टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा ने 86 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया है. 9 अक्टूबर की रात साढ़े 11 बजे मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में रतन टाटा ने आखिरी सांस ली. अपनी जिंदगी समाज के उद्धार के लिए समर्पित करने वाले रतन टाटा का पार्थिव शरीर तिरंगे में लपेटकर राजकीय सम्मान के साथ नरीमन पॉइंट स्थित एनसीपीए हॉल ले जाया गया. जहां गृहमंत्री अमित शाह, रिलायंस चेयरमैन मुकेश अंबानी समेत देश के कई बड़ी हस्तियां श्रद्धांजलि देने पहुंचे. एनसीपीए में रतन टाटा की प्रार्थना सभा के दौरान सौहार्द से भरा नजारा भी देखने को मिला. रतन टाटा की प्रार्थना सभा में ना सिर्फ पारसी बल्कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्मगुरु ने एक साथ मिलकर महान आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.
टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे. परेशानी बढ़ने पर उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल में ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी देखरेख में थी. रतन टाटा के निधन की खबर आते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई.
रतन टाटा के निधन के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आज यानी गुरुवार 10 अक्टूबर को राजकीय शोक घोषित किया है. इसके चलते महाराष्ट्र में सभी सरकारी कार्यालयों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा. इसके साथ ही झारखंड में राजकीय शोक का ऐलान किया गया है.
पारसी रीति-रिवाजों से नहीं होगा अंतिम संस्कार
टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा पारसी थे लेकिन उनका अंतिम संस्कार पारसी रीति-रिवाजों से नहीं किया जाएगा. बल्कि, रतन टाटा का अंतिम संस्कार वर्ली स्थित इलेक्ट्रिक अग्निदाह में होगा. आपको बता दें कि पारसी अंतिम संस्कार का रिवाज काफी अलग होता है.
जैसे हिंदू धर्म में शव जलाया जाता है, इस्लाम और ईसाई धर्म में शव को दफनाया जाता है. लेकिन, पारसी लोगों में शव को आसमान को सौंपते हुए टावर ऑफ साइलेंस (दखमा) के ऊपर सूरज की किरणों के बीच रख दिया जाता है.इसके बाद गिद्ध शव को आकर खा जाते हैं. गिद्धों का शवों को खाना भी पारसी समुदाय के रिवाज का ही हिस्सा है. पारसी लोगों में अंतिम संस्कार की इस प्रक्रिया को दोखमेनाशिनी कहा जाता है.
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