जानिए, क्या है रंगपंचमी और इसका महत्व

रंगपंचमी होली का ही एक भाग है. होली का उत्सव चैत्र मास की कृष्ण प्रतिपदा से लेकर पंचमी तक चलता है. कृष्ण पंचमी के दिन भी लोग गुलाल से देखते हैं. इसलिए इसे रंग पंचमी कहा जाता है. रंग पंचमी कोकण क्षेत्र का खास त्यौहार है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

रोहित

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  • 04 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 12:04 PM IST

रंगपंचमी, होली के ठीक पांच दिन बाद चैत्र मास की कृष्ण पंचमी को मनाई जाती है. इस बार रंगपंचमी 6 मार्च को मनाई जाएगी. यह पर्व खासतौर से महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में मनाया जाता है. देश के कुछ अन्य हिस्सों में भी लोग इसे धूमधाम से मनाते हैं.

रंगपंचमी होली का ही एक भाग है. होली का उत्सव चैत्र मास की कृष्ण प्रतिपदा से लेकर पंचमी तक चलता है. कृष्ण पंचमी के दिन भी लोग गुलाल से देखते हैं. इसलिए इसे रंग पंचमी कहा जाता है. रंग पंचमी कोकण क्षेत्र का खास त्यौहार है.

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लोग मानते हैं कि हवा में रंग उड़ाने पर और एक-दूसरे को लगाने पर विभिन्न रंगों की ओर देवता आकर्षित होते हैं. इससे वातावरण ब्रह्मांड में सकारात्मक तंरगों का संयोग बनता है और रंग कणों में संबंधित देवताओं के स्पर्श की अनुभूति होती है. माना जाता है कि इस दिन वातावरण में उड़ते हुए गुलाल व्यक्ति में सकारात्मक गुणों भरते हैं और नकारात्मकता का नाश करते हैं. 

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मान्यताओं के अनुसार व्यक्ति के अंदर रज और तम गुण होते हैं जो नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं. इस दिन लोग पूरे शहर में रंगारंग जुलूस निकालते हैं. रंग पंचमी पर एक विशेष प्रकार का मीठा पकवान भी घरों में बनाया जाता है. जिसे पूरनपोली कहा जाता है.

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होली ब्रह्मांड के तेज का उत्सव है. विविध तेजोत्सव तरंगों के भ्रमण से ब्रह्मांड में अनेक रंग आवश्यकता के अनुसार साकार होते हैं तथा संबंधित घटक के कार्य के लिए पूरक व पोषक वातावरण की निर्मित करते हैं. इस दिन वायुमंडल में उड़ाए जाने वाले विभिन्न रंगों के रंग कणों की ओर विभिन्न देवताओं के तत्व आकर्षित होते हैं. ब्रह्मांड में कार्यरत सकारात्मक तरंगों के संयोग से होकर जीव को देवता के स्पर्श की अनुभूति देकर देवता आशिर्वाद देते हैं.     

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