'आजतक' के हिंदी जगत के महामंच 'एजेंडा आजतक' के आठवें संस्करण के पहले दिन ‘पूछता है आजतक- महिलाएं असुरक्षित कब तक’ सत्र में निर्भया की मां आशा देवी के साथ मंच पर मौजूद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सांसद रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि महिलाओं को सिर्फ शारीरिक रूप से सुरक्षा ही नहीं चाहिए बल्कि उन्हें सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी सुरक्षा मिलनी चाहिए.
7 साल पहले 16 दिसंबर को ही निर्भया की मौत हुई थी. इसी दिन आयोजित एजेंडा आजतक के पहले सत्र में बीजेपी सांसद रीता बहुगुणा जोशी ने कहा, 'भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को दहलाने वाला वो दिन था जब निर्भया की मौत हुई. उस समय हर किसी को इसका दुख था. हर महिला की आंखों में आंसूं रहा होगा. पिछले 50 साल से मैं महिलाओं से जुड़ी समस्याओं को देख सुन रही हूं और उनके अधिकारों के लिए लड़ भी रही हूं. लेकिन ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए. मामला लंबा नहीं खिंचना चाहिए.'
न्यायिक प्रक्रिया तेज होः रीता
उन्होंने कहा कि निर्भया का मामला इतना लंबा खींचा, यह बहुत दर्दनाक है और ऐसा नहीं होना चाहिए था. आज सवा लाख से ज्यादा केस लंबित हैं जबकि महज 5 हजार से थोड़ा ज्यादा केसों में सजा हुई है, बाकी मामले अभी कोर्ट में ही हैं. मामला इतना लंबा खिंच जाता है, इससे न्यायिक प्रक्रिया पर तो लोगों को विश्वास है, लेकिन जल्दी न्याय मिलेगा इस पर विश्वास नहीं बन पाता. न्यायिक प्रक्रिया तेज होनी चाहिए जिससे इस पर लगाम लग सके.
रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसे अपराध पनपता कहां से है. जब हम अपने घर के पुरुषों को महिलाओं को मारते देखते हैं तो घर में मौजूद बच्चे को दिखता है कि महिलाओं को मारा जा सकता है. बच्चा जब घर से ही हिंसा देखता है और शायद वहीं से उसके मन में यह चीज बैठ जाती है और शायद वहीं से दिमाग में हिंसा भर जाती है.
उन्होंने आगे कहा कि क्या महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ शारीरिक सुरक्षा तक ही सीमित होती है. शारीरिक सुरक्षा के साथ-साथ महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा भी मिलनी चाहिए. महिलाओं को तीनों सुरक्षा मिलने पर ही स्थिति सुधरेगी. आर्थिक सुरक्षा मिलेगी तो सामाजिक सुरक्षा आएगी. सामाजिक सुरक्षा आएगी तो शारीरिक सुरक्षा मिलेगी. यह काम बहुत कठिन है, लेकिन यह बहुत आवश्यक है.
इसी मंच से निर्भया की मां आशा देवी ने कहा, 'मुझे इंसाफ चाहिए. कहीं न कहीं आज भी मैं वहीं 2012 में ही खड़ी हूं क्योंकि आज भी इंसाफ चाहिए. जवाब देते-देते, इंसाफ मांगते-मांगते मैं खुद एक सवाल बन गई हूं. आशा देवी ने आगे कहा, '2012 में जो घटना हुई उसमें निर्भया की क्या गलती थी. हमारी क्या गलती थी कि आज भी हमें इंसाफ नहीं मिला.
‘एजेंडा आजतक’ के ‘पूछता है आजतक- महिलाएं असुरक्षित कब तक’ सत्र में निर्भया के माता-पिता आशा देवी और बद्रीनाथ के अलावा बीजेपी सांसद रीता बहुगुणा जोशी, अपना दल की अध्यक्ष और सांसद अनुप्रिया पटेल, ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव भी शामिल हुए.
'एजेंडा आजतक' का आठवां संस्करण शुरू
19 साल से लगातार भारत का नंबर वन न्यूज चैनल रहे 'आजतक' के हिंदी जगत के महामंच 'एजेंडा आजतक' के आठवें संस्करण का आगाज सोमवार को हो गया. एजेंडा आजतक की शुरुआत सोमवार सुबह वंदे मातरम से हुई. इसके बाद इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने स्वागत भाषण दिया.
एजेंडा आजतक अन्य इवेंट्स की नींवः कली पुरी
वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने एजेंडा आजतक के महत्व के बारे में बताते हुए इस आयोजन को अपने सभी कार्यक्रमों की नींव बताया. कली पुरी ने कहा कि सभी तरह के विचारों को बगैर किसी दबाव और रोक-टोक के साथ आपके सामने प्रस्तुत करना हमारा प्रमुख एजेंडा है. हिंदी जगत के महामंच का यह आठवां संस्करण है. यह वो एजेंडा आजतक है जिसने दूसरे और कार्यक्रमों का आयोजन किया है. एजेंडा आजतक का पहला एडिशन 2012 में हुआ था. उस समय आजतक का कोई और इवेंट नहीं था. इस एक इवेंट ने नक्शा ही बदल दिया.
दिल्ली के ली मेरिडियन होटल में आयोजित दो दिवसीय 'एजेंडा आजतक' 16 और 17 दिसंबर 2019 चलेगा. एजेंडा आजतक का मकसद है, उस एजेंडे को लोगों के सामने लेकर आना जो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के विचारकों और चिंतकों की सोच है. ये देश में देश की आवाज का एजेंडा होगा.
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