टीम इंडिया को इंग्लैंड के हाथों पहले टेस्ट में 227 रनों से शिकस्त झेलनी पड़ी थी. इस हार के बाद टीम की रणनीतियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं. चेन्नई की पिच स्पिनरों के लिए मुफीद थी, इसके बावजूद इंग्लैंड ने पहली पारी में विशाल स्कोर खड़ा कर दिया था. पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने भारतीय स्पिनरों की फिटनेस पर सवाल उठाए हैं.
मांजरेकर ने एक अखबार के आर्टिकल में बताया, 'चेन्नई की पिच पहले ही दिन से टर्न कर रही थी. स्पिन खेलने में माहिर जो रूट ने अच्छी बल्लेबाजी की. समय बीतने के साथ ही यह पिच और स्लो हो गई. पिच पर उतना खराब रफ नहीं बना था, जो मैच का निर्णय करे. पांचवें दिन मैच खत्म होने के बाद भी पिच उतनी खराब नहीं दिखी.'
उन्होंने कहा, 'इंग्लैंड ने टॉस जीतने के कारण मैच जीता, यह मैं नहीं समझता. इंग्लैंड की टीम अच्छी बैटिंग के कारण मैच जीतने में सफल रही. ऐसा कभी-कभार होता है कि एक विदेशी टीम भारत में टर्निंग पिच पर भारत में टॉस जीतकर 578 रन बना ले. ज्यादातर क्रेडिट जो रूट को जाना चाहिए, लेकिन यह कहानी का केवल एक पक्ष है.'
मांजरेकर ने आगे कहा, 'कहानी का दूसरा पक्ष एक सवाल है. यदि पिच पहले दिन से बदल रही थी, तो तीनों भारतीय स्पिनर्स ने मिलकर इंग्लैंड को 300 या 350 से कम स्कोर आउट क्यों नहीं किया? स्लो टर्न होने के नाते आपको ऐसे गेंदबाज की जरूरत थी, जो हवा में तेज गेंद डाल सके. रविचंद्रन अश्विन, शाहबाज नदीम और यहां तक कुलदीप यादव अच्छे गेंदबाज हैं, लेकिन उन्हें अपनी फिटनेस पर काम करना होगा.'
मांजरेकर ने माना, 'अगर आप पूरी तरह फिट नहीं होते हैं, तो ऐसे में सिर्फ अपने हाथ का ही प्रयोग करते हैं. स्पिनरों को अपनी अंगुलियों और शरीर पर ध्यान देना चाहिए. रवींद्र जडेजा इन परिस्थितियों में सफल रहते, क्योंकि उन्होंने अपनी फिटनेस पर काफी ध्यान दिया है. जडेजा की सफलता के पीछे उनकी फिटनेस का काफी योगदान है.'
उन्होंने कहा, 'भारतीय टीम फिटनेस के कारण विश्व स्तरीय बन पाई है. भारत के पास बेहतरीन तेज गेंदबाजी यूनिट है, जिनकी फिटनेस और शारीरिक कौशल काफी अच्छी है. भारतीय बल्लेबाजों की विकेटों के बीच दौड़ भी काफी अच्छी है. एमएस धोनी और विराट कोहली ने यह बेंचमार्क सेट किया था. भारत की फील्डिंग भी पहले से काफी अच्छी हो गई है. लेकिन भारतीय टीम को स्पिनरों की फिटनेस पर काम करना होगा.'
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