कांग्रेस को पता है कि अगर उसे केंद्र में दोबारा अपने बूते मजबूत स्थिति में पहुंचना है तो ये उत्तर प्रदेश और बिहार में पार्टी को ताकतवर बनाए बिना मुमकिन नहीं हो सकता. बिहार में हाशिए पर पड़ी कांग्रेस ने राज्य में अपने कायाकल्प के लिए रणनीति तैयार की है.
बिहार के लिए कांग्रेस के नए प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने राज्य में पार्टी के सभी जिलाध्यक्षों के साथ बैठक करके ‘प्लान 2019’ तैयार किया है. पहला लक्ष्य 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर से बेहतर करना है. साथ ही भविष्य में बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को मजबूत स्थिति में पहुंचाना है. हालांकि फिलहाल फोकस 2019 पर ही रखा जाएगा.
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बीच हाल में हुई मुलाकात में जो चीज़ें तय हुईं वो भी बिहार को लेकर कांग्रेस के प्लान में शामिल रहेंगी.
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के बिहार प्लान की 6 बड़ी बातें-
1. पार्टी ने राज्य को 39 जिलों में बांट कर रणनीति बनाई है. राज्य में अधिकतर जो भी जिलाध्यक्ष हैं या बनेंगे, वो पूर्व विधायक, पूर्व सांसद या पूर्व मंत्री नहीं हैं, इसके चलते वो कई बार सियासी दांवपेंच में कमजोर पड़ जाते हैं. इसलिए पार्टी ने तय किया है कि वो राज्य में पार्टी के 27 विधायकों में से विश्वासपात्र 17 विधायकों को नई जिम्मेदारी देगी. साथ ही राज्य से 22 दिग्गज, मजबूत और ताकतवर नेताओं की लिस्ट भी तैयार की जा रही है.
2. जल्दी ही इन सभी को एक जिला गोद लेने को कहा जायेगा. उस जिले में पार्टी की मजबूती के लिए इनको जिलाध्यक्ष के हाथ मजबूत करने होंगे. हां, इस बात का ख्याल रखा जायेगा कि विधायक और बाकी बड़े नेताओं को अपने जिले के बजाय पड़ोस के जिले की जिम्मेदारी दी जायेगी, जिससे आपसी खींचतान की संभावना ना बढ़े.
3. जल्दी ही पार्टी प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल के साथ चार प्रभारी सचिव भी नियुक्त किया जायेंगे, जिनका काम 10 -10 जिलों की निगरानी करना होगा. राहुल गांधी के सख्त निर्देश हैं कि मॉनीटरिंग के बाद सबकी जवाबदेही भी तय की जाएगी.
4. राहुल गांधी और लालू यादव की मुलाकात के बाद तय हुआ कि, कांग्रेस अगड़ी जातियों के साथ ही गैर यादव ओबीसी पर खास फोकस रखेगी. दरअसल, लालू का मानना है कि, कांग्रेस उस वोट बैंक पर निगाह गड़ाए जो बीजेपी के पाले में चला गया है. बाकी मुस्लिम यादव को तो वो खुद ही लामबंद कर लेंगे. इसी परिप्रेक्ष्य में लालू ने राहुल से बिहार में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाने की सलाह भी दी. अशोक चौधरी के जाने के बाद से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी खाली है.
5. कांग्रेस वर्षों से बिहार की सत्ता से बाहर है, इसलिए पार्टी लोगों को बताएगी कि जब वो सत्ता में थी तो बेरोजगारी, किसान और तमाम वर्गों के लिए क्या- क्या योजनाएं लाई थी और तब राज्य की क्या स्थिति थी. इसके साथ ही लोगों को समझाया जाएगा कि कांग्रेस का भविष्य में क्या करने का इरादा है जिससे बिहार खुशहाल हो सके. पार्टी जिलेवार प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के साथ इस सब का प्रचार-प्रसार करेगी. यानि कांग्रेस के वक्त वर्षों पहले क्या था और आगे कांग्रेस का क्या रोडमैप होगा.
6. इसी के साथ ही राहुल ने जिस मछुआरा कांग्रेस का गठन किया है, उसको बिहार में खासतौर विस्तार दिया जायेगा. कांग्रेस को लगता है कि, बिहार में गंगा किनारे इस वर्ग की अच्छी खासी संख्या है, लेकिन अभी तक इनको लेकर अहम योजनाएं नहीं हैं. इसलिए पार्टी इस पर खासतौर से फोकस करेगी.
कुल मिलाकर चुनावी गणित के साथ ही राज्य में पार्टी को खड़ा करने की कवायद की जा रही है, लेकिन सवाल ये है कि, अर्से से पार्टी बिहार में आरजेडी की ‘बी टीम’ बनकर रह गई है और आने वाले वक्त में भी आसानी से कुछ बदलने वाला नहीं दिखता. ऐसे में कागजी प्लान को धरातल पर उतारना राहुल गांधी और शक्ति सिंह गोहिल, दोनों के लिए बड़ी चुनौती होगी. इस मुद्दे पर गोहिल का कहना है, ‘भविष्य के लिए पार्टी अपनी मेहनत में कोई कसर नहीं छोड़ेगी, जिसका फायदा 2019 में गठबंधन के तहत लड़ने पर भी कुछ तो मिलेगा, हम तो अपना प्लान बना ही रहे हैं.’
परमीता शर्मा / खुशदीप सहगल / कुमार विक्रांत