स्वतंत्रता दिवस के ठीक एक दिन पहले, 14 अगस्त को यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में एक लड़की के साथ दरिंदगी की गई. लखीमपुर के थाना ईसानगर के तहत आने वाले एक गांव में रहने वाली 13 वर्षीय दलित लड़की सुबह करीब दस बजे खेतों की ओर शौच के लिए गई थी. काफी देर तक जब वह नहीं लौटी तो परिवार वालों ने उसकी खोज की. शाम को बालिका का शव गन्ने के खेत मे मिला. बालिका की हत्या उसी के दुपट्टे से गला कसकर की गई थी. शुरुआत में तो पुलिस इस घटना पर चुप्पी साधे रही. अगले दिन 15 अगस्त को ईसानगर में दलित बालिका से रेप के मामले में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट करके घटना पर रोष जताया और प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को कठघरे में खड़ा किया. इसके बाद दलित बालिका के रेप का प्रकरण सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा. सोशल मीडिया पर हो रही किरकिरी से सरकार बेहद दबाव में आ गयी. शासन ने लखीमपुर प्रशासन से रिपोर्ट तलब की. इसके बाद लखीमपुर की पुलिस भी हरकत में आई. गांव के दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया.
सामूहिक रेप के बाद दलित किशोरी की हत्या के इस मामले में पुलिस शुरुआती दौर से लापरवाह रही. ईसानगर थाना क्षेत्र के प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार सिंह घटना की सूचना के दो घंटे बाद मौके पर पहुंचे. पुलिस ने केवल हत्या का मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया लेकिन रेप की धाराएं एफआइआर में नहीं दर्ज की. शासन से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट को आधार मानकर लखीमपुर पुलिस ने इस मामले में सामूहिक दुष्कर्म और पोक्सो ऐक्ट की धाराएं बढ़ा दीं. लखीमपुर के जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह कहते हैं, “दलित लड़की से रेप की घटना दुखद है. आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. सरकार की तरफ से पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद के तौर पर 8.25 लाख रुपए दिए जाएंगे.”
मनचलों के कारण गौतमबुद्धनगर में दादरी इलाके के गांव डेरीस्कनर में चाय की दुकान चलाने वाले जितेंद्र भाटी की मेधावी बेटी सुदीक्षा भाटी को जान गंवानी पड़ी. दो साल पहले सुदीक्षा को 3.80 करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप मिली थी और वह कैलिफोर्निया के बैब्सन कॉलेज से बीबीए कोर्स कर रही थी. कोरोना संक्रमण फैलने के कारण सुदीक्षा अमेरिका से गौतमबुद्धनगर स्थित अपने गांव आई हुई थी. 11 अगस्त को सुदीक्षा अपने चाचा के साथ बाइक से गौतमबुद्धनगर से बुलंदशहर आ रही थी. रास्ते में पड़ने वाले मुस्तफाबाद इलाके में बुलट सवार बदमाशों ने छेड़खानी शुरू कर दी और अचानक बुलेट को बाइक के सामने रोक दिया. बाइक के बुलेट से टकराने के कारण सुदीक्षा सड़क पर गिर गई और सिर पर चोट लगने से उसकी मौत हो गई. यहां पर भी पुलिस ने इस पूरी घटना पर लापरवाही बरती. पुलिस ने इसे एक मामूली सड़क दुर्घटना मानकर इससे किनारा कर लिया. जैसे ही कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका वाड्रा, बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने ट्वीट करके इस मामले पर यूपी की सरकार को घेरा बुलंदशहर की पुलिस हरकत में आई. शासन ने भी जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआइटी) का गठन कर दिया. 16 अगस्त को पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से बुलेट बरामद की है.
लॉकडाउन के दौरान यूपी में थमे हुए अपराध पहली जून से अनलॉक लागू होने के बाद रफ्तार पकड़ रहे हैं. पुलिस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अनलॉक के दौरान पिछले ढाई महीनों में महिलाओं से छेड़खानी के 100 से ज्यादा मामले पूरे प्रदेश में आ चुके हैं. लखीमपुर के जंगबहादुरगंज में रहने वाले क्रिमिनल वकील आदेश सिंह बताते हैं, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मार्च, 2017 में सत्ता संभालने के बाद ऐंटी रोमियो दस्ते का गठन किया था. कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के दौरान यह दस्ता निष्क्रिय हो चुका है. स्कूल, कॉलेज और कोचिंग आदि शिक्षण संस्थान बंद होने के बाद से मनचलों के समूह अस्पतालों, बाजार, मुख्य चौराहों पर आसानी से देखे जा सकते हैं. घरों से निकलते ही किशारियों और महिलाओं को इन मनचलों की छेड़खानी का शिकार होना पड़ रहा है.”
यूपी में महिलाओं से छेड़खानी की वारदातों के बढ़ने के पीछे ग्रामीण इलाकों की सामाजिक संरचना में हुए परिवर्तन को सरकारी अधिकारी जिम्मेदार बता रहे हैं. लखनऊ के पुलिस मुख्यालय में तैनात एक पुलिस अधीक्षक नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं, “लॉकडाउन के दौरान दूसरे प्रदेशों से करीब 35 लाख प्रवासी मजदूर यूपी आए हैं. इनमें से 80 फीसद मजदूर ग्रामीण इलाकों में रह रहे हैं. जैसे जैसे समय बीतता जा रहा है कि इन मजदूरों में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है. इन्हीं में से कई मजदूर अपराध में लिप्त मिले हैं. आजमगढ़, सीतापुर, ललितपुर, बरेली जिलों में छेड़खानी की घटनाओं में प्रवासी मजदूरों के लिप्त रहने की सूचनाएं मिली हैं.”
महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने नए सिरे से अपनी रणनीति बनानी शुरू की है. महिलाओं की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में पहली बार गोरखपुर, आगरा और लखनऊ जिलों में महिला पीएसी बटालियन के गठन को हरी झंडी दी है. अभी तक प्रदेश में पीएसी की महिला बटालियन न होने से जिस जगह पीएसी को महिला सुरक्षाकर्मियों की मदद लेनी होती थी वहां महिला पुलिसकर्मियों को बुलाया जाता था. इसी समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला पीएसी के गठन का निर्णय लिया. गोरखपुर में प्रदेश की पहली महिला पीएसी बटालियन का गठन हो गया है. गोरखपुर महिला पीएएसी बटालियन को गोरखपुर मंडल के साथ आजमगढ़, वाराणसी और आजमगढ़ मंडल की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है. इन मंडलों के हर जिले में महिला पीएसी की तैनाती की जाएगी. लखनऊ की महिला बटालियन को सेंट्रल यूपी और आगरा की बटालियन को पश्चिमी यूपी में लगाया जाएगा.
महिला अपराधों पर ज्यादा सक्रियता और सख्ती बरतने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने “शेरनी दस्ते” की परिकल्पना की है. मुख्यमंत्री ने 6 जुलाई को गोरखपुर में गोरखनाथ परिसर से “शेरनी दस्ते” को झंडी दिखाकर इस योजना की शुरुआत की. गोरखपुर से शुरू हुई इस योजना के पहले चरण में पुलिस लाइंस में तैनात 100 महिला पुलिसकर्मियों को पीआरवी दस्ते की तरह गश्त करने के लिए जीपीएस सिस्टम, सायरन, फ्लैश लाइट, पब्लिक एनाउंसमेंट सिस्टम, पेपर स्प्रे से युक्त स्कूटी मुहैया कराई गई है. अभी तक महिला पुलिसकर्मियों के पास स्कूटर न होने से अब तक केवल थानों की सुरक्षा में पहरेदारी, कोविड हेल्प डेस्क व थाने की जीप पर अन्य पुलिसकर्मियों के साथ ही उनकी तैनाती होती थी. गश्त का काम इनसे नहीं लिया जाता था, जबकि महिलाओं के साथ होने वाले अपराध की निगरानी के लिए में महिला पुलिसकर्मियों की गश्त जरूरी होती है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस विभाग ने महिला पुलिसकर्मियों को महिलाओं से जुड़े अपराध को नियंत्रित करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया है. “शेरनी दस्ते” में एक स्कूटर पर दो महिला पुलिसकर्मी गश्त करेंगी. यूपी के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार कहते हैं, “महिलाओं के साथ क्राइम करने वाले अपराधियों पर पुलिस सख्ती से कार्रवाई कर रही है. पुलिस को अपनी गश्त और बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं जिससे ऐसे अपराधों को रोका जहा सके.”
बॉक्स: अनलॉक में ऐसे बढ़े महिला अत्याचार
#गोरखपुर के बड़हलगंज इलाके के ज्ञानीपुर गांव में 14 अगस्त की रात घर से पानी लेने निकली किशोरी के साथ गांव के दो युवकों ने रेप किया. विरोध करने पर लड़की के साथ मारपीट की और उसके शरीर को सिगरेट से कई जगह पर जला दिया. पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
#गोरखपुर के पिपराइच इलाके के एक गांव में छेड़खानी से तंग आकर 16 साल की छात्रा ने 10 अगस्त को अपने शरीर में आग लगा ली. अगले दिन गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. पुलिस ने छेड़खानी और पोक्सो ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर एक युवक को गिरफ्तार किया है.
#जालौन जिले के उरई इलाके में पुलिस प्रताड़ना से तंग आकर 8 अगस्त को एक युवती ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. एक दिन पहले पुलिस इस युवती को पर्स चोरी के आरोप में कोतवाली ले आई थी. आठ घंटे तक पूछताछ करने के दौरान युवती बेहद मानसिक प्रताड़ना का शिकार हुई थी. पुलिस आत्महत्या के इस मामले की जांच कर रही है.
#जौनपुर के खुटहन थानाक्षेत्र के एक गांव में 7 अगस्त की रात घर के बाहर सो रहीं नाबालिग चचेरी बहनों के साथ गांव के चार युवकों ने सामूहिक बलात्कार किया. पुलिस ने चारों युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
#गाजियाबाद के विजयनगर इलाके में रहने वाले एक पत्रकार अपनी भांजी से छेड़छाड़ की शिकायत पुलिस से की थी. शिकायत करने से खफा बदमाशों ने 21 जुलाई की रात पत्रकार की गोली मारकर हत्या कर दी.
#जालौन के नदीगांव थानाक्षेत्र के गांव सिकरी बुजुर्ग में रहने वाले अरविंद कुमार की पत्नी के साथ गांव के लोगों ने ही 5 जुलाई को छेड़छाड़ की थी. छेड़खानी का विरोध करने पर अरविंद की गोली मारकर हत्या कर दी ग्ई. पुलिस ने इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है.
#देवरिया के भटनी थाना क्षेत्र में तैनात इंस्पेक्टर भीष्म पाल सिंह ने 21 जून को शिकायत लेकर थाने पहुंची युवती से अश्लील हरकत की थी. यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शासन ने इंस्पेक्टर को बर्खास्त कर दिया और उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.
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आशीष मिश्र