राजस्थान के बाड़मेर में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा क्लेम बांटा गया है. इसमें किसानों के खाते में 2 रुपए से लेकर 100 रुपए ट्रांसफर किए गए हैं. कई किसान ऐसे भी हैं, जिनके खाते में कोई बीमा क्लेम की राशि जमा ही नहीं हुई है. इस पर राजस्थान और केंद्र की सरकार एक-दूसरे पर जमकर निशाना साध रहे हैं.
दरअसल, साल 2021 में पूरे बाड़मेर जिले को राजस्थान सरकार ने अकाल घोषित किया था. इसके बाद प्रधानमंत्री फसल बीमा क्लेम को लेकर किसान अपने हक के लिए आवाज उठा रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ इस मुद्दे को लेकर राजनीति शुरू हो गई है.
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री ने गहलोत सरकार पर फोड़ा ठीकरा
कांग्रेस के विधायक हरीश चौधरी ने केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी को बाड़मेर के किसानों को पूरा क्लेम दिलाने के लिए निशाने पर लिया है. दूसरी तरफ केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने सारा ठीकरा राजस्थान की गहलोत सरकार पर फोड़ दिया है.
चार हजार का बीमा प्रीमियम, चार हजार मिला मुआवजा
वहीं, निंबलकोट गांव के रहने वाले किसान खुमाराम का कहना है कि उनके पास 65 बीघा जमीन है. पूरी जमीन पर साल 2021 में खेती की थी. बारिश नहीं होने से सारी फसल खराब हो गई.
हमें लगा था कि भगवान रूठा है, लेकिन सरकार नहीं रूठेगी. बीमा क्लेम अच्छा मिल जाएगा. मगर, इस बार खाते में सिर्फ 9 रुपए 62 पैसे ही बीमा क्लेम आया है. अब वह परेशान हैं कि कर्जा चुकाएं या घर का खर्चा चलाएं.
किसान गंगाराम का कहना है कि एक बारिश होते ही खेत में बुवाई कर दी थी. उन्होंने चार हजार रुपए का बीमा प्रीमियम लिया था. अब चार हजार रुपए का ही बीमा क्लेम आया है. बुवाई के समय करीब 30 से 35 हजार रुपया खर्च हो गए थे.
कई किसानों के खाते में एक रुपए भी नहीं पहुंचे
निंबलकोट कॉपरेटिव सोसायटी के व्यवस्थापक जसराज चौधरी का कहना है कि मेरी सोसायटी में किसानों के खाते में 2 रुपए, 5 रुपए और 10 रुपए तक का बीमा क्लेम आया है. सबसे अधिक 10 हजार का बीमा क्लेम आया है. कई किसान ऐसे भी है, जिनके खाते में अब तक कोई बीमा क्लेम की राशि जमा ही नहीं हुई है.
इंश्योरेंस कंपनी ने 25 फीसदी फसल को माना खराब
मामले में बाड़मेर के जिला कलेक्टर लोक बंधु ने बताया, "फसल बीमा क्लेम को लेकर इंश्योरेंस कंपनी किसानों को क्लेम कम देना चाहती थी. मगर, हमने अपने पटवारियों से एक-एक खेत का सर्वे करवाकर और फोटो उपलब्ध करवाया. साल 2021 में बाड़मेर जिले की सभी तहसीलों को सरकार ने अकालग्रस्त घोषित कर दिया था. मगर, इंश्योरेंस कंपनी 25 फीसदी फसल को खराब मान रही थी."
उन्होंने आगे बताया, "इसके बाद हमने अपने पटवारियों से एक-एक खेत की गिरदावरी रिपोर्ट करवाई. इसके आधार पर नए तरीके से इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम तैयार किया. अब कुछ किसानों के खाते में बहुत कम पैसा आया है. हमने कंपनी के बड़े अधिकारियों को तलब किया है. कुल 600 करोड़ रुपए के आसपास का क्लेम आना था. मगर, अभी तक 311 करोड़ रुपए का ही क्लेम आया है."
दिनेश बोहरा