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बच्चों को पैदा करने के बाद खुद को मार देती है ये मां, ऑक्टोपस की विचित्र कहानी

aajtak.in
  • शिकागो,
  • 14 मई 2022,
  • अपडेटेड 6:10 PM IST
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समुद्र में पाए जाने वाले ऑक्टोपस (Octopus) के जीवन के बारे में यह बात आपको हैरान भी करेगी और परेशान भी. ऑक्टोपस वह जीव हैं जो बहुत कम उम्र में ही अनाथ हो जाते हैं. यूं समझिए कि ऑक्टोपस के माता-पिता सिर्फ संतान पैदा करने तक ही जीवित रहते हैं. इसमें भी जिस तरह से मादा ऑक्टोपस की मौत होती है, वह बेहद दर्दनाक है. (Photo: Pixabay)

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मादा ऑक्टोपस के बारे में जानकर किसी को भी दुख होगा. क्योंकि यह अंडे देने के बाद आत्महत्या कर लेती है, और वह भी बेहद दर्दनाक तरीके से. एक मादा ऑक्टोपस अंडे देने के बाद, खाना खाना बंद कर देती है और खुद को चोट पहुंचाने लगती है. वह अपने शरीर से खुद अपनी खाल नोचकर अलग करती है. साथ ही, अपने टेन्टेकल्स (Tentacles) की टिप (Tip) या ऊपरी भाग को भी काट देती है. (Photo: Pixabay)

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जब तक ऑक्टोपस के बच्चे अंडे से बाहर निकलते हैं, तब तक उनकी मां मर चुकी होती है. कुछ ही महीने बाद, पिता की भी मृत्यु हो जाती है. यानी ये मां अपने बच्चों को देख भी नहीं पाती, उससे पहले ही अपनी जान दे देती है. ऑक्टोपस के छोटे और बेहद दर्दभरे जीवन ने हमेशा से वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है. 1944 में, शोधकर्ताओं ने यह अनुमान लगाया था कि सेक्स (Sex) या संभोग (Mating) के बाद, ही ऐसा होता है. (Photo: Pixabay)

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80 साल के बाद वैज्ञानिकों की वह अस्पष्ट परिकल्पना आकार ले रही है. शोधकर्ताओं ने हाल ही में यह पता लगाया है कि संभोग या सेक्स से मादा ऑक्टोपस के हार्मोन्स में, कोलेस्ट्रॉल (cholesterol) आधारित कई अहम बायोकैमिकल पाथवेज़ में बदलाव होता है. (Photo: Pixabay)

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शिकागो यूनिवर्सिटी (University of Chicago) में शोध करने वाले मॉलीक्यूलर बायोलॉजिस्ट जेड यान वांग (Z. Yan Wang) का कहना है कि हम जानते हैं कि आहार के दृष्टिकोण से और शरीर में अलग-अलग सिग्नलिंग सिस्टम के लिए कोलेस्ट्रॉल अहम है. यह कोशिका (Cell) की झिल्ली (Membrane) के लचीलेपन से लेकर, तनाव हार्मोन के बनने के लिए ज़िम्मेदार है. लेकिन आश्चर्य की बात है कि यह इनके जीवन चक्र में भी अहम भूमिका निभाता है. (Photo: Pixabay)

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मनुष्यों में भी कोलेस्ट्रॉल अगर उच्च स्तर पर हो तो वब टॉक्सिक होता है. आनुवंशिक विकार (Genetic disorders) कोलेस्ट्रॉल मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाते हैं, जिससे व्यवहार संबंधी परेशानियां होती हैं. इनमें बार-बार खुद को चोट पहुंचाना, खाना न खाना शामिल हैं. ज़्यादा गंभीर स्थिति में ये मामले जानलेवा भी हो सकते हैं. (Photo: Pixabay)

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वैज्ञानिकों को यह समझने में कई साल लग गए कि ऐसा ऑक्टोपस और स्क्विड में पाए जाने वाले एक छोटे अंग की वजह से है. 1977 में, शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि ऑप्टिक ग्रंथि (Optic Gland) ऑक्टोपस की पहले से तय मौत के लिए जिम्मेदार है. ऑप्टिक ग्लैंड मनुष्यों में पिट्यूटरी ऑर्गन की ही तरह काम करती है. यह ऑक्टोपस की आंखों के बीच में होती है और यह सेफलोपोड्स (Cephalopods) में यौन विकास (Sexual Development) और उम्र बढ़ने (Aging) से संबंधित होती है. (Photo: Pixabay)

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अगर मादा ऑक्टोपस से ऑप्टिक ग्लैंड को हटा दिया जाए, तो वह अंडे देने के कई महीने बाद तक जीवित रह सकती है. 2018 में, वैज्ञानिकों ने इस संदर्भ में दो मादा ऑक्टोपस से दो ऑप्टिक ग्लैंड के आरएनए (RNA) को सीक्वेंस किया. एक ऑक्टोपस जिसकी मौत होने वाली थी, उसमें कई जीनों में गतिविधियों के उच्च स्तर को देखा गया, जो सेक्स हार्मोन, इंसुलिन हार्मोन और कोलेस्ट्रॉल मेटाबॉलिज़्म को कंट्रोल करती हैं. (Photo: Pixabay)
 

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अब उन्हीं शोधकर्ताओं में से कुछ ने, सामान्य मादा ऑक्टोपस और सेक्स करने वाली मादा ऑक्टोपस की ऑप्टिक ग्लैंड से निकलने वाले अणुओं (Molecules) का सीधे तौर पर विश्लेषण किया. यह शोध करंट बायोलॉजी (Current Biology) में प्रकाशित हुआ है. शोध में पाया गया कि सेक्स के बाद, ऑप्टिक ग्लैंड वास्तव में ज्यादा सेक्स हार्मोन, इंसुलिन जैसे हार्मोन और ऊंचे स्तर के कोलेस्ट्रॉल का स्राव करती है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये तीनों मॉलीक्यूल्स ऑक्टोपस की मौत का कारण बनते हैं. न्यूरोबायोलॉजिस्ट क्लिफ्टन रैग्सडेल (Clifton Ragsdale) कहते हैं कि जब ऑक्टोपस में यह बदलाव होते हैं, तो मरने से ठीक पहले वे पागल हो जाते हैं.  (Photo: Tom Kleindinst, Marine Biological Laboratory)


 

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