मां-बाप मजदूर और बेटी फीफा अंडर-17 में. ये कहानी है रांची की अनीता की, जिसने बहुत ही छोटी उम्र और तंग हालात में रहते हुए भी फीफा अंडर-17 वर्ल्डकप के कैंप में जगह बनाई. अनीता ने ये काम करके न सिर्फ अपने परिवार का नाम रोशन किया बल्कि पूरे राज्य और पूरे भारत का भी नाम रोशन किया. जब आजतक के रिपोर्टर अनिता के घर पहुंचे तो उन्हें अनिता को मिले पुरस्कार देखने को मिले. घर में मानो पुरस्कारों की लाइन हो. अनिता के मां-बाप मजदूर हैं और बड़ी ही मुश्किल से दो वक्त की रोटी का बंदोबस्त कर पाते हैं. लेकिन अनिता ने ये साबित कर दिया कि आदमी चाहे गरीब हो या अमीर, उसकी मेहनत और लगन ही उसे आगे बढ़ाती है.