महाराष्ट्र में करीब एक महीने की नाटकीय सियासत के बाद आखिरकार शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बना ली. शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
चुनाव परिणाम आने के बाद शिवसेना ने अपनी पुरानी सहयोगी भाजपा से गठबंधन तोड़कर एनसीपी और कांग्रेस जैसे विरोधी दलों से हाथ मिला लिया. इस तरह भाजपा शासित राज्यों में से एक राज्य और कम हो गया, जिसे भाजपा की हार के रूप में देखा जा रहा है. महाराष्ट्र से पहले हिंदी पट्टी के मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे तीन बड़े राज्य बीजेपी के हाथ से निकल चुके हैं.
यह गौर करने वाली बात है कि मुश्किल से छह महीने पहले बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए भारी जीत हासिल की थी. लोकसभा की 543 सीटों में से बीजेपी को 303 सीटें मिली थीं जो कि कुल सीटों का करीब 56 फीसदी है.
जब इन आंकड़ों को विधानसभा क्षेत्रों से मिलाया गया तो पता चला कि लोकसभा चुनावों में कुल 4120 विधानसभा सीटों में से 2089 पर भाजपा पहले नंबर पर थी. यानी लोकसभा चुनाव 2019 में मोदी के नेतृत्व में भाजपा 51 प्रतिशत विधानसभा सीटों पर जीती.
इंडिया टुडे के डाटा इंटेलीजेंस यूनिट (DIU) ने लोकसभा चुनाव परिणाम का विधानसभाओं के आधार पर विश्लेषण किया और इसकी तुलना विधानसभाओं में (28 नवंबर 2019 तक के) मौजूदा प्रतिनिधित्व से की. हमने पाया कि बीजेपी केंद्र में तो ताकतवर है, लेकिन राज्य विधानसभाओं में कमजोर पड़ रही है. राज्यों में स्थानीय पार्टियों की पकड़ मजबूत है.
हालांकि, जब हमने 2014 से नवंबर 2019 तक विधानसभा चुनावों के आंकड़ों का अध्ययन किया तो सामने आया कि फिलहाल बीजेपी कुल 32 फीसदी विधानसभाओं में सत्ता में है.
बीजेपी का 40% भूभाग पर शासन
इसके पहले एक रिपोर्ट में हमने पाया था कि दिसंबर, 2017 में बीजेपी का शासन देश के 71 फीसदी भूभाग पर था जो कि नवंबर 2019 में घटकर 40 प्रतिशत पर सिमट गया. हालांकि, इसके बावजूद बीजेपी देश में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी हुई है.
बीजेपी के पास फिलहाल 1326 (32 फीसदी) विधायक हैं जो कि देश में किसी एक पार्टी के पास विधायकों की सबसे अधिक संख्या है. बीजेपी की विरोधी पार्टी कांग्रेस 846 (20 फीसदी) विधायकों के साथ दूसरे नंबर पर है.
हालांकि, सामूहिक रूप से स्थानीय और राज्य स्तरीय पार्टियों के पास सबसे ज्यादा विधायक हैं. देश भर के कुल विधायकों की संख्या में से 43 फीसदी विधायक स्थानीय और राज्य स्तरीय पार्टियों के पास हैं. बाकी बची सीटें या तो खाली हैं या फिर वहां से कोई निर्दलीय प्रत्याशी जीता है.
आगामी चुनाव
भारत में सब राज्यों में कुल मिलाकर जितने विधायक हैं, उसके 32 प्रतिशत बीजेपी के पास हैं लेकिन कुछ राज्य ऐसे हैं जहां अगले कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं.
चुनाव आयोग ने झारखंड में विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी है. इसके अलावा बिहार और दिल्ली में अगले साल चुनाव होने हैं. दिल्ली विधानसभा में 70, झारखंड में 82 और बिहार में 243 सीटें हैं.
बीजेपी इन तीनों राज्यों की अगर सभी सीटें जीत ले, तो भी उसके विधायकों की संख्या में 6 से 7 फीसदी का इजाफा होगा और ऐसी हालत में बीजेपी के विधायकों की संख्या देश के कुल विधायकों की संख्या का 39 फीसदी होगी.
निखिल रामपाल