महाशिवरात्रि पर बस्तर से लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करने ओडिशा के गुप्तेश्वर मंदिर पहुंचते हैं. इस मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बेहद रोमांचक है. इसके लिए पहले जगदलपुर से तिरिया की कोलाब नदी के तट तक वाहन से पहुंचना पड़ता है. इसके बाद उफनती नदी पर चटाई से बने अस्थायी पुल को पैदल पार करना पड़ता है.
नदी पार कर ओडिशा के गुप्तेश्वर पहुंचते ही गुफा में भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग दिखाई देता है. कहते हैं कि इनके दर्शन मात्र से ही अद्भुत शांति मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
शहर से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित गुप्तेश्वर का सफर बेहद रोमांचक है. पहले जगदलपुर से ओडिशा बॉर्डर धनपुंजी पहुंचें और यहां से माचकोट, तिरिया होते हुए गुप्तेश्वर चले जाएं. माचकोट से ही जंगल शुरू हो जाता है. वहीं, तिरिया से 12 किलोमीटर दूर गुप्तेश्वर महादेव है. इसका रोमांचक सफर तिरिया से शुरू हो जाता है. यहां जंगल की संकरी सड़कें और रास्ते के दोनों ओर साल-सागौन के घने जंगल हैं, जहां सूर्य की रोशनी भी मुश्किल से पहुंचती है. इस 12 किलोमीटर के रोमांचक सफर के बाद चट्टानों पर चिंघाड़ती-दहाड़ती शबरी नदी आती है.
यहां तक दो पहिया या चार पहिया वाहन से पहुंचा जा सकता है. इसके बाद शबरी नदी की विशाल चट्टानों पर बांस की चटाई से बना पुल पार करना पड़ता है. नदी की चट्टानें कटीली और धारदार हैं. ऐसे में बिना जूते और चप्पल के नदी के उस पार नहीं जा सकते. शबरी नदी और पहाड़ी पर करीब एक से डेढ़ किमी की दूरी पैदल चलने पर गुप्तेश्वर की पहाड़ी का आकर्षक दृश्य नजर आता है. इसके बाद गुप्तेश्वर करीब 150 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़कर महादेव के मंदिर पहुंच सकते हैं.
यहां गुफा के अंदर विशालकाय गुप्तेश्वर महादेव का शिवलिंग है. गुप्तेश्वर महादेव के दर्शन के लिए इस रास्ते पर सिर्फ शिवरात्रि और गर्मी के मौसम में ही जा सकते हैं. वहीं, ओडिशा के जैपुर से करीब 60 किमी की दूरी तय कर गुप्तेश्वर पहुंचा जा सकता है.
दूसरे राज्यों से भी आते हैं लाखों लोग
गुप्तेश्वर में वैसे तो सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. लेकिन महाशिवरात्रि पर लाखों भक्त आते हैं. हर साल शिवरात्रि पर चार दिन का मेला लगता है. इस बार भी शबरी नदी के दोनों ओर मेले के लिए दुकानें सजी हैं. मंदिर के पुजारियों ने बताया कि महाशिवरात्रि पर ओडिशा, छत्तीसगढ़ के अलावा अन्य राज्यों से हर साल एक से डेढ़ लाख भक्त दर्शन के लिए आते हैं.
(इनपुट- धर्मेंद्र महापात्रा)
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