कोरोनाः बिहार पहुंच रहे लोगों की अपने ही गांव में एंट्री बैन, नौजवान लगा रहे पहरा

बिहार में जो लोग दूसरे राज्यों से आए हैं, उन्हें गांव के स्कूलों में कम से कम 14 दिनों तक रखने की व्यवस्था की गई है. साथ ही स्कूलों में उनके खाने और पीने की व्यवस्था भी की गई है, लेकिन उन्हें अपने परिवार से मिलने नहीं दिया जा रहा हैं.

Advertisement
कोरोना के खिलाफ जंग (सांकेतिक तस्वीर- PTI) कोरोना के खिलाफ जंग (सांकेतिक तस्वीर- PTI)

सुजीत झा

  • पटना,
  • 26 मार्च 2020,
  • अपडेटेड 11:41 PM IST

  • दूसरे राज्यों से बिहार पहुंचने वालों को स्कूल में किया जा रहा क्वारनटीन
  • कोरोना वायरस को रोकने के लिए सरकार ने किया है लॉकडाउन का ऐलान

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन कर दिया गया है. शहर से लेकर कस्बा और गांव तक के लोग अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य को लेकर सजग हो गए हैं. लॉकडाउन होने के बाद बिहार से बाहर रहने वाले काफी लोग वापस अपने प्रदेश आए. इनमें से काफी लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग भी हुई.

Advertisement

इतने के बाद भी बिहार के काफी लोग अब भी देश के दूसरे शहरों में फंसे हुए हैं और अपने घर लौटना चाहते हैं. इनमें से ज्यादातर मजदूर हैं, जिनका काम बंद हो चुका है. 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान घर के बाहर रहकर जीवनयापन करना इनको मुश्किल लग रहा है, लेकिन जो बिहार आ गए हैं, उनके घर में रहने नहीं दिया जा रहा है.

कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें....

बिहार में जो लोग दूसरे राज्यों से आए हैं, उन्हें गांव के स्कूलों में कम से कम 14 दिनों तक रखने की व्यवस्था की गई है. साथ ही स्कूलों में उनके खाने और पीने की व्यवस्था भी की गई है, लेकिन उन्हें अपने परिवार से मिलने नहीं दिया जा रहा हैं.

गांवों में नौजवान दे रहे पहरा

Advertisement

बिहार के कई गांवों से ऐसी खबरें आ रही हैं, जहां खुद ग्रामीणों ने यह व्यवस्था की हैं, ताकि कोरोना का यह वायरस गांव में न पहुंचे. अधिकतर गांवों में बैरियर लगा दिए गए हैं. नौजवान पहरा दे रहे है और गांवों में किसी भी बाहरी व्यक्ति को आने की इजाजत नहीं है. गांव के लोगों का कहना है कि कोरोना का यह वायरस काफी खतरनाक है और एक-दूसरे से मिलने से फैलता है.

कोरोना पर फुल कवरेज के लि‍ए यहां क्ल‍िक करें...

गांवों में लगा नो-एंट्री का बोर्ड

बिहार के दरभंगा, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, मोतिहारी और औरंगाबाद जैसे तमाम जिलों मे ऐसी व्यवस्था की गई है. इन जिलों के गांवों में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए ग्रमीणों ने जिले के विभिन्न गांवों में नो-एंट्री का बोर्ड भी लगा दिया है. कई गांव में वाहनों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है.

कोरोना से जुड़ी ताजा अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें....

इसके लिए ग्रामीणों ने सड़कों पर बैरिकेडिंग लगा दी है और बाहर से आने वाले व्यक्तियों को गांव में प्रवेश करने से रोक रहे हैं.

क्या कहना है गांव के लोगों का?

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने 21 दिनों तक लॉकडाउन की घोषणा की है. ऐसे में नए और बाहरी लोगों के गांव में प्रवेश से भय बनेगा. बिहार सरकार ने भी इस दिशा में प्रयास किया है और ग्राम पंचायतों के मुखिया के जरिए ऐसे हर पंचायत में क्वारनटीन होम बनाए हैं, जहां बिहार के बाहर से आए लोगों को रखा जा रहा है. ऐसे में बिहार के बाहर से जो लोग आना चाहते है, उन्हें अपने गांव में जाने की इजाजत नहीं मिल पाएगी. गांव के लोगों का कहना है कि कोरोना वायरस रिश्ते-नाते नहीं देखता है, इसलिए सावधानी जरूरी है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement