क्या हो गया यस बैंक को?

यस बैंक के खराब दिनों की कहानी उसी दिन शुरू हो गई थी जब चेयरमैन राना कपूर को आरबीआई की ओर से जबरन हटाया गया. यह तभी स्पष्ट हो गया था कि बैंक के कामकाज में कुछ न कुछ ऐसा है जिसकी पर्देदारी है.

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शुभम शंखधर

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  • 01 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 7:33 PM IST

मंगलवार का दिन यस बैंक के शेयर के लिए अमंगल साबित हुआ. बैंक का शेयर 22 फीसदी से ज्यादा टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर 32 रुपए प्रति शेयर के स्तर पर बंद हुआ. बीते साल 20 अगस्त को अगर आपने यस बैंक में एक लाख रुपए निवेश किए होते तो आपकी करीब 90 फीसदी पूंजी डूब चुकी होती. पिछले साल बैंक का शेयर 404 रुपए प्रति शेयर के भाव पर था. यस बैंक में खाताधारकों को भले एफडी और बचत खाते पर अच्छा ब्याज मिला हो लेकिन निवेशकों को घाटा ही घाटा मिला. यस बैंक की गिनती निजी क्षेत्र के आक्रमक बैंकों में होती है, जो बाजार में औसत दर से ज्यादा ब्याज देते हैं, फटाफटा खाते खोलते हैं, तेज तर्रार काम और ग्राहकों को आराम जैसी छवि बनाने वाले यस बैंक को आखिर हो क्या हो गया? हर आम निवेशक या ग्राहक के मन में यह सवाल होना लाजमी है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो यस बैंक को ये दिन देखने पड़ गए?

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दरअसल यस बैंक के खराब दिनों की कहानी उसी दिन शुरू हो गई थी जब चेयरमैन राना कपूर को आरबीआई की ओर से जबरन हटाया गया. यह तभी स्पष्ट हो गया था कि बैंक के कामकाज में कुछ न कुछ ऐसा है जिसकी पर्देदारी है. बैंक की ओर से बैलेंसशीट और डूबे हुए कर्ज (एनपीए) की सही जानकारी आरबीआइ को न देने का अंदेशा भी इसके बाद गहराया था. आरबीआइ की ओर से स्विफ्ट कम्प्लाइंसेस में अनदेखी के कारण यस बैंक पर एक करोड़ रुपए की पेनल्टी भी लगाई गई थी. इससे यस बैंक के एक क्युआइपी को भी खरीदार नहीं मिले थे, यानी बड़ी झोली वाले निवेशकों का भरोसा भी डगमगाने लगा था.

ताजा हालत यह है कि राना कपूर खुद बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं और बैंक ने जिन कंपनियों को कर्ज दे रखा है उनकी हालत पतली है. इसमें एस्सेल ग्रुप, अनिल अंबानी की एडीएजी, दीवान हाउसिंग और इंडियाबुल्स हाउसिंग प्रमुख कंपनियां हैं. एनबीएफसी संकट उभरने के बाद यस बैंक में बिकवाली तेजी हो गई. जेफरीज की ताजा रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में दूसरे दौर के एनपीए की शुरुआत होने जा रही है. ऐसे में यस बैंक का भविष्य बहुत बेहतर नजर नहीं आ रहा.

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पीएमसी, यस बैंक जैसी घटनाओं, मार्गन स्टेनले की ओर से एसबीआई की रेटिंग कम करना और जेफरीज की ताजा रिपोर्ट बीते एक हफ्ते की इन तीनों खबरों ने पूरे बैंकिंग सेक्टर का मूड बिगाड दिया. ऊपर के दाम में यस बैंक के शेयर खरीदकर बैठे लोग निकलने का रास्ता तलाशेंगे, ऐसे में अगर निचले स्तर से कुछ रिकवरी देखने को मिलती भी है तो यह कितनी टिकाऊ होगी यह कहना मुश्किल है. तकनीकी चार्ट्स पर भी यस बैंक जिस स्तर पर आ चुका है उसे नो चार्ट टेरेटरी कहेंगे यानी चार्ट्स से भी संकेत मिल बंद. अगर आप यस बैंक को सस्ता मानकार शेयर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो सर्तक रहिए और बाजार विशेषज्ञ से पूछकर ही निर्णय लें क्योंकि 400 रुपए से 30 रुपए का सफर तय करने वाले यस बैंक की यात्रा में कई ऐसे मुकाम आए होंगे जब निवेशकों को यह सस्ता मालूम हुआ होगा, नतीजा आपके सामने हैं.

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