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रेगिस्तान का आयोडीन खत्म कर रहा है ओजोन लेयर: स्टडी

aajtak.in
  • न्यूयॉर्क,
  • 23 दिसंबर 2021,
  • अपडेटेड 6:31 PM IST
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नमक में आयोडीन आपको पोलियो और घेघा जैसी बीमारियों से बचाता है. लेकिन रेगिस्तान का आयोडीन ओजोन लेयर को खत्म करता है. हैरान हो गए न यह पढ़कर पर यह सच है. हाल ही में हुई एक स्टडी में यह खुलासा हुआ है कि रेगिस्तान की धूल में मिला आयोडीन ओजोन परत को खत्म कर रहा है. उसके छेद को बढ़ाने में मदद करता है. आइए समझते हैं इस हैरतअंगेज प्रक्रिया को...(फोटोः गेटी)

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जब तेज हवाएं रेगिस्तान के धूलकणों को वायुमंडल में पहुंचाती हैं तब उसमें मौजूद आयोडीन ऐसे रसायनिक प्रक्रियाएं करती हैं, जिनसे वायु प्रदूषण कम होता है. लेकिन कुछ ग्रीनहाउस गैसें वायुमंडल में लंबे समय के लिए टिक जाती हैं. जिसकी वजह से ओजोन लेयर को नुकसान होता है. यह स्टडी हाल ही में साइंस एडवांसेस जर्नल में प्रकाशित हुई है. अब वैज्ञानिकों को फिर से वायुमंडलीय परतों और प्रदूषणकारी तत्वों की रसायनिक प्रक्रिया को फिर से समझना होगा. (फोटोः गेटी)

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बोल्डर स्थित कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में केमिस्ट्री के प्रोफेसर रेनर वोल्कामर कहते हैं कि नमक में पोषक तत्व का काम करने वाला आयोडीन वायुमंडल के ऊपर ओजोन परत को खत्म करता है. रेनर और उनकी टीम ने हाल ही में यह अध्ययन किया है कि कैसे आयोडीन ओजोन लेयर को खा रहा है. आयोडीन से न सिर्फ वायु गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है, बल्कि इसका दुष्प्रभाव जलवायु पर भी हो रहा है. (फोटोः गेटी)

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रेनर ने कहा कि आयोडीन की वजह से ग्रीनहाउस गैसें वायुमंडल में ज्यादा लंबे समय तक टिकी रहती हैं. ये ग्रीनहाउस गैसें ओजोन लेयर को खत्म करती हैं. इसलिए अब वैज्ञानिकों को नए सिरे से सोचना होगा. रेनर कहते हैं कि अभी तक हम सोच रहे थे आयोडीन फायदेमंद है लेकिन इस मामले में वह नुकसानदेह है. वायुमंडल और ओजोन पर आयोडीन के दुष्प्रभावों का अध्ययन फिलहाल अधूरा है, लेकिन प्राइमरी लेवल पर यह बात सामने आ चुकी है कि इससे ओजोन को नुकसान हो रहा है. (फोटोः गेटी)

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रेनर ने दुनियाभर के वैज्ञानिकों से अपील की है कि हमारी समझ धरती पर मौजूद स्रोतों और उनकी रसायनिक प्रक्रियाओं की तो ठीक है, लेकिन वायुमंडल में इनका क्या असर होता है, इसकी स्टडी करनी चाहिए. क्योंकि इस क्षेत्र में अब भी ज्यादातर वैज्ञानिकों को नहीं पता. क्योंकि ज्यादातर लोगों को यह लगता था कि धूल भरी हवा प्रदूषण वाले जोन से नीचे बहती है. लेकिन ऐसा नहीं है. अब धूल भरी हवा वायुमंडल में ऊंचाई तक पहुंच रही है. इससे ओजोन पर असर पड़ रहा है. हमें इस बात पर गौर करना होगा. (फोटोः गेटी)

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रेनर वोल्कामर ने बताया कि ओजोन लेयर को खाने वाले आयोडीन को लेकर प्रयोगशाला में कोई प्रयोग नहीं किया गया है. लेकिन लैब में ऐसे प्रयोग जरूर हुए हैं कि आयोडीन का गैस वाला रूप ओजोन लेयर को खा सकता है. किसी ने यह नहीं सोचा कि रेगिस्तानी धूलकणों के साथ वायुमंडल के ऊपर तक पहुंचने वाला आयोडीन ओजोन को नुकसान पहुंचा सकता है. दक्षिण अमेरिका के तटों के पास समुद्र के ऊपर वायुमंडल में गैस रूप में मौजूद आयोडीन की मात्रा बहुत ज्यादा है. (फोटोः गेटी)

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इस स्टडी के प्रमुख शोधकर्ता और चीन के पेकिंग यूनिवर्सिटी में साइंटिस्ट थियोडोर कोनिग ने कहा कि धूलकणों के साथ ओजोन तक पहुंचने वाला आयोडीन नुकसानदेह है. यह एक नए तरह का प्रदूषणकारी तत्व है. जो हमारे सिर के ऊपर से सुरक्षा वाली छतरी को खत्म करने में लगा है. इस बात की पुष्टि ट्रॉपिकल ओशन ट्रोपोस्फेयर एक्सचेंज ऑफ रिएक्टिव हैलोजेन्स एंड ऑक्सीजेनेटेड हाइड्रोकार्बन्स (TORERO) प्रयोग से भी हुई है. चिली के अटाकामा और पेरू के सेचुरा रेगिस्तान के ऊपर वायुमंडल में धूलकणों के साथ आयोडीन की मात्रा बहुत ज्यादा पाई गई है. (फोटोः गेटी)

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थियोडोर कोनिग मजाक में कहते हैं कि वैज्ञानिकों के पास रेगिस्तान के धूलकणों में मिले आयोडीन और ओजोन लेयर के केमिकल रिएक्शन की फोटो नहीं है, इसलिए इसे कोई मान नहीं रहा था. लेकिन अब इन्हें ये बात माननी पड़ेगी. जो भी वैज्ञानिक वायुमंडल की स्टडी कर रहे हैं, उन्हें आयोडीन के प्रभावों पर भी अध्ययन करना पड़ेगा. क्योंकि हमारी धरती पर बहुत से ऐसे रेगिस्तान हैं, जिनकी धूल ऊपरी वायुमंडल तक पहुंचती है, उसके साथ ओजोन को खत्म करने वाला आयोडीन भी पहुंचता है. (फोटोः गेटी)

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अगर ज्यादा मात्रा में आयोडीन ऊपरी वायुमंडल तक पहुंच गया तो जीवनभर के लिए मीथेन और अन्य ग्रीनहाउस गैसों को वहां चिपकने का मौका मिल जाएगा. जिससे ओजोन लेयर पूरी तरह नष्ट हो सकता है. अगर ओजोन लेयर खत्म हुआ तो सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणें धरती पर कितनी तबाही मचाएंगी इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. (फोटोः गेटी)

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