आर्टिफिशियल हार्ट ट्रांसप्लांट से मिली नई जिंदगी

एक छोटे-से डिवाइस के जरिए दिल धड़कने लगा. उस मरीज की उम्र लम्बी हो गई, जो दिल की बीमारी की वजह से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था. आर्टिफिशियल हार्ट ट्रांसप्लांट के जरिए तंदुरुस्त हो गया.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2015,
  • अपडेटेड 7:47 PM IST

एक छोटे-से डिवाइस के जरिए दिल धड़कने लगा. उस मरीज की उम्र लम्बी हो गई, जो दिल की बीमारी की वजह से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था. आर्टिफिशियल हार्ट ट्रांसप्लांट के जरिए तंदुरुस्त हो गया.

दिल्ली के बीएलके सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में पहली बार सबसे कम उम्र के मरीज को आर्टिफिशियल हार्ट इम्प्लांट कर डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी. बैटरी के सहारे गफूर मोहम्मद का दिल धड़कने लगा. 32 साल के मोहम्मद कुर्दिस्तान से अपने बीमार दिल के साथ भारत आए. कारोबारी मोहम्मद जब दिल्ली के बीएलके हॉस्पिटल में पहुंचे तब वे कार्डियोमायोपैथी, यानी दिल की मांसपेशी में हुई एक बीमारी से जूझ रहे थे. सांस बार-बार फूलती थी और एक कदम भी चल पाना मुश्किल था. ऐसे में आर्टिफिशियल हार्ट ट्रांसप्लांट के अलावा मोहम्मद के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था.

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जब मोहम्मद हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए पहुंचे, तब उनकी हालत इतनी खराब थी कि ट्रासंप्लांट के लिए सही डोनर ढूंढने का इंतजार करना मोहम्मद के लिए रिस्की साबित हो सकता था. इसलिए डॉक्टरों ने बिना देरी किए लेफ्ट वेंट्रिक्युलर असिस्टिव डिवाइस (LVAD) इम्प्लांट किया, जो बिल्कुल दिल की तरह काम करता है. इस डिवाइस में 8 रिचार्जेबल बैटरी होती है. हर बैटरी 12 घंटे चलती है, यानी की मरीज आराम से चार दिन बिना बैटरी चार्ज किए भी जीवित रह सकता है.

15 जुलाई को करीब 6 घंटे की सर्जरी के बाद मोहम्मद का दिल पहले की तरह धड़कने लगा. 27 जुलाई को मोहम्मद सामान्य हो गए और उन्हें हास्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया. ऑर्टिफिशियल हार्ट से मोहम्मद की उम्र 10 से 12 साल और बढ़ गई. डॉक्टरों के मुताबिक, आर्टिफिशियल हार्ट के मरीजों को स्विमिंग करने की मनाही होती है, ताकि संक्रमण न फैले. इस आर्टिफिशियल हार्ट ट्रांसप्लांट में 70 लाख से 1 करोड़ तक का खर्च आता है. डॉक्टरों की मानें, तो ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस डिवाइस का फायदा तभी हो पाएगा, जब इसकी कीमत में कमी आएगी.

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