भाई दूज पर कैसे करें चित्रगुप्त की उपासना? इस मंत्र का करें जाप

माना जाता है कि जो भाई इस दिन बहन के घर पर जाकर भोजन ग्रहण करता है और तिलक करवाता है. उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती.

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इस तिथि से यमराज और द्वितिया तिथि का सम्बन्ध होने के कारण इसको यमद्वितिया भी कहा जाता है. इस तिथि से यमराज और द्वितिया तिथि का सम्बन्ध होने के कारण इसको यमद्वितिया भी कहा जाता है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 1:21 PM IST

दीपों के त्योहार दिवाली के बाद भैया दूज का पर्व मनाया जाता है. इस तिथि से यमराज और द्वितिया तिथि का सम्बन्ध होने के कारण इसको यमद्वितिया भी कहा जाता है. इस दिन बहनें अपने भाई का तिलक करती हैं. उसका स्वागत सत्कार करती हैं और उनके लम्बी आयु की कामना करती हैं.

माना जाता है कि जो भाई इस दिन बहन के घर पर जाकर भोजन ग्रहण करता है और तिलक करवाता है. ऐसा करने से उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती. भईया दूज के दिन ही यमराज के सचिव चित्रगुप्त जी की भी पूजा होती है. इस बार भइया दूज का पर्व 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा.

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इस दिन चित्रगुप्त जी की उपासना कैसे करें ?

- प्रातः काल पूर्व दिशा में चौक बनायें

- इस पर चित्रगुप्त भगवान् के विग्रह की स्थापना करें

- उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं, पुष्प और मिष्ठान अर्पित करें

- उन्हें एक कलम भी अर्पित करें

- इसके बाद एक सफेद कागज पर हल्दी लगाकर उस पर "श्री गणेशाय नमः" लिखें

- फिर "ॐ चित्रगुप्ताय नमः" 11 बार लिखें

- भगवान चित्रगुप्त से विद्या, बुद्धि और लेखन का वरदान मांगें

- अर्पित की हुई कलम को सुरक्षित रखें, वर्ष भर प्रयोग करें

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