लॉकडाउन से त्रस्त मजदूर, पैदल ही तय करने निकले 1400 किलोमीटर का सफर

भिवंडी से पैदल ही प्रयागराज को निकलने को मजबूर हुए मजदूरों ने अपनी इस दुखद यात्रा के दौरान आजतक से बात की और बताया कि हमें दो से तीन दिनों में एक बार खाने को कुछ मिल जाता है, लेकिन हम यहां भूख से नहीं मरना चाहते हैं.

Advertisement
लॉकडाउन में बड़ी संख्या में प्रवासी पैदल ही घर के लिए निकलने को मजबूर हुए (फाइल फोटो-पीटीआई) लॉकडाउन में बड़ी संख्या में प्रवासी पैदल ही घर के लिए निकलने को मजबूर हुए (फाइल फोटो-पीटीआई)

दिव्येश सिंह

  • भिवंडी,
  • 28 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 6:25 PM IST

  • 40 दिनों का लॉकडाउन 3 मई को खत्म होने जा रहा
  • पैदल चल रहे प्रवासी श्रमिक भूखे नहीं मरना चाहते
लॉकडाउन का दूसरा चरण 3 मई को खत्म हो रहा है, लेकिन इसे आगे बढ़ाए जाने को लेकर संशय बना हुआ है. इस बीच दूसरे राज्यों में काम करने गए प्रवासी लोगों को अपने घर लौटने की चिंता सताने लगी है. कोई साधन नहीं मिलने के बावजूद तमाम लोग सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने पैतृक घर की ओर निकलने को मजबूर हैं.

लॉकडाउन की वजह से देश के उद्योग-धंधे बंद हैं और बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर बिना काम के ही दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं. प्रवासी मजदूरों के पास न कमाई का साधन बचा है और न ही खाने-पीने का कोई इंतजाम है, ऐसे में वो सभी अपने-अपने घर जाने के लिए परेशान हैं.

Advertisement

कोरोना पर फुल कवरेज के लि‍ए यहां क्ल‍िक करें

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने का काम भी कर रही है, लेकिन अब भी दिल्ली से लेकर मुंबई तक हजारों की तादाद में मजदूर फंसे हुए हैं. इस बीच काम बंद होने की वजह से कई पावरलूम श्रमिकों ने महाराष्ट्र के भिवंडी से प्रयागराज तक के सफर के लिए पैदल ही चलना शुरू कर दिया है जो भिवंडी से करीब 1400 किलोमीटर दूर है.

पैदल ही अपने शहरों की ओर लौटने को मजबूर पावरलूम श्रमिक अभी वर्तमान में मुंबई आगरा राजमार्ग पर हैं और प्रयागराज में अपने-अपने मूल स्थानों तक पहुंचने के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं.

कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...

दशरथलाल बिंद और रामराज्य बिंद कुछ ऐसे मजदूर हैं, जिन्होंने अपनी इस दुखद यात्रा के दौरान आजतक से बात की और बताया कि उन्हें दो से तीन दिनों में एक बार खाने को कुछ मिल जाता है, लेकिन हम यहां भूख से नहीं मरना चाहते हैं.

Advertisement

उन्होंने बताया कि भूख से मरने की जगह हमने पैदल ही घर के लिए निकलने का फैसला लिया और बैग पैक कर प्रयागराज की ओर निकल पड़े.

देश में 40 दिनों का लॉकडाउन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 25 मार्च से 3 हफ्ते के लॉकडाउन का ऐलान किया था तब भी बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर और अन्य लोग अपने घर जाने के लिए पैदल ही सड़क पर उतर आए थे.

इसे भी पढ़ें--- केंद्रीय कर्मचारियों के DA कटौती पर बोले मनमोहन- एकदम गैरजरूरी फैसला

देश में 3 हफ्ते का लॉकडाउन खत्म होने के बाद इसे फिर 19 दिन के लिए बढ़ा दिया गया था. माना जा रहा है कि 3 मई को जब देश में कुल 40 दिनों का लॉकडाउन खत्म होगा तो इसे फिर से बढ़ाया जा सकता है.

बांद्रा में 14 अप्रैल को मजदूरों की उमड़ी भीड़

कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए 25 मार्च से देश में लॉकडाउन है. लॉकडाउन का पहला फेज यानी 21 दिनों की मियाद 14 अप्रैल को पूरी हो रही थी. इसी वजह से मुंबई के बांद्रा स्टेशन पर अचानक बड़ी संख्या में मजदूर पहुंचने लगे थे. देखते-देखते सैकड़ों मजूदर स्टेशन पहुंच गए. इससे हालात बेकाबू हो गए. ये सभी प्रवासी लोग अपने गृहराज्य जाने के लिए यहां पहुंचे थे. हालांकि, पुलिस ने किसी तरह हालात पर काबू पाया.

Advertisement

बाद में जांच के दौरान यह बात सामने आई कि प्रवासी मजदूरों को गुमराह किया गया था. मजदूरों को बताया गया कि स्टेशन पर ट्रेन की व्यवस्था है जिससे वो घर जा सकेंगे. इस तरह की अफवाह फैलाने का आरोप विनय दुबे नाम के शख्स पर लगा.

आरोपी विनय दुबे खुद को मजदूरों का नेता बताता है. जांच आगे बढ़ी तो विनय दुबे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. लेकिन आज मंगलवार को बांद्रा की एक अदालत ने विनय को जमानत दे दी.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement