ऋषि पंचमी ऋषियों की ख़ास पूजा कर दें, इससे व्यापार और नौकरी सब अच्छी हो जाएगी. ऋषि पंचमी पर सात ऋषियों की पूजा करें. सात ऋषि है- कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदगनी, वशिष्ट और साथ में गुरु वशिष्ठ की पत्नी अरुंधति की भी पूजा करें. इनके आशीर्वाद के बिना कोई काम सफल नहीं होता है.
इन्हीं ऋषियों के नाम पर गोत्र के नाम होते हैं, सारे हिन्दू इन ऋषियों के वंशज माने जाते हैं. गोत्र का नाम लेकर पूजा करने से ही पूजा सफल होती है इसलिए हर पूजा में अपने गोत्र के ऋषि का नाम लेना चाहिए. ऋषि पंचमी को अपने गोत्र के ऋषि का नाम लिखें. उस पर फल, फूल, मिठाई चढ़ाएं. शुक्रवार की ऋषि पंचमी को नमक का सेवन नहीं किया जाता और एक बार भोजन किया जाता है, दही चावल खाया जाता है लेकिन इस दिन ऋषि पंचमी की कथा ज़रूर सुननी चाहिए.
क्या है ऋषि पंचमी की कथा
सतयुग में एक शयणजीत नामक राजा था
उसके राज में एक सुमित्र नाम का पुजारी , और
वेदों का विद्वान रहता था.
सुमित्र खेती द्वारा अपना परिवार चलाता था
उसकी पत्नी का नाम जयश्री था.
दोनों खेतों में काम करते थे, एक बार सुमित्र बीमार थे
उसकी पत्नी ने बगैर स्नान किये
अपवित्र अवस्था में अनजाने में घर का काम भी किया
और पति को स्पर्श भी कर लिया.
उनकी मृत्यु के बाद ब्राह्मण सुमित्र का जन्म बैल के रूप
में हुआ और उसकी पत्नी का जन्म एक कुत्ते के रूप में
हुआ. दोनों अपने ही घर में वापस आ गए.
बैल और कुत्ते ने क्या किया?
ब्राह्मण के पुत्र का नाम सुमति था, वो भी वेदों का विद्वान था
उसने बैल और कुत्तिया को अपने घर में रखा हुआ था
एक बार सुमति ने माता-पिता का श्राद्ध किया, ब्राह्मणों के
भोजन के लिए खीर बनाई, खीर में एक सांप गिर गया और खीर ज़हरीली हो गयी
तो कुत्ता बनी ब्राह्मणी ने यह सब देख लिया था, उसने सुमति को पाप से बचाने
के लिए सुमति की पत्नी के सामने खीर को छू लिया , इस पर सुमति की पत्नी ने
बिना समझे , जलती लकड़ी से कुत्ते की पिटाई कर दी और उसे खाना भी नही दिया
बाद में कुत्ते ने बैल बने ब्राह्मण को सच्ची बात बताई तो उनके बेटे सुमति ने
सब बात सुन ली और उसको समझ में आ गया की यह बैल और कुत्ता असल में
उसके माता-पिता है जिन्होंने पशु के रूप में दूसरा जन्म लिया है.
सुमति के माता पिता कुत्ते और बैल से आदमी कैसे बने?
सुमति दुखी होकर माता-पिता की मुक्ति के लिए एक ऋषि के पास गया
ऋषि ने माता-पिता की पशु योनि से मुक्ति के लिए एक उपाय बताया
ऋषि ने बताया भादो शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी का व्रत करो
उस दिन अपने कुल ऋषि की पूजा करो और बैल से जोते हुए कोई अन्न
मत खाओ.
सुमति ने ऐसा ही किया और माता-पिता को पशु योनि से मुक्ति मिल गयी.
वह नए जन्म में फिर इंसान बन गए
प्रज्ञा बाजपेयी