आलू, अंडा और चाय उबाल गुरु ने शिष्यों को सिखाया- मुश्किलों से कैसे निपटें

जीवन में अगर लक्ष्य बड़ा होगा तो मुश्किलें भी बड़ी होंगी. मुश्किल स्थिति में व्यक्ति सकारात्मक रहकर धैर्य के साथ काम करेगा तो वह मजबूत बन सकता है. मुश्किल हालत में व्यक्ति और अधिक योग्य बन जाता है. आइए जानते हैं कि वह कहानी जिससे जीवन में आप कुछ करने की प्रेरणा ले सकते हैं.

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जीवन का मुश्किल दौर जीवन का मुश्किल दौर

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 3:42 PM IST

जीवन में सुख और दुख तो लगा रहता है. जब भी जीवन में कोई परेशानी आती है तो हमें लगता है कि हमारा मुश्किल दौर शुरू हो गया है. लेकिन, क्या आपको पता है कि मुश्किल दौर से निकलना जीवन की सबसे बड़ी चुनौति है. जीवन में हमेशा उतार चढ़ाव लगे रहते हैं. जीवन में तो कई चुनौतियां आती हैं लेकिन ये आप पर निर्भर करता है कि आप उनसे किस तरह लड़ते हैं और चुनौतियों से लड़ने के बाद आप क्या हासिल करते हैं. आइए आपको ऐसी प्रेरणादायक कहानी सुनाते हैं जिससे जीवन में आप कुछ हासिल कर पाएंगे. 

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एक बार की बात है, एक कक्षा में गुरुजी अपने छात्रों को समझाना चाहते थे कि प्रकृति सभी को समान अवसर देती हैं और उस अवसर का इस्तेमाल करके अपना भाग्य खुद बना सकते है. इसी बात को ठीक तरह से समझाने के लिए गुरुजी ने तीन कटोरे लिए. पहले कटोरे में एक आलू रखा, दूसरे में अंडा और तीसरे कटोरे में चाय की पत्ती डाल दी. अब तीनों कटोरों में पानी डालकर उनको गैस पर उबलने के लिए रख दिया. सभी छात्र ये सब हैरानी से देख रहे थे कि लेकिन किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था. 

बीस मिनट बाद जब तीनों बर्तन में उबाल आने लगा, तो गुरुजी ने सभी कटोरों को नीचे उतारा और आलू, अंडा और चाय को बाहर निकाला. अब उन्होंने सभी छात्रों से तीनों कटोरों को गौर से देखने के लिए कहा. अब भी किसी छात्र को समझ नहीं आ रहा था. आखिर में गुरु जी ने एक बच्चे से तीनों (आलू, अंडा और चाय) को स्पर्श करने के लिए कहा. जब छात्र ने आलू को हाथ लगाया तो पाया कि जो आलू पहले काफी कठोर था, पानी में उबलने के बाद काफी मुलायम हो गया था. 
 
जब छात्र ने, अंडे को उठाया तो देखा जो अंडा पहले बहुत नाज़ुक था, उबलने के बाद वह कठोर हो गया है. अब बारी थी चाय के कप को उठाने की. जब छात्र ने, चाय के कप को उठाया तो देखा चाय की पत्ती ने गर्म पानी के साथ मिलकर अपना रूप बदल लिया था और अब वह चाय बन चुकी थी. अब गुरु जी ने समझाया, तीनों अलग अलग चीजें समान विपत्ति से गुजरी, यानी कि तीनों को समान रूप से पानी में उबाला लेकिन बाहर आने पर तीनों चीजें एक जैसी नहीं मिली. आलू जो कठोर था वो मुलायम हो गया, अंडा पहले से कठोर हो गया और चाय की पत्ती ने भी अपना रूप बदल लिया उसी तरह यही बात इंसानों पर भी लागू होती है. 

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शिक्षा- जीवन में मुश्किलों का आना जाना लगा ही रहता है लेकिन अंत में सफल वही मनुष्य होता है जो इन मुश्किलों के आगे अपने घुटने ना टेके और हर समस्या का खुलकर सामना करें क्योंकि अंत में दुनिया उसे ही याद करती है जो विजेता होता है. 

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