जानें, किस देवता को कौन सा फूल चढ़ाने से होंगे प्रसन्न? पूजा में रखें इन बातों का ध्यान

ऐसी मान्यता है कि भगवान सोना-चांदी चढ़ाने से प्रसन्न नहीं होते हैं, जितना एक पुष्प चढ़ाने से भगवान प्रसन्न होते हैं. फूलों की तुलना में माला चढ़ाने से दोगुना फल मिलता है. दरिद्रता दूर होती है और लक्ष्मी की वृद्धि होती है, अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है, भाग्य साथ देता है, परिवार में मंगल होता है.

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जानें, किस देवता को कौन सा फूल चढ़ाने से होंगे प्रसन्न? जानें, किस देवता को कौन सा फूल चढ़ाने से होंगे प्रसन्न?

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 9:10 PM IST

भगवान की पूजा में पुष्पों का विशेष महत्व माना गया है. कोई भी पूजा या अनुष्ठान बिना पुष्प चढ़ाए अधूरा माना जाता है. शास्त्रों में बताया गया है कि देवताओं के पसंदीदा पुष्प और पत्र चढ़ाने से श्रेष्ठ फलों की प्राप्ति होती है तो आइए जानते हैं कि कौन से देवता को कौन से फूल पसंद है और किन बातों का विशेष ध्यान रखना है?

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शास्त्रों के अनुसार पुष्प उसे कहते हैं जिसको भगवान के चरणों में अर्पित करने पर पुण्य की वृद्धि, पापों का नाश एवं प्रचुर मात्रा में उत्तम फलों की प्राप्ति होती है. शास्त्र कहते हैं कि भगवान का श्रृंगार करते समय पुष्प सदैव मस्तक पर सजाए जाने चाहिए और पूजा करते समय पुष्प हमेशा चरणों में समर्पित करने चाहिए.

ऐसी मान्यता है कि भगवान सोना-चांदी चढ़ाने से प्रसन्न नहीं होते हैं, जितना एक पुष्प चढ़ाने से भगवान प्रसन्न होते हैं. फूलों की तुलना में माला चढ़ाने से दोगुना फल मिलता है. दरिद्रता दूर होती है और लक्ष्मी की वृद्धि होती है, अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है, भाग्य साथ देता है, परिवार में मंगल होता है.

भगवान गणेश

गणपति जी को तुलसी छोड़कर सभी फूल पसंद है. गणपति जी को दूर्वा एवं शमी पत्र विशेष प्रिय है. दूर्वा की पांच पत्ती होनी चाहिए.

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भगवान शंकर

भगवान शंकर पर पुष्प चढ़ाने का विशेष महत्व है. बेलपत्र और धतूरा भगवान शंकर को विशेष प्रिय है. शंकर जी के प्रिय पुष्प अगस्त्य, गुलाब पाटला, मोलीसरी, शंख पुष्पी, नाग चंपा, नाग केसर, जयंती, बेला, कनेर आदि हैं. भगवान शंकर पर दूर्वा पत्र चढ़ाने से आयु और धतूरा चढ़ाने से पूर्ति की प्राप्ति होती है. भगवान शंकर पर कुंड और केतकी के पुष्प नहीं चढ़ाने चाहिए.

 भगवान कृष्ण

भगवान कृष्ण के पुष्पों का भी विशेष महत्व है. श्री कृष्ण के प्रिय पुष्प कुमुद, कनेर, मल्लिका, चंपा, जाति, तगड़, पलाश के पत्ते आदि है. कमल के फूल में लक्ष्मी जी का निवास होता है, इसलिए अन्य फूलों से कमल का फूल श्री कृष्ण को ज्यादा प्रिय है. कमल के फूल से ज्यादा श्री कृष्ण को तुलसी प्रिय है.

भगवान विष्णु

भगवान विष्णु की पूजा में भी पुष्पों और पत्रों का विशेष महत्व है. भगवान विष्णु को रामा और श्यामा तुलसी बहुत प्रिय है. फूलों में ताजी माल्ती, चंपा, कनेर, बेला, कमल और मणियों की मालाएं हो, बासी तुलसी भी भगवान अपनाएंगे. तुलसी की तरह ही एक पौधा होता है दोना. दोना भी भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है. इतना प्रिय है कि दुख में भी भगवान विष्णु इस पौधे को अपना लेंगे. भगवान विष्णु पर धतूरा नहीं चढ़ाया जाता.

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देवी के पुष्प

देवी को सभी लाल पुष्प जैसे गुलाब, लाल कनेर और सुगंधित पुष्प पंसद है. अपामार का पुष्प देवी को प्रिय पसंद है. लक्ष्मी जी का सभी पुष्पों में निवास है, लेकिन लक्ष्मी जी को कमल का फूल का सबसे ज्यादा प्रिय है. 
तुलसी पत्र और अगस्त्य का फूल कभी बासे नहीं होते है. कमल 11 दिन तक, कुमुद 5 दिन तक बासी नहीं होता है. चंपा की कलि छोड़कर किसी दूसरे पुष्प की कलि भगवान पर नहीं चढ़ानी चाहिए.   

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