिया है.
चित्रांगदा सिंह ने 2011 में देसी बॉयज में सेक्सी टीचर का किरदार निभाया था तो ये साली जिंदगी में उनका अलग ढंग का रोल था. पिछले साल उन्होंने जोकर में काफीराना आइटम सांग से खूब लटके झटके दिखाए. अब ऑफिस में सेक्सुअल हरासमेंट पर बनी फिल्म इनकार में हैं. उनकी जॉन अब्राहम के साथ आइ मी और मैं भी आ रही है. उनका यकीन काम और घर को अलग रखने में है तभी तो बढ़ती उम्र के साथ उनकी फिल्मों की फेहरिस्त भी बढ़ रही है, और उनका जादू पहले जैसा ही है.
पिछले साल मार्च में दो जुड़वां बेटों की मां बनीं सेलिना जेटली ने तो डिलिवरी के कुछ माह बाद ही मई में बिकनी में शूट करवाकर इस बात का ऐलान कर दिया कि अब हीरोइनें उम्र की मार से परे हैं और वे पहले की तरह नीरस नहीं बल्कि यमी (दिलचस्प) मम्मी बन गई हैं. अगर खबरों पर यकीन करें तो वे जल्द ही नो एंट्री के सिक्वेल में दिखेंगी.
लारा दत्ता की डेविड फरवरी में रिलीज हो रही है और वे नो एंट्री के सीक्वेल में भी नजर आ सकती हैं. 2012 में बेटी सायरा को जन्म देने वाली लारा अपने प्रोडक्शन हाउस के लिए फिर से फिल्म बनाने की प्लानिंग भी कर रही हैं. उन्होंने कुछ समय पहले कहा था, ''मैं उस तरह की औरत नहीं हूं जो घर पर रहे और जो सिर्फ सायरा की मम्मी या महेश भूपति की बीवी कहलाए.”
उनके तेवर बॉलीवुड की मम्मी ब्रिगेड के तेवरों को साफ जाहिर कर देते हैं. आइपीएल की क्रिकेट टीम राजस्थान रॉयल्स की सह-मालिक और अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने टीवी के साथ शुरुआत कर दी है और इन दिनों वे डांस रियलिटी शो नच बलिए-5 में जज हैं. पिछले साल उन्होंने बेटे को जन्म दिया था. जबकि 2012 में ऐश्वर्या राय किसी फिल्म नहीं बल्कि बेटी आराध्या के कारण सुर्खियों में रहीं. अब वे विज्ञापनों में नजर आ रही हैं और कई प्रोजेक्ट्स से उनका नाम जोड़ा जा रहा है. एक बेटा और बेटी की मां करिश्मा कपूर ने छह साल बाद डेंजरस इश्क के साथ 2012 में बॉलीवुड में कमबैक की थी.
उन्होंने भी बॉलीवुड के इस रुझान की सराहना की थी, ''हम पश्चिम की तरह होते जा रहे हैं जो वाकई अच्छा है. एंजेलिना जोली, जूलिया रॉबट्र्स, केट विंस्लेट सभी मदर्स हैं, लेकिन फिल्मों और ब्रांड एंडोर्समेंट से अपना घर चला रही हैं. मेरे ख्याल से इंडस्ट्री में शादीशुदा हीरोइनों और मम्मियों के लिए यह अच्छा समय है.” फिलहाल वे कुछ स्क्रिप्ट्स पढ़ रही हैं. दो बड़े बेटों की मां माधुरी दीक्षित गुलाब गैंग और डेढ़ इश्किया से लंबे अरसे बाद बॉलीवुड का रुख कर रही हैं जबकि जुही चावला की सक्रियता तो जगजाहिर है ही.
बेस्टसेलर किताब आलमोस्ट सिंगल और हिट फिल्म कहानी की लेखिका अद्वैता काला इस बदलते रुझान के बारे में कहती हैं, ''मुझे लगता है, पहले यही सोचा जाता था कि हीरोइन की शादी होने के बाद ऑडियंस की उनमें दिलचस्पी नहीं रहती. उस समय ऑडियंस के मायने सिर्फ पुरुषों से लगाए जाते थे. समय बदल रहा है और भारत की औरत भी बदल रही है.
महिलाओं का ऑनस्क्रीन प्रोजेक्शन काफी उथला रहता था—जैसे कोई कब्जाई जाने वाली चीज हो. इस नजरिये में अब बदलाव आ रहा है और इसके मायने बढ़ती उम्र की महिला ऐक्टरों के लिए अधिक मौके हैं.” उनका कहना सही है. तभी तो विद्या बालन और करीना कपूर विवाह बंधन में बंधने के बाद भी अपने तेवर बरकरार रखे हुए हैं.
नरेंद्र सैनी