Bada Mangal 2024: आखिर अवध के नवाब का बड़ा मंगल पर्व से क्या है संबंध, जानें इसकी पौराणिक कथा

Bada Mangal 2024: ज्येष्ठ माह का दूसरा बड़ा मंगल 4 जून यानी आज मनाया जा रहा है. बड़ा मंगल मनाने की परंपरा कहा से शुरू हुई. कहते हैं कि बड़ा मंगल त्योहार मनाने की परंपरा अवध के नवाब वाजिद अली शाह द्वारा 400 साल पहले शुरू की गई थी. लेकिन क्यों चलिए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा.

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बड़ा मंगल 2024 बड़ा मंगल 2024

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 जून 2024,
  • अपडेटेड 7:00 AM IST

Bada Mangal 2024: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ मास में हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व है. इस महीने के प्रत्येक मंगल को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है. ज्येष्ठ माह के मंगल को बजरंगबली की पूजा अर्चना करने से सभी प्रकार के दुख-कष्ट दूर हो जाते हैं और घर में सुख समृद्धि का वास होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ के महीने में ही त्रेतायुग में भगवान राम की मुलाकात बजरंगबली से हुई थी इसलिए, इस महीने के हर मंगलवार को बड़ा मंगल के नाम से जाना जाता है. ज्येष्ठ मास का दूसरा बड़ा मंगल 4 जून यानी आज मनाया जा रहा है. लेकिन, बड़ा मंगल मनाने की परंपरा कहा से शुरू हुई. चलिए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा.
 
ऐसे शुरू हुई बड़ा मंगल की परंपरा

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ऐतिहासिक शहर लखनऊ में बड़ा मंगल जैसा महापर्व मनाने का इतिहास जुड़ा हुआ है. यहां बड़ा मंगल बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. बताया जाता है कि करीब 400 साल पहले अवध के नवाब मोहम्मद अली शाह के बेटे की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई थी जिसकी वजह से उनकी बेगम बहुत दुखी रहती थीं. तमाम प्रयासों के बाद भी जब बेटा ठीक नहीं हुआ तो तब कुछ लोगों ने बेगम को लखनऊ के अलीगंज स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में मंगलवार को दुआ मांगने की सलाह दी. उन्होंने ऐसा ही किया और थोड़े दिन बाद बेटे की तबीयत में सुधार होने लगा. इसी खुशी में नवाब और उनकी बेगम ने अलीगंज के पुराने हनुमान मंदिर का जीर्णोद्धार कराया, जिसका काम ज्येष्ठ माह में पूरा हुआ. इसे एक उत्सव की तरह मनाया गया और पूरे लखनऊ में गुड का प्रसाद बटवाया गया. तभी से बड़ा मंगल के दिन लखनऊ में एक उत्सवी परंपरा की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे ये बहुत लोकप्रिय होता गया.  

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दूसरी पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल रामायण काल से भी जुड़ा हुआ माना जाता है. रामायण काल में एक बार सीता माता को खोजते हुए जब हनुमानजी लंका पहुंचे तो रावण ने हनुमान जी को बंदर कहकर उनका अपमान किया. रावण के घमंड को चकनाचूर करने के लिए भी हनुमानजी ने वृद्ध वानर का रूप धारण किया था और अपनी पूंछ से लंका को जलाकर लंकापति रावण का घमंड चकनाचूर किया था.

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