अगर हम चरित्र की बात करते हैं तो सबसे पहले समझते हैं कि चरित्र होता क्या है और चरित्र का किस ग्रह से संबंध है. चरित्र सामाजिक और लोगों की मान्यता से निर्धारित होता है. समाज आपके बारे में क्या मान्यता रखता है, इससे चरित्र का सीधा संबंध होता है. शुक्र और चंद्र का सीधा संबंध चरित्र से होता है क्योंकि शुक्र और चंद्रमा किसी व्यक्ति के बारे में विचार व्यक्त करते हैं. ये चरित्र के बारे में लोगों की मान्यता निर्धारित करते हैं. लेकिन वास्तविक चरित्र का निर्माण करता है बृहस्पति. चरित्र के बारे में समस्या देने वाले जो ग्रह है शनि, राहु, केतु, कमजोर चंद्रमा और पापकरांत बुध. कुछ योग भी ऐसे होते हैं जो कि आपके चरित्र को गड़बड़ कर सकते हैं.
उपाय
1. सूर्य को जल अर्पित करना
रोज सुबह हल्दी मिलाकर सूर्य भगवान को जल अर्पित करना है.
2. गायत्री मंत्र
सुबह और शाम 108 बार गायत्री मंत्र का जप करिए. गायत्री मंत्र करने से मन साफ रहता है.
3. पूर्णिमा व्रत
महीने में एक बार पूर्णिमा का उपवास रखें और उस दिन सिर्फ जल और फल अर्पित करें.
4. मसालेदार खाने से परहेज
मसालदार और बासी भोजन से परहेज करें क्योंकि ये आपके मन पर नकारात्मक असर पैदा कर सकते हैं.
5. पीला पुखराज
सलाह लेकर एक पीला पुखराज या पन्ना धारण करें. इससे आपका मन नियंत्रण में रहता है. पीले रंग का जितना ज्यादा हो प्रयोग करें. पीले रंग के वस्त्र धारण करें. यानी जितनी ज्यादा आसपास सकारात्मकता होगी उतना ही मन मजबूत होना शुरू हो जाएगा.
बृहस्पति ज्योतिष में सबसे ज्यादा शुभ ग्रह मानते हैं. बृहस्पति से व्यक्ति को विद्या, ज्ञान, अध्यात्म और ईश्वर की कृपा मिलती है. अगर आपकी कुंडली में बृहस्पति शुभता लिए हुए है. तो ये आपके मन को अच्छा बनाने की कोशिश करता है. कभी कभी बृहस्पति आपके मन में घमंड और लालच भी पैदा करता है. इससे व्यक्ति भटकता नहीं है या व्यक्ति गलत रास्ते पर जाने से बचता है. कुंडली में चंद्रमा के होने से चंद्रमा से व्यक्ति को लोकप्रियता, अच्छा मन, पारिवारिक सुख प्राप्त होता है. इसके कमजोर होने पर मानसिक समस्या होती है, तनाव बना रहता है. इसी के साथ स्त्री पक्ष से कष्ट होता है. चंद्रमा से लाभ लेने के लिए माता का सम्मान जरूर करें.
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