9 अगस्त को बलराम जयंती, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और कथा

बलराम जयंती पर किसानों के घर में हल और बैल की पूजा की जाती है. इस दिन गाय के दूध और दही का सेवन वर्जित माना जाता है.

इस बार बलराम जयंती रविवार, 9 अगस्त को पड़ रही है.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 08 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 4:12 PM IST

भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम की जयंती मनाई जाती है. यह दिन महिलाओं के लिए खास है. इस दिन व्रत और विधि विधान से पूजा करने पर उन्हें संतान की प्राप्ति होती है. इस बार बलराम जयंती रविवार, 9 अगस्त को पड़ रही है. बलराम जयंती पर व्रत रखने से संतान को सुखों की प्राप्ति होती है.

किसानों को घर में इस दिन हल और बैल की पूजा की जाती है. इस दिन गाय के दूध और दही का सेवन वर्जित माना जाता है. आइए जानते बलराम जयंती पर की कथा और शुभ मुहूर्त.

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बलराम जयंती का शुभ मुहूर्त

षष्ठी तिथि प्रारम्भ - सुबह 04.18 से (09 अगस्त 2020)

षष्ठी तिथि समाप्त - अगले दिन सुबह 06.42 मिनट तक (10 अगस्त 2020)

बलराम जयंती की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक ग्वालिन स्त्री गर्भवती थी. उसके प्रसव में कुछ समय बाकी था, इसके बाद भी वह दूध और दही बेचने के लिए घर से दूर निकल जाती थी. एक दिन जैसे ही वह घर से कुछ दूर गई उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. तब उस स्त्री ने एक झरबेरी की ओट में एक बच्चे को जन्म दिया. उस दिन हल षष्ठी थी.

ग्वालनि पहले तो वहीं थोड़ा आराम किया उसके बाद मदद के लिए बच्चे को खेत में ही लिटाकर आगे बढ़ी. इस दौरान उसका हल षष्ठी का व्रत भी खंडित हो गया था. ग्वालिन का बच्चा झरबेरी के नीचे था और तभी एक किसान खेत जोतते हुए वहां पहुंचा और किसान का हल बच्चे को लग गया.

किसान ने जब उस बच्चे का रोना सुना तो वह अत्यंत दुख हुआ और बच्चे को झरबेरी के कांटों से टांके लगाकर भाग गया. जब ग्वालिन वापस लौटी तो उसे अपने बच्चे मृत पाया. अपने बच्चे की अवस्था देखते ही उसे अपने पाप की याद आ गई और उसने तुरंत ही लोगों को जाकर पूरी बात बताई और अपने बच्चे की दशा के बारे में भी बताया.

उसके इस प्रकार से क्षमा मांगने पर सभी गांव वालों ने उसे क्षमा कर दिया. जब ग्वालिन वापस उसी स्थान पर आई तो उसका बच्चा जिंदा था और वह खेल रहा था.

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