भाजपा का इश्तेहार धमाका

भाजपा के पास खर्च करने के लिए कांग्रेस या किसी भी दूसरी पार्टी से कहीं ज्यादा भारी-भरकम खजाना है. वैसे तथ्य यह भी है कि भाजपा ने विज्ञापन पर यूपीए की पिछली दो सरकारों के कुल खर्च से अधिक खर्च किया है.

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इश्तेहार पर भारी-भरकम खर्च इश्तेहार पर भारी-भरकम खर्च

संध्या द्विवेदी / मंजीत ठाकुर

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  • 05 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 2:58 PM IST

कई जानकारों ने भाजपा को चुनाव जीतने वाली मशीन करार दिया है. अभी जब पांच राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, पार्टी ने इश्तेहारों के लिए धन की थैलियां खोल दी हैं. ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च काउंसिल (बीएआरसी) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 16 नवंबर को खत्म सप्ताह में यह पार्टी टीवी पर सबसे ज्यादा विज्ञापन देने वाली ब्रांड थी, यहां तक कि इसने नेटफ्लिक्स, डेटॉल लिक्विड सोप और अमेजन प्राइम वीडियो सरीखों को भी पीछे छोड़ दिया था. शीर्ष 10 में कोई भी दूसरी सियासी पार्टी नहीं थी.

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ऐसा नहीं है कि भाजपा ने विज्ञापनों पर किसी भी दूसरे संगठन से ज्यादा रकम खर्च की (हिंदुस्तान लीवर उस हक्रते शीर्ष विज्ञापनदाता था), फिर भी यह किसी भी दूसरे एक ब्रांड से तो ज्यादा था. कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने इसे क्रोनी कैपिटलिज्म का सबूत बताया. यह अतिरेकी बयान था, पर बेशक यह सबूत तो था ही कि भाजपा के पास खर्च करने के लिए कांग्रेस या किसी भी दूसरी पार्टी से कहीं ज्यादा भारी-भरकम खजाना है. वैसे तथ्य यह भी है कि भाजपा ने विज्ञापन पर यूपीए की पिछली दो सरकारों के कुल खर्च से अधिक खर्च किया है.

22,099

बार भाजपा के इश्तेहार 10 और 16 नवंबर के बीच टीवी चैनलों पर दिखाए गए, बीएआरसी के मुताबिक, 12,951 बार के साथ दूसरा नंबर नेटफ्लिक्स का रहा.

14,343

बार भाजपा के इश्तेहार दिखाए गए, उससे पिछले हफ्ते (9 नवंबर तक) में. वह विमल इलायची पान मसाले (16,190) के बाद दूसरी पायदान पर थी.

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4,996.61 करोड रु.

की रकम सरकार ने सितंबर 2018 में विज्ञापनों पर खर्च की, जैसा कि ब्यूरो ऑफ आउटरीच ऐंड कम्युनिकेशन के एक आरटीआइ जवाब से पता चला. यूपीए ने 5,040 करोड़ रु. खर्च किए थे, पर 10 साल में.

1,202 करोड़ रु.

सरकार का औसत सालाना खर्च था प्रचार पर पहले 4 साल के दौरान (2017-18), यूपीए-2 ने पांच साल में 696 करोड़ रु. और यूपीए-1 ने 5 साल में 312 करोड़ रु. खर्च किए.

710.057 करोड़ रु.

खर्च किए भाजपा ने वित्त वर्ष 2017 में (इसी साल के आखिरी आंकड़े मौजूद) 1,034 करोड़ रु. की आमदनी में से; 613.78 करोड़ रु. केवल इलेक्ट्रॉनिक इश्तेहारों पर खर्च हुए

5

राज्यों में हो रहे हैं विधानसभा चुनाव, जिनमें मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांटे का मुकाबला माना जा रहा है. इश्तेहार पर बढ़ता खर्च 2019 के आम चुनाव की पूर्वपीठिका है

85.2 प्रतिशत

हिस्सा इलेक्टोरल ट्रस्ट का भाजपा की झोली में गया. यानी 169 करोड़ रु. में से 144 करोड़ रुपए. भाजपा को वित्त वर्ष 2017 में कॉर्पोरेट चंदे का 89.22 फीसदी मिला और 2004 से औसत का 78 फीसदी मिला.

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