Makar Sankranti 2023: मकर संक्रांति पर क्या है खिचड़ी का महत्व, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Makar Sankranti 2023: इस बार 15 जनवरी 2023, रविवार को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. मकर संक्रांति के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है. पौराणिक मान्यता के अनुसार, मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाना और उसका दान करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. आइए जानते हैं कि खिचड़ी का इस दिन क्या महत्व होता है.

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मकर संक्रांति पर खिचड़ी का महत्व मकर संक्रांति पर खिचड़ी का महत्व

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 10:00 PM IST

Makar Sankranti 2023: मकर संक्रांति का त्योहार आन वाला है. इस बार 15 जनवरी 2023 यानी कल मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि मे प्रवेश करते हैं तब इसे सूर्य देव का संक्रमण काल कहा जाता है, इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है. कुछ जगहो पर इसे खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है. इसके अलावा इसी दिन महाभारत के समय भीष्म पितामह ने सूर्य उत्तरायण होने पर ही अपने शरीर का त्याग किया था, इसी दिन उनका श्राद्ध कर्म तर्पण किया गया था. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने और दान करने का विशेष महत्व है. 

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खिचड़ी का महत्व

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति की खिचड़ी चावल, काली दाल, हल्दी, मटर और हरी सब्जियों का विशेष महत्व है. खिचड़ी के चावल से चंद्रमा और शुक्र की शांति का महत्व है. काली दाल से शनि, राहू और केतु का महत्व है, हल्दी से बृहस्पति का संबंध है और हरी सब्जियों से बुध का संबंध है. वहीं जब खिचड़ी पकती है तो उसकी गर्माहट का संबंध मंगल और सूर्य देव से है. इस प्रकार लगभग सभी ग्रहों का संबंध खिचड़ी से है, इसलिए मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने और दान का महत्व अधिक होता है.

खिचड़ी की पौराणिक कथा

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि खिचड़ी से जुड़ी एक बाबा गोरखनाथ की कथा है. मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने की ऐसी भी मान्यता है कि खिलजी के आक्रमण के दौरान बाबा गोरखनाथ के योगी खाना नहीं बना पाते थे और भूखे रहने की वजह से हर ढलते दिन के साथ कमजोर हो रहे थे. योगियों की बिगड़ती हालत को देखते हुए बाबा ने अपने योगियों को चावल, दाल और सब्जियों को मिलाकर पकाने की सलाह दी. यह भोजन कम समय में तैयार हो जाता था और इससे योगियों को ऊर्जा भी मिलती थी. बाबा गोरखनाथ ने इस दाल, चावल और सब्जी से बने भोजन को खिचड़ी का नाम दिया. यही कारण है कि आज भी मकर संक्रांति के पर्व पर गोरखपुर में स्थित बाबा गोरखनाथ के मंदिर के पास खिचड़ी का मेला लगता है. इस दौरान बाबा को खासतौर पर खिचड़ी को भोग लगाया जाता है.

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मकर संक्रांति की तारीख और शुभ मुहूर्त 

मकर संक्रांति की शुरुआत 14 जनवरी 2023 को रात 08 बजकर 43 मिनट पर होगी लेकिन उदयातिथि के अनुसार, इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी 2023 को ही मनाई जाएगी. मकर संक्रांति के दिन पुण्यकाल और महापुण्यकाल में स्नान-दान बेहद फलदायी माना जाता है. इस बार पुण्य काल मुहूर्त 15 जनवरी को सुबह 06 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगा और इसका समापन शाम 05 बजकर 40 मिनट पर होगा. वहीं महापुण्य काल सुबह 07 बजकर 15 मिनट से सुबह 09 बजकर 06 मिनट तक रहेगा.

कैसे प्रसन्न होंगे भगवान सूर्य नारायण? 

मकर संक्रांति पर सूर्य और भगवान विष्णु की पूजा का विधान है. यह व्रत भगवान सूर्य नारायण को समर्पित है. इस दिन भगवान को तांबे के पात्र में जल, गुड़ और गुलाब की पत्तियां डालकर अर्घ्य दें. गुड़, तिल और मूंगदाल की खिचड़ी का सेवन करें और इन्हें गरीबों में बांटें. इस दिन गायत्री मंत्र का जाप करना भी बड़ा शुभ बताया गया है. आप भगवान सूर्य नारायण के मंत्रों का भी जाप कर सकते हैं. 
 

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