2014 में मोदी लहर के वक़्त चुनाव से ठीक पहले कयास लगाए जा रहे थे कि राहुल गांधी अपनी पुरानी अमेठी सीट की बजाय रायबरेली से चुनाव लड़ सकते हैं. ऐसे में खुद सोनिया गांधी अमेठी शिफ्ट हो सकती हैं. सूत्रों के मुताबिक राहुल को पार्टी के भीतर ऐसा प्रस्ताव भी दिया गया.
दलील ये दी गई कि कुमार विश्वास, मोदी लहर, स्मृति ईरानी की दावेदारी और कांग्रेस के खिलाफ माहौल में अमेठी के बजाय रायबरेली से जीतना राहुल के लिए आसान रहेगा. मगर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ने दो टूक ये कहकर इंकार कर दिया कि वह हारे या जीते, लेकिन सीट नहीं बदलेंगे. बाद में कड़े मुकाबले में राहुल करीब एक लाख वोटों से जीत गए.
राहुल की जीत के अंतर में खासी कमी आ गई थी. साथ ही हार के बावजूद केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी लगातार अमेठी में दखल दे रहीं हैं. वहीं सोनिया कांग्रेस की कमान राहुल को सौंप चुकी हैं. ऐसे में एक बार फिर कयास तेज़ हो गए हैं कि राहुल अमेठी के बजाय 2019 में रायबरेली का रुख कर सकते हैं.
कांग्रेस अध्यक्ष की रणनीति
वहीं राहुल को ये बात कतई रास नहीं आ रही. वह साफ़ कर चुके हैं कि वे अमेठी छोड़ने वाले नहीं, लेकिन 18 अप्रैल 2018 को जब सोनिया के साथ रायबरेली जिला विकास समन्वय एवं अनुश्रवण समिति की समीक्षा बैठक में सोनिया के साथ राहुल के भी साथ जाने का कार्यक्रम बना. दोनों को रायबरेली के भुएमऊ गेस्ट हाउस में ही रुकना था, वहीं जनता दरबार का ही कार्यक्रम बना था. ऐसे में कयासों ने फिर ज़ोर पकड़ लिया कि सोनिया अब रायबरेली की बागडोर राहुल को सौंपने जा रही हैं.
दरअसल, राहुल के अमेठी संसदीय क्षेत्र की एक विधानसभा सलोन रायबरेली ज़िले में आती है. इसलिए सांसद की हैसियत से राहुल को सोनिया के साथ इस बैठक में हिस्सा लेने का कार्यक्रम बनाया गया. इससे पहले भी अंदरखाने ऐसे कार्यक्रम बने, लेकिन इसी डर से राहुल खुद सोनिया के साथ जाने से बचते रहे. आखिरकार इस बार आधिकारिक तौर पर कार्यक्रम बन ही गया, मीडिया को बता भी दिया गया. इसी बीच इलाके में अफवाहों के बाजार में एक बार वही चर्चा तेज हो गई.
अमेठी पहली पसंद
सूत्रों के मुताबिक, जब राहुल तक ये बात पहुंची, तो खुद राहुल ने स्थानीय नेताओं से साफ़ कर दिया कि उन्हें अपना अगला चुनाव अमेठी से लड़ना है. अमेठी उनकी पहली पसंद है. ऐसे में अगर मैं बैठक में जाऊंगा तो मीडिया और जनता में यही संदेश जाएगा कि मैं अगला चुनाव रायबरेली से लड़ूंगा. मीडिया में अक्सर ऐसी खबरें आती भी हैं। ऐसे में मीडिया भी इसी बात को तूल देगा. फिर क्या था? राहुल बैठक में नहीं गए और सोनिया ने अकेले ही हिस्सा लिया.
हां, राहुल ने इस बात का खासा ख्याल रखा कि उन पर क्षेत्र के विकास की समीक्षा बैठक में नहीं जाने का आरोप न लगे. इसलिए सोनिया गांधी बैठक में हिस्सा लेती रहीं और इधर राहुल पूरे वक़्त सलोन का दौरा करते रहे. उसके बाद आखिर में राहुल-सोनिया अलग अलग अमेठी के फुर्सतगंज एयरपोर्ट पहुंचे और दिल्ली के लिए रवाना हो गए.
मोदी सरकार पर निशाना
जाने से ठीक पहले बतौर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल मीडिया से मुखातिब हुए और पहले कैश क्रंच के लिए मोदी पर हमला बोला. राहुल बोले-ये सब पूरा कनेक्टेड है, लोगों के पैसे जेब से निकाले और नीरव मोदी को दे दिए, हर तरफ आर्थिक संकट है, लोगों का पैसा नहीं मिल पा रहा है, लोग सिर्फ लाइन में लगे हैं, हर कोई फिर से परेशान है जबकि मोदी चुप हैं.
इसके बाद राहुल ने अमित शाह के रायबरेली दौरे की खबरों पर भी चुटकी ली. सवाल था कि अमित शाह अपनी पार्टी की जमीन तलाशने रायबरेली आ रहे हैं? सवाल सुनकर राहुल पहले तो व्यंगात्मक लहज़े में मुस्कुराए. फिर बोले- सवाल ये है कि नीरव मोदी, राफेल घोटाला, गुजरात में पेट्रोलियम घोटाला और अमित शाह के बेटे 50 हज़ार को 80 करोड़ में बदल देते हैं, आए दिन भ्रष्टाचार के मामले सामने हैं. मगर पीएम किसी पर कुछ नहीं बोलते हैं, मुझे अगर संसद में 15 मिनट मिल जाए तो खड़े नहीं हो पाएंगे संसद में, हर तरफ भ्रष्टाचार फैला हुआ है.
कुमार विक्रांत / वरुण शैलेश