Kaal Bhairav Jayanti 2020: काल भैरव जयंती आज, इनकी पूजा में भूलकर भी न हो जाएं ये 4 गलतियां

शनि और राहु की बाधाओं से मुक्ति के लिए भैरव की पूजा अचूक होती है. मार्गशीर्ष में भगवान भैरव की विशेष उपासना कालाष्टमी पर की जाती है. इस बार कालाष्टमी 07 दिसंबर को मनाई जाएगी.

Advertisement
काल भैरव की पूजा में न हो जाएं ये 4 गलतियां, जानें प्रसन्न करने के उपाय काल भैरव की पूजा में न हो जाएं ये 4 गलतियां, जानें प्रसन्न करने के उपाय

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 10:42 AM IST
  • भैरव की उपासना से भय और अवसाद का नाश होता है
  • शिव मार्ग पर चलने वाले को भैरव कहा जाता है

शिव की तंत्र साधना में भैरव का विशेष महत्व है. भैरव वैसे तो शिव जी के ही रौद्र रूप हैं, लेकिन कहीं-कहीं इन्हें शिव का पुत्र भी माना जाता है. ऐसी भी मान्यताएं हैं कि जो कोई भी शिव के मार्ग पर चलता है, उसे भैरव कहा जाता है. इनकी उपासना से भय और अवसाद का नाश होता है. व्यक्ति को अदम्य साहस मिल जाता है. शनि और राहु की बाधाओं से मुक्ति के लिए भैरव की पूजा अचूक होती है. मार्गशीर्ष में भगवान भैरव (Kaal Bhairav Jayanti) की विशेष उपासना कालाष्टमी पर की जाती है. इस बार कालाष्टमी 07 दिसंबर को मनाई जाएगी.

Advertisement

भैरव के स्वरूप और उपासना
भैरव के तमाम स्वरूप बताए गए हैं.  असितांग भैरव, रूद्र भैरव, बटुक भैरव और काल भैरव आदि. मुख्यतः बटुक भैरव और काल भैरव स्वरूप की पूजा और ध्यान सर्वोत्तम मानी जाती है. बटुक भैरव भगवान का बाल रूप है. इन्हें आनंद भैरव भी कहते हैं. इस सौम्य स्वरूप की आराधना शीघ्र फलदायी होती है.

काल भैरव इनका साहसिक युवा रूप है. इनकी आराधना से शत्रु से मुक्ति, संकट, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय की प्राप्ति होती है. असितांग भैरव और रूद्र भैरव की उपासना अति विशेष है, जो मुक्ति मोक्ष और कुंडलिनी जागरण के दौरान प्रयोग की जाती है.

आज कैसे करें भैरव की पूजा
संध्याकाल में भैरव जी की पूजा करें. इनके सामने एक बड़े से दीपक में सरसों के तेल का दीपक जलाएं. इसके बाद उरद की बनी हुई या दूध की बनी हुई वस्तुएं उन्हें प्रसाद के रूप में अर्पित करें. विशेष कृपा के लिए इन्हें शरबत या सिरका भी अर्पित करें. तामसिक पूजा करने पर भैरव देव को मदिरा भी अर्पित की जाती है. प्रसाद अर्पित करने के बाद भैरव जी के मन्त्रों का जाप करें.

Advertisement

भैरव की पूजा की सावधानियां
गृहस्थ लोगों को भगवान भैरव की तामसिक पूजा नहीं करनी चाहिए. सामान्यतः बटुक भैरव की ही पूजा करें. यह सौम्य पूजा है. काल भैरव की पूजा कभी भी किसी के नाश के लिए न करें. साथ ही काल भैरव की पूजा बिना किसी योग्य गुरु के संरक्षण के न करें.

भगवान भैरव के विशेष मंत्र
-"ॐ भैरवाय नमः"
-"ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ"
- "ॐ भं भैरवाय अनिष्टनिवारणाय स्वाहा"

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement