Janki Jayanti 2024: जानकी जयंती आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और दिव्य मंत्र

इस साल जानकी जयंती का व्रत सोमवार, 4 मार्च को रखा जाएगा. कहते हैं कि इस दिन माता सीता और भगवान श्रीराम की विधिवत उपासना से भक्तों के संकट दूर हो जाते हैं. आइए जानते हैं कि इस बार जानकी जयंती पर पूजा का महूर्त क्या रहेगा.

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सनातन धर्म में माता सीता को देवी लक्ष्मी का एक स्वरूप माना गया है. जानकी जयंती के दिन उपवास करने से माता सीता मनोवांछित फल देती हैं. सनातन धर्म में माता सीता को देवी लक्ष्मी का एक स्वरूप माना गया है. जानकी जयंती के दिन उपवास करने से माता सीता मनोवांछित फल देती हैं.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 6:00 AM IST

Janki Jayanti 2024: फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जानकी जयंती का त्योहार मनाया जाता है. इसे सीता अष्टमी भी कहा जाता है. इस बार जानकी जयंती का व्रत सोमवार, 4 मार्च यानी आज रखा जाएगा. कहते हैं कि इस दिन माता सीता और भगवान श्रीराम की विधिवत उपासना से भक्तों के संकट दूर हो जाते हैं. आइए जानते हैं कि जानकी जयंती पर पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि क्या रहेगी.

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जानकी जयंती का महत्व
सनातन धर्म में माता सीता को देवी लक्ष्मी का एक स्वरूप माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, जानकी जयंती के दिन उपवास करने से माता सीता मनोवांछित फल देती हैं. इससे पति को दीर्घायु का वरदान मिलता है. निसंतान दम्पत्तियों के लिए भी जानकी जयंती का व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से दंपत्ति को संतान सुख की प्राप्ति होती है. 

जानकी जयंती का शुभ मुहूर्त
फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 मार्च को सुबह 08 बजकर 44 मिनट से लेकर 4 मार्च को सुबह 08 बजकर 49 मिनट तक रहेगी. इस दिन देवी सीता की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 09 बजकर 38 मिनट से लेकर सुबह 11 बजकर 05 मिनट तक रहने वाला है.

जानकी जयंती की पूजन विधि
जानकी जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें. माता सीता को प्रसन्न करने के लिए व्रत और पूजा का संकल्प लें. मंदिर के सामने एक चौकी पर लाल रंग का वस्त्र डालकर माता सीता और प्रभु राम की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें.

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प्रतिमा को स्थापित करने के बाद रोली, अक्षत, सफेद फूल अर्पित करें. राजा जनक और माता सुनयना की भी पूजा करें. जानकी जयंती के दिन श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान पुण्य करें. संभव हो तो शाम के वक्त कन्‍याभोज या ब्राह्मण भोज करें.

माता सीता के दिव्य मंत्र
- श्री सीतायै नम:।
- श्रीरामचन्द्राय नम:।
- श्री रामाय नम:।
- ॐ जानकीवल्लभाय नमः।
- श्रीसीता-रामाय नम:।

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