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Chile: 20 साल में झील से रेगिस्तान बन गई 'द पेनुलास लेक', जलवायु परिवर्तन का भयावह असर

aajtak.in
  • वालपराइसो (चिली),
  • 14 जून 2022,
  • अपडेटेड 1:12 PM IST
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मध्य चिली का वालपराइसो शहर (Valparaiso City). यहां पर एक झील है, जिसका नाम है द पेनुलास लेक (The Penuelas Lake). 20 साल पहले इसी झील से पूरे शहर को पानी सप्लाई होता था. इस झील में इतना पानी था कि उससे ओलंपिक के 38 हजार स्वीमिंग पूल्स को भरा जा सकता है. अब तो शायद 2 पूल भर का पानी भी नहीं बचा होगा. इस झील को इतनी बुरी हालत में किसी ने नहीं देखा था. ये तो आपके शहर की झीलों, तालाबों और नदियों के साथ भी हो सकता है. (फोटोः रॉयटर्स)

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जलवायु परिवर्तन की वजह से वालपराइसो शहर में 13 साल लगातार सूखा पड़ा. बारिश बेहद कम हुई. एंडीज पहाड़ों से पिघलने वाली बर्फ से झील में आने वाला पानी बंद हो गया. एंडीज के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. इतनी तेजी से की पानी बहता नहीं, सीधे भाप बनकर उड़ जाता है. यानी द पेनुलास लेक (The Penuelas Lake) तक पहुंचने से पहले पानी खत्म. (फोटोः रॉयटर्स)

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द पेनुलास लेक (The Penuelas Lake) की सूखी हुई तलहटी पर सिर्फ मछलियों के कंकाल फैले हुए दिखते हैं. कुछ पानी तलाशते मवेशी या जंगली जानवर. 13 साल का सूखा इतना भयावह था कि दुनिया के सबसे बड़े तांबा उत्पादक को लिथियम और खेती के लिए पानी की राशनिंग करनी पड़ी. अब द पेनुलास लेक के पास रहने वाली 54 वर्षीय अमांडा कारास्को कहती हैं कि हम तो प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि हमारे लिए पानी भेज दें. (फोटोः रॉयटर्स)

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अमांडा पुराने दिनों को याद करके कहती हैं कि हम इस झील में नाव लेकर घंटों मछलियां पकड़ते रहते थे. अब तो न पानी है. न ही मछलियां. पूरी झील सूख गई है. कुछ हिस्सों में थोड़ा बहुत पानी है. पहले भी पानी का लेवल कम होता था. लेकिन इतनी बुरी हालत कभी नहीं थी. इस झील को बारिश के पानी की जरूरत है. (फोटोः रॉयटर्स)

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वालपराइसो शहर में पानी पहुंचाने वाली कंपनी ESVAL के जनरल मैनेजर जोस लुईस मुरिलो कहते हैं कि द पेनुलास लेक (The Penuelas Lake) को बारिश के पानी की सख्त जरूरत है. लेकिन यह काम यहां पर सर्दियों के मौसम में ही होता है. उससे पहले इसकी उम्मीद करना बेकार है. अब वालपराइसो शहर को पानी की भारी किल्लत हो रही है. पहले शहर का अधिकतर हिस्सा इसी झील से पानी लेता था. (फोटोः रॉयटर्स)

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पर्यावरण एक्सपर्ट्स का मानना है कि जलवायु के वैश्विक बदलाव की वजह से चिली के इस इलाके के प्राकृतिक मौसम में बदलाव आया है. यहां का मौसम पूरी तरह से बदल गया है. कम दबाव वाले तूफान चिली के ऊपर प्रशांत महासागर से पानी खींचकर बारिश कराते थे. ये काम सर्दियों में होता था. सारे पानी के स्रोत भर जाते थे. एंडीज पहाड़ों के ऊपर बर्फ की मोटी परत जम जाती थी. लेकिन अब ऐसा नहीं होता. (फोटोः AFP)

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चिली की तरफ आने वाले तूफानों को अब गर्म होते समुद्र रोक दे रहे हैं. बढ़ते समुद्री तापमान और बारिश की कमी की वजह से चिली की तरफ बारिश नहीं हो रही है. एक ग्लोबल स्टडी के मुताबिक ओजोन परत में कमी, अंटार्कटिका के ऊपर ग्रीनहाउस गैसों की वजह से भी चिली के मौसम पर असर पड़ रहा है. इनकी वजह से चिली से तूफान दूर चले गए हैं. मौसम पूरी तरह से बदल गया है. (फोटोः रॉयटर्स)

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चिली स्थित सेंटर ऑफ क्लाइमेट एंड रिसिलिएंस के शोधकर्ता डंकन क्रिस्टी ने कहा कि अगर आप पेड़ों की छाल के अंदर बने छल्लों को देखेंगे तो पता चलेगा कि 400 साल पहले ऐसे हालात नहीं थे. 13 साल का लगातार सूखा एक दुर्लभ घटना है. एंडीज पहाड़ों पर जमी बर्फ की वजह की वजह से उन्हें देश का 'वॉटर टावर' कहा जाता था. लेकिन अब इन टावरों में पानी भर नहीं रहा है. बल्कि ये तेजी से सूख रहे हैं. पिघल कर नहीं, भाप बनकर. (फोटोः रॉयटर्स)

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सिविल इंजीनियर और जल विशेषज्ञ मिगुएल लागोस चिली से 50 किलोमीटर दूर स्थित लगुना नेग्रा स्टेशन पहुंचे ताकि गर्मियों से पहले और बाद में पानी की सप्लाई का पता कर सकें. ये सप्लाई वहां मौजूद जमी हुई बर्फ से होती है. लेकिन उन्हें दोनों बार वहां कुछ नहीं मिला. न बारिश हुई. न बर्फ जमी. थोड़ी बहुत जो जमी थी वो उसी मौसम में खत्म हो गई. अगले महीनों तक टिकी ही नहीं. (फोटोः रॉयटर्स)

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